जयपुर: कथित वोट चोरी मामले में कांग्रेस और केंद्रीय चुनाव आयोग आमने-सामने हैं. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए सबूतों के साथ वोट चोरी का आरोप लगाया था. इसके जवाब में रविवार को चुनाव आयोग ने पलटवार करते हुए राहुल गांधी के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि या तो वह शपथ पत्र दें या फिर गुमराह करने के लिए देश से माफी मांगें.
गहलोत का हमला, दोहरे मापदंड का आरोप: राहुल गांधी पर आयोग की सख्ती के बाद कांग्रेस ने इसे पक्षपात करार दिया. कई नेताओं ने सवाल उठाया कि भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा लगाए गए आरोपों पर आयोग ने शपथ पत्र क्यों नहीं मांगा. इसी क्रम में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी चुनाव आयोग से जवाब मांगा है.
गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि राहुल गांधी संवैधानिक पद पर हैं और उन्होंने पूरी जिम्मेदारी से सबूतों के साथ वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया. आयोग ने गलती मानने की बजाय उनसे शपथ पत्र मांगा, जबकि भाजपा नेता अनुराग ठाकुर ने भी कुछ सीटों पर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप लगाए पर चुनाव आयोग ने उनसे कोई शपथ पत्र नहीं मांगा.
अखिलेश यादव का समर्थन: गहलोत ने आगे कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 18,000 शिकायतें शपथ पत्र के साथ आयोग को दी थीं, जिनकी रिसीविंग भी सार्वजनिक की गई है. लेकिन आयोग ने इन शिकायतों पर कोई जवाब नहीं दिया और अब दावा कर रहा है कि उसे कोई शिकायत मिली ही नहीं.
कांग्रेस का आरोप: गहलोत ने कहा कि चुनाव आयोग का यह रवैया विपक्षी दलों के खिलाफ है और इससे भाजपा के साथ उसकी सांठ-गांठ साफ नजर आ रही है. कांग्रेस का कहना है कि आयोग को निष्पक्ष रहना चाहिए लेकिन उसके फैसले पक्षपात की ओर इशारा कर रहे हैं.




















