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युवा उद्यमी ने आपदा को अवसर में बदला, 50 हजार शुरू हुआ व्यापार 11 करोड़ तक पहुंचा

जयपुर: राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस भारत में हर साल 30 अगस्त को मनाया जाता है. यह दिन देश की अर्थव्यवस्था के विकास और रोजगार सृजन में लघु उद्योगों के महत्वपूर्ण योगदान को पहचानने और सम्मानित करने के लिए समर्पित है. इस दिन को मनाने का उद्देश्य लघु उद्योगों को बढ़ावा देना और उनका समर्थन करना, देश में रोजगार के अवसरों का विस्तार करना और लघु उद्योगों के विकास के साथ उनके आर्थिक योगदान को प्रोत्साहित करना.

इस खास दिवस में पर हम आप को मिलाते हैं जयपुर की युवा उद्यमी सौम्या काबरा से, जिन्होंने कोरोना काल की आपदा को अवसर में तब्दील किया और एक ऐसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की शुरुआत की, जहां ग्राहक हर तरह के ओकेजन के हिसाब से गिफ्ट आइटम्स सिलेक्ट और डिजाइन कर सकता है. सौम्या ने 2020 में 50 हजार से व्यापार शुरू किया जो अब 11 करोड़ सालाना टर्नओवर को पार कर गया.

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आपदा अवसर बन कर आई : सौम्या काबरा ने जयपुर में साल 2017 में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद लंदन यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर में मास्टर्स की पढ़ाई की और फिर फाइन आर्ट का कोर्स किया. इसके बाद 2019 में इंडिया लौट आईं. सौम्या बताती हैं कि यह तो तय था कि मुझे बिजनेस सेक्टर में ही करियर बनाना है, लेकिन क्या करना है यह तय नहीं था. पापा का मैन्युफैक्चरिंग का बिजनेस सेट था. फैमली का दबाव था कि घर के बिजनेस को संभाला जाए. तीन महीने पापा के बिजनेस को संभाला, लेकिन उस समय मन में एक कसक बनी रहती थी कि ये सब तो सेट है. यहां कुछ ज्यादा करने का मौका नहीं है.

इसके साथ जो सबसे बड़ी बात कि मन में शुरू से अपना कुछ अलग करने की जो इच्छा थी, वो हमेशा परेशान करती रहती थी. एक दिन घर वालों से बात कर मन की क्या इच्छा है, उसके बारे में बताया. हालांकि, घरवालों को लगता था कि जब सब कुछ सेट बिजनेस मिल रहा है तो परेशान क्यों होना?. थोड़ी कोशिश की तो घर वाले मान गए. सौम्या बताती हैं कि बचपन से उसे गिफ्ट करने और गिफ्ट देने के बाद सामने वाले के एक्सप्रेशन देखना बड़ा अच्छा लगता था. उसने उसी खुशी को बिजनेस में बदलने की सोची. फरवरी 2020 में कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट को लॉन्च किया, लेकिन उसी समय मार्च 2020 में कोरोना का संकट आ गया. लोग घरों तक सीमित रह गए, लेकिन उसके लिए ये आपदा अवसर बन कर आई. ये वो वक्त था, जब दुनिया ऑनलाइन की तरफ तेजी से बढ़ रही थी. उसका प्रोडक्ट भी ऑनलाइन वेबसाइट पर ही शुरू किया था. ऐसे में बिजनेस को पहले ही साल अच्छा रिस्पांस मिला.

आपदा अवसर बन कर आई : सौम्या काबरा ने जयपुर में साल 2017 में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद लंदन यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर में मास्टर्स की पढ़ाई की और फिर फाइन आर्ट का कोर्स किया. इसके बाद 2019 में इंडिया लौट आईं. सौम्या बताती हैं कि यह तो तय था कि मुझे बिजनेस सेक्टर में ही करियर बनाना है, लेकिन क्या करना है यह तय नहीं था. पापा का मैन्युफैक्चरिंग का बिजनेस सेट था. फैमली का दबाव था कि घर के बिजनेस को संभाला जाए. तीन महीने पापा के बिजनेस को संभाला, लेकिन उस समय मन में एक कसक बनी रहती थी कि ये सब तो सेट है. यहां कुछ ज्यादा करने का मौका नहीं है.

