झालावाड़: सांसद दुष्यंत सिंह ने काश्तकारों की अफीम का खरीद मूल्य बढ़ाने की लंबे समय से की जा रही मांग का समर्थन किया. नई दिल्ली में अफीम नीति 2025-26 के निर्धारण के संबंध में गुरुवार को हुई बैठक में दुष्यंत सिंह ने अफीम काश्तकारों की मांगों की पैरवी की. सांसद ने कहा कि अफीम की फसल में मौसम तथा जोखिम ज्यादा है. ऐसे में सरकार को फसल का खरीद मूल्य बढ़ाना चाहिए. बैठक की अध्यक्षता वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने की.
सांसद दुष्यंत सिंह ने कहा कि लंबे समय से सरकार ने अफीम का खरीद का मूल्य नहीं बढ़ाया है. किसानों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. फसल उत्पादन में लगातार लागत बढ़ रही. जोखिम को देखते हुए अफीम का मूल्य 15 हजार रुपए प्रति किग्रा निर्धारित किया जाए. वहीं, बिना चीरा के डोडा-पोस्त का मूल्य तीन हजार रुपए प्रति किग्रा निर्धारित करने का सुझाव दिया.
सांसद ने अफीम तुलाई की सीपीएस पद्धति के स्थान पर परंपरागत लुहाई-चिराई को लागू करने पर पुनर्विचार का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि सीपीएस पद्धति जारी रखने की स्थिति में औसत कम करने पर विचार किया जाए. उन्होंने मृत पट्टाधारकों के परिजनों एवं चोरी-लूट की वारदातों के कारण कम औसत देने वाले किसानों के पट्टे बहाल करने की मांग उठाई.
गौरतलब है कि प्रदेश में झालावाड़, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़ में अफीम की पैदावार बहुतायत से होती है. केंद्र सरकार की ओर से यहां फसल उत्पादन के लिए काश्तकारों को पट्टों को जारी किया जाता है, लेकिन मौसम की मार व फसल के जोखिम को लेकर अफीम काश्तकारों लंबे समय से फसल का खरीद मूल्य बढ़ाने की मांग कर रहे हैं.




















