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एआईएफ से रोजगार सृजन, नवाचार और उद्यमिता को मिल रही है नई दिशा:

वैकल्पिक निवेश परिदृश्य एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए अवसर” विषय पर संगोष्ठी का सफल आयोजन

भीलवाड़ा। (पंकज पोरवाल) दी इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) की भीलवाड़ा शाखा द्वारा आईसीएआई भवन, पटेल नगर पर सीपीई संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पश्चिमी भारत क्षेत्रीय परिषद के सदस्य सीए सौरभ अजमेरा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। भीलवाडा शाखा अध्यक्ष सीए आलोक सोमानी ने बताया कि शाखा द्वारा वक्ता अजमेरा का अपर्णा एवं पगड़ी पहना कर स्वागत किया गया और बताया कि वैकल्पिक निवेश परिदृश्य एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए अवसर विषय पर अत्यंत विस्तृत, अद्यतन और व्यावहारिक हेतु इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

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वक्ता सीए अजमेरा ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में पारंपरिक निवेश साधनों के साथ-साथ वैकल्पिक निवेश माध्यम भी वित्तीय दुनिया में बड़ी गति से उभर रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से प्राइवेट इक्विटी, वेंचर कैपिटल, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स, इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स, हेज फंड्स, स्टार्टअप्स में निवेश और विशेष रूप से वैकल्पिक निवेश निधियाँ यानी अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स शामिल हैं। उन्होंने बताया कि एआईएफ आज भारत के पूंजी बाजार में एक सशक्त माध्यम के रूप में उभर रहे हैं जो नवाचार, उद्यमिता और आर्थिक विकास को बढ़ावा दे रहे हैं।

सीए अजमेरा ने विस्तार से समझाया कि एआईएफ वे निवेश कोष होते हैं जो पारंपरिक म्यूचुअल फंड या सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध इक्विटी से भिन्न होते हैं और इन्हें तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इन फंड्स के माध्यम से पूंजी का प्रवाह नई कंपनियों, परियोजनाओं और उभरते क्षेत्रों की ओर होता है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलती है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स इन सभी क्षेत्रों में अपनी तकनीकी विशेषज्ञता और व्यावसायिक दृष्टिकोण के साथ निवेशकों, कॉर्पाेरेट्स तथा फंड मैनेजर्स को मार्गदर्शन और परामर्श देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

संगोष्ठी के दौरान सीए अजमेरा ने नियामकीय प्रावधानों, कानूनी आवश्यकताओं और इन निवेश साधनों में पारदर्शिता, कर नियोजन, लेखा परीक्षा, जोखिम प्रबंधन और गवर्नेंस की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एआईएफ भारत में न केवल पूंजी निवेश का नया मार्ग बन रहे हैं, बल्कि इससे रोजगार सृजन, नवाचार और उद्यमिता को भी नई दिशा मिल रही है। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स इन क्षेत्रों में लेखा, परामर्श, मूल्यांकन, ऑडिट और नियामकीय अनुपालन जैसी सेवाओं के माध्यम से व्यापक रूप से अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

संगोष्ठी का संचालन सिकासा अध्यक्ष सीए पुलकित राठी ने किया एवं बताया कि कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र में उपस्थित सदस्यों ने विषय में गहरी रुचि दिखाई और अनेक व्यावहारिक प्रश्नों के माध्यम से चर्चा को और भी समृद्ध किया। इस संगोष्ठी में सीए कैलाश अजमेरा, नवीन काकानी, आलोक पलोड़, पुनीत मेहता, पुलकित राठी, मुरली अटल, अवधेश शर्मा, अखिल काकानी, रजत गगरानी, शिव कचोलिया सहित लगभग 50 चार्टर्ड अकाउंटेंट्स उपस्थित रहे।

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