जोधपुर : पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने सीएम भजनलाल शर्मा पर हमला बोलते हुए कहा है कि जोधपुर में 15 अगस्त की घटना दुर्भागयपूर्ण थी, लेकिन जिस प्रकार का व्यवहार हुआ वह ठीक नहीं था. दुर्घटना के बाद सीएम जोधपुर में थे, अगर उनके सलाहकार अच्छे होते तो डेलिगेशन से मिल लेते तो बात बढ़ती नहीं. ये भी सुना कि वापस जाते समय रास्ता बदल कर गए, इसकी जरूरत नहीं पड़ती. ऐसे वक्त पर आप संवेदनशीलता दिखाते तो पब्लिक का आधा गुस्सा शांत हो जाता.
बुधवार को जोधपुर आए पूर्व सीएम एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि बाइक पर चार बच्चे थे, दो घायल हुए और एक की मौत हुई. इस कारण ‘मैं दो तीन दिन बाद आया, वरना कहते कि राजनीति करने आया हूं’. गहलोत ने कहा कि पुलिस को भी ध्यान रखना चाहिए था. चार बच्चे गाड़ी पर थे. पुलिस वाले पहले देख कर रोक लेते तो यह नौबत नहीं आती. परिवार से मिलते तो सीएम का सम्मान बढ़ता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. पता नहीं उस दिन कैसे सलाहकार साथ थे, जिसने गाइड किया कि गाड़ी दूसरी तरफ से ले जाओ.
गहलोत ने कहा कि उस परिवार पर क्या बीती होगी आप और हम समझ सकते हैं. मुख्यमंत्री चाहते तो घर वालों को बुलाकर बात कर लेते तो उनका सम्मान बढ़ता, लेकिन ये जोधपुर वाले भूलेंगे नहीं. उन्होंने 15 अगस्त जोधपुर में मनाया था, वो बच्चे उसी कार्यक्रम में जा रहे थे. इस बात को लेकर सीएम को अहसास होना चाहिए था कि वो उनके प्रोग्राम में आ रहे हैं तो उनके प्रति विशेष दुख प्रकट करने की बात थी. बता दें कि 15 अगस्त को रेजिडेंसी रोड पर सुबह एक बाइक पर चार स्कूली छात्र जा रहे थे. ट्रक की टक्कर से एक की मौत हो गई. लोगों ने सीएम के रास्ते पर जाम लगा दिया, लेकिन पुलिस सीएम को दूसरे रास्ते से एयरपोर्ट लेकर चली गई थी.
15 अगस्त पर नारेबाजी पहली बार : पूर्व सीएम ने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ कि 15 अगस्त को नारेबाजी हुई. इस दिन तो तिंरगे की बात होती है. कार्यक्रम में बच्चों के बेहोश होने की बात पर गहलोत ने कहा कि यह प्रशासन की घोर लापरवाही का नमूना है. बच्चों को देखने कोई अधिकारी तक नहीं गया. इसमें कोई कार्रवाई भी नहीं हुई होगी. हर गलती कीमत मांगती है यह यहां भी लागू होता है. एयरपोर्ट से पूर्व सीएम सीधे मृतक लोकेंद्र के घर गए और परिजनों को ढांढस बंधाया.




















