राजस्थान में सिंथेटिक ड्रग्स एमडी (मेफेड्रोन) का जहर किस तेजी से फैल रहा है, इसका जीता-जागता उदाहरण श्रीगंगानगर से सामने आया है। यहां शिक्षकों की आड़ में दो लोग नशे के कारोबार का ऐसा नेटवर्क चला रहे थे, जिसे देखकर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की टीम भी हैरान रह गई। दोनों आरोपी स्कूलों में विज्ञान पढ़ाते थे—एक सरकारी स्कूल में और दूसरा निजी स्कूल में। लेकिन क्लासरूम से बाहर ये ‘केमिस्ट’ एमडी जैसी खतरनाक ड्रग्स तैयार कर रहे थे।
एनसीबी जोधपुर जोन के क्षेत्रीय निदेशक घनश्याम सोनी ने बताया कि श्रीगंगानगर के पॉश इलाके रिद्धि सिद्धि एनक्लेव के ड्रीम होम्स अपार्टमेंट में चल रही इस गुप्त लैब का भंडाफोड़ किया गया। एनसीबी की टीम ने फ्लैट पर छापा मारकर 780 ग्राम मेफेड्रोन (MD) जब्त किया, जिसकी बाजार में कीमत लाखों में है। साथ ही भारी मात्रा में केमिकल्स और लेबोरेटरी उपकरण भी बरामद हुए, जिनसे साफ जाहिर होता है कि यह कोई छोटी-मोटी ड्रग पैकिंग यूनिट नहीं, बल्कि एक फुल-फ्लेज्ड केमिकल फैक्ट्री थी।
दिल्ली से लाए थे ड्रग्स बनाने का सामान
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी टीचर्स ने करीब दो महीने पहले फ्लैट किराये पर लिया और एक परफेक्ट ड्रग लैब तैयार की। उन्होंने एसिटोन, बेंजीन, ब्रोमीन, मिथाइलअमीन, आइसोप्रोपाइल अल्कोहल, 4-मेथाइल प्रोपियोफेनोन, एन-मेथाइल-2-पाइरोलिडोन जैसे खतरनाक केमिकल्स दिल्ली से मंगवाए। इनमें से कई रसायन आमतौर पर उद्योगों में ही मिलते हैं और इनका उपयोग आम नागरिकों के लिए प्रतिबंधित है।
मासूम बच्चों के ‘गुरु’ निकले नशे के सौदागर
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिन लोगों को समाज में ज्ञान का प्रकाश फैलाने की जिम्मेदारी दी गई थी, वे खुद नशे का अंधकार फैला रहे थे। एक आरोपी निजी स्कूल में केमिस्ट्री का शिक्षक है, जबकि दूसरा एक सरकारी स्कूल में साइंस पढ़ाता है। दोनों श्रीगंगानगर के निवासी हैं और ड्रग्स की दुनिया में ‘साइंटिफिक परफेक्शन’ के साथ उतरे थे।
एनसीबी अधिकारियों का कहना है कि इस ड्रग लैब को इतने प्रोफेशनल ढंग से ऑपरेट किया जा रहा था कि अगर समय रहते भंडाफोड़ नहीं होता, तो ये दोनों कई किलो एमडी तैयार कर बाजार में सप्लाई कर सकते थे।
राजस्थान में MD का जहर फैलता जा रहा है
राजस्थान में एमडी ड्रग्स का चलन पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है। खासकर जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर और अब श्रीगंगानगर जैसे शहरों में एमडी का कारोबार तेजी से फैल रहा है। यह एक सिंथेटिक स्टिमुलेंट ड्रग है, जो कुछ समय के लिए शरीर में तेज उत्तेजना लाता है लेकिन धीरे-धीरे मानसिक और शारीरिक रूप से बर्बाद कर देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, एमडी ड्रग्स का लती बना शख्स किसी भी हद तक जा सकता है। चोरी, लूट, हिंसा—कुछ भी। इसलिए इसका प्रचलन समाज और कानून-व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।
पुलिस की कार्रवाई या सिर्फ दिखावा?
हालांकि एनसीबी ने इस केस में अच्छी कार्रवाई की है, लेकिन स्थानीय स्तर पर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोग मानते हैं कि एमडी ड्रग्स का रैकेट श्रीगंगानगर में पहली बार नहीं फूटा, लेकिन हर बार छोटे मछलियों को पकड़कर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है। जबकि असली मास्टरमाइंड तक कोई नहीं पहुंचता।
एनसीबी को शक है कि दोनों आरोपी शिक्षकों के पीछे भी कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है, जिसकी जांच की जा रही है।
राजस्थान में ड्रग्स अब सिर्फ गली-कूचों तक सीमित नहीं रहे। अब स्कूलों के भीतर से, किताबों और लैब्स के पीछे से भी नशे की तस्करी शुरू हो चुकी है। पुलिस और एजेंसियों को अब पारंपरिक नजरिया छोड़कर ‘स्मार्ट क्राइम’ के इस नेटवर्क से मुकाबला करना होगा, वरना आने वाला भविष्य और भी ज्यादा जहरीला हो सकता है।




















