जोधपुर सेंट्रल जेल में रेप के मामले में बंद एक कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। जेल प्रशासन इसे साइलेंट अटैक (हार्ट अटैक) बता रहा है, लेकिन मृतक के परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। उनका आरोप है कि कैदी के सिर पर चोट के निशान हैं और उसकी मौत स्वाभाविक नहीं, बल्कि जेल में मारपीट के कारण हुई है। इसको लेकर गुरुवार सुबह मृतक के परिजन और समाज के लोग शव के साथ पाली कलेक्ट्रेट कूच कर गए। फिलहाल गुड़ा एंदला थाना पुलिस उन्हें गुंदोज में समझाइश देने में जुटी हुई है।
मृतक की पहचान पाली जिले के गुड़ा एंदला निवासी रूपाराम पुत्र भंवरलाल (35) के रूप में हुई है। रूपाराम करीब ढाई साल से जोधपुर सेंट्रल जेल में रेप के आरोप में बंद था। बुधवार को जेल प्रशासन ने परिजनों को सूचना दी कि उसकी मौत हो गई है। पोस्टमार्टम के बाद शाम को शव परिजनों को सौंप दिया गया, लेकिन गुरुवार सुबह मामला तब तूल पकड़ गया जब मृतक की पत्नी ने शव को लेकर विरोध जताया और जांच की मांग की। इसके बाद परिजन और समाज के लोग शव लेकर गुंदोज होते हुए पाली कलेक्ट्रेट के लिए रवाना हो गए।
सिर पर चोट के निशान से परिजन नाराज़
परिजनों का कहना है कि रूपाराम के शव पर विशेषकर सिर पर चोट के स्पष्ट निशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जेल में उसकी हत्या की गई है और हार्ट अटैक की कहानी गढ़ी जा रही है ताकि मामला दबाया जा सके। मृतक की पत्नी और अन्य रिश्तेदारों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए।
पुलिस कर रही समझाइश
गुंदोज पहुंचने पर गुड़ा एंदला थाना पुलिस शव के साथ पहुंचे परिजनों और समाज के लोगों को समझाने में लगी है। पुलिस का प्रयास है कि वे कलेक्ट्रेट ना जाएं और शांतिपूर्वक ढंग से कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी मांग रखें, लेकिन परिजन जांच और मुआवजे की मांग पर अड़े हुए हैं।
मृतक के तीन छोटे बच्चे
परिजनों ने बताया कि रूपाराम तीन बच्चों का पिता था और करीब सवा दो साल से जेल में बंद था। उसके जेल जाने के बाद से परिवार बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजर-बसर कर रहा है। पत्नी और बच्चों की आर्थिक स्थिति भी काफी खराब है। ऐसे में वे न सिर्फ न्याय चाहते हैं बल्कि सरकार से मुआवजे और आर्थिक सहायता की भी मांग कर रहे हैं।
सवालों के घेरे में जेल प्रशासन
रूपाराम की मौत के बाद एक बार फिर जेल सुरक्षा व्यवस्था और बंदियों की देखरेख पर सवाल उठने लगे हैं। यह पहला मामला नहीं है जब किसी बंदी की जेल में संदिग्ध हालत में मौत हुई हो। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों ने प्रशासन की भूमिका को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है।
जांच की उठी मांग
समाज के लोगों और मृतक के परिजनों ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश नहीं दिए जाते, वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे और प्रदर्शन जारी रखेंगे। प्रशासन और पुलिस अब मामले को संभालने में जुट गई है।
फिलहाल, पुलिस की समझाइश और परिजनों की नाराज़गी के बीच यह मामला गर्माया हुआ है और जिलेभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।




















