बाड़मेर : जिले के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल कवास में एक अनोखा दृश्य देखने को मिला, जिसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया. 70 साल के आसपास के छात्र धोती-कुर्ता और साफा पहनकर स्कूल पहुंचे. तमिलनाडु के पूर्व डीजीपी सांगाराम जांगिड़ समेत उनके सभी सहपाठी कक्षा में दरी पर बैठे और 90 साल के शिक्षक उन्हें पढ़ाते हुए नजर आए. सभी 22 विद्यार्थी जमीन पर बैठे थे और गणित के टीचर भींयाराम चौधरी, टीचर स्वरूप सिंह महेचा और हिंदी के टीचर जेठनाथ गोस्वामी ने सभी को पढ़ाया. इससे 50 साल पहले का दृश्य एक बार फिर से जीवंत हो गया. यह दृश्य सुनने और देखने में जितना अलग लग रहा है, उतना ही यादगार भी रहा.
तमिलनाडु के पूर्व डीजीपी सांगाराम जांगिड़ ने बताया कि गांव में कक्षा 10वीं पास करने के बाद स्कूली जीवन के बाद सभी स्टूडेंट बिछड़ गए थे. कुछ सहपाठी की मुलाकात होती है, लेकिन कई ऐसे भी सहपाठी थे, जिनसे कभी मिलना नहीं हुआ. स्कूल से जुड़े रहने के कारण कवास के प्रिसिंपल हनुमानाराम चौधरी ने स्कूल क्रमोन्नत को 50 साल पूर्ण होने की बात कही. इस पर पहले बैच के सभी साथियों के स्नेह मिलन प्रोग्राम के आयोजन करने का विचार आया.
उन्होंने बताया कि उस समय के सभी स्टूडेंट्स से बात की, जिसमें पता चला कि 4 साथियों का निधन हो गया है. हालांकि, बाकी के सभी साथी पहुंचेंगे. इसके बाद शनिवार को यह आयोजन किया गया. स्कूल में आने के लिए ड्रेस कोड जरूरी है. इसके लिए धोती कुर्ता और साफा ड्रेस कोड में तय किया गया, जिसे पहनकर सभी सहपाठी आए. स्कूल में प्रार्थना से लेकर कक्षा में पढ़ाई करके स्टूडेंट् जीवन की यादें ताजा हो गईं. इसके साथ ही अपने पुराने सहपाठियों से मिलकर बेहद खुशी हुई.
यह सब 1975 में इसी स्कूल से 10वीं कक्षा पास करने वाले छात्रों के स्नेह मिलन कार्यक्रम के आयोजन के कारण हुआ. इस कार्यक्रम का आयोजन तमिलनाडु के पूर्व डीजीपी सांगाराम सुथार की पहल पर किया गया. 50 साल बाद पुराने सहपाठी एक-दूसरे से मिले. पुरानी यादें ताजा की और जीवन के अनुभवों को साझा किया. इस कार्यक्रम का जिले के राउमावि कवास के 50 साल पूरे होने पर गोल्डन जुबली के साथ-साथ 1975 में इस स्कूल से 10वीं की परीक्षा पास करने वाले विद्यार्थियों को भी 50 साल पूरे होने पर आयोजन किया गया.
इस स्कूल में 1975 में कक्षा 10वीं में कुल 28 स्टूडेंट्स थे, जिसमें से 22 स्टूडेंट्स उपस्थित हुए, जबकि 2 अनुपस्थित रहे. वहीं, इस कार्यक्रम में एक और दुखद पहलू भी था. 1975 के बैच के चार साथी अब इस दुनिया में नहीं रहे. उनके दोस्तों ने उन्हें याद किया और उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की. इस अवसर पर स्कूल के शिक्षकों और वर्तमान छात्रों ने भी भाग लिया.




