इसके साथ जो सबसे बड़ी बात कि मन में शुरू से अपना कुछ अलग करने की जो इच्छा थी, वो हमेशा परेशान करती रहती थी. एक दिन घर वालों से बात कर मन की क्या इच्छा है, उसके बारे में बताया. हालांकि, घरवालों को लगता था कि जब सब कुछ सेट बिजनेस मिल रहा है तो परेशान क्यों होना?. थोड़ी कोशिश की तो घर वाले मान गए. सौम्या बताती हैं कि बचपन से उसे गिफ्ट करने और गिफ्ट देने के बाद सामने वाले के एक्सप्रेशन देखना बड़ा अच्छा लगता था. उसने उसी खुशी को बिजनेस में बदलने की सोची. फरवरी 2020 में कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट को लॉन्च किया, लेकिन उसी समय मार्च 2020 में कोरोना का संकट आ गया. लोग घरों तक सीमित रह गए, लेकिन उसके लिए ये आपदा अवसर बन कर आई. ये वो वक्त था, जब दुनिया ऑनलाइन की तरफ तेजी से बढ़ रही थी. उसका प्रोडक्ट भी ऑनलाइन वेबसाइट पर ही शुरू किया था. ऐसे में बिजनेस को पहले ही साल अच्छा रिस्पांस मिला.

50 हजार से 11 करोड़ तक : सौम्या काबरा ने बताया कि कोरोना के समय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की शुरुआत उनके बिजनेस के लिए माइलस्टोन था. लॉकडाउन के चलते जो लोग बाहर दुकानों पर नहीं जा पा रहे थे. उन्होंने ऑनलाइन गिफ्ट आइटम्स की तलाश करनी शुरू की. ज्यादातर लोग अपने घर पर थे, तो उनके पास कुछ क्रिएटिव सोचने और डिजाइन करने का भी भरपूर वक्त था. ऐसे में लोगों को हमारा प्लेटफॉर्म काफी ज्यादा पसंद आया. बिना किसी खास प्रमोशन के एक दूसरे से होते हुए हमारे प्रोडक्ट की पहुंच देशभर में हो गई. यहां तक कि विदेशों से भी लोग हमारे प्रोडक्ट की डिमांड करने लगे. सौम्या कहती हैं कि 50 की पूंजी के साथ शुरू किया बिजनेस पहले ही साल में एक करोड़ के टर्नओवर को पार कर गया था. अब ये कम्पनी पांच साल बाद 11 करोड़ के सलाना टर्नओवर को पार कर गई.

गिफ्ट भावनात्क जुड़ाव है : सौम्या कहती हैं कि हम जब भी किसी को गिफ्ट करते हैं तो वो गिफ्ट मात्र नहीं है. वो भावनात्मक जुड़ाव है. हर कोई इसी उलझन में रहता है कि किस को क्या गिफ्ट करें? उसी को ध्यान में रख कर इस बिजनेस की शुरुआत की गई. सबसे पहले मैंने खुद कुछ गिफ्ट बॉक्स और मॉडल डिजाइन किए. मार्केट में मौजूद प्रोडक्ट्स के मुकाबले उन्हें बेहतर और क्रिएटिव लुक दिया. इसके बाद एक वेबसाइट तैयार की और अपने प्रोडक्ट की फोटो उस पर अपलोड कर दी. मेरे प्रोडक्ट यूनीक और बेहतर थे. शुरुआत में बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला. सौम्या कहती हैं कि आप हर तरह के ओकेजन के हिसाब से गिफ्ट आइटम्स सिलेक्ट और डिजाइन कर सकते हैं और अपने दोस्तों या रिश्तेदारों को भेज सकते हैं. 2 साल के भीतर उन्होंने पूरे भारत को कवर कर लिया था. उसके बाद अब अमेरिका, इंग्लैंड, दुबई सहित कई दूसरे देशों से भी उनके पास ऑर्डर्स आ रहे हैं. पिछले साल उनकी कंपनी का टर्नओवर 11 करोड़ रुपये रहा है.

40 लोगों को मिल रहा रोजगार : सौम्या बताती हैं कि शुरुआती तीन महीने तो उसने स्वयं मार्किट से खरीदारी करती, घर आकर आकर्षक गिफ्ट पैकिंग करती और स्वयं उसे पोस्ट करती. तीन महीने बाद अच्छा रेस्पॉन्स मिला तो पहली हायरिंग की. उसके बाद दो और लोगों को ज्वाइन करवाया. धीरे-धीरे दायरा बढ़ाना शुरू किया. जयपुर में खुद का एक ऑफिस लॉन्च किया. टीम में सदस्यों की संख्या बढ़ाई, अब 40 से ज्यादा महिला-पुरुष अलग-अलग जिम्मेदारी के साथ कंपनी में काम कर रहे हैं.

सौम्या बताती हैं कि अपने प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग कैटेगरी की लिस्ट भी जोड़ती गईं. लोगों के रिस्पॉन्स के मुताबिक जो कुछ हमारी लर्निंग रही उसके हिसाब से हम प्रोडक्ट और वैरायटी अपनी लिस्ट में शामिल करते गए. इसका फायदा यह हुआ कि इंडिविजुअल कस्टमर के साथ ही अमेजन, मिंत्रा, उबर, सहित अन्य बड़े कॉर्पोरेट हाउसेज भी हमारे ग्राहक हो गए. सौम्या बताती हैं कि उनके पास हर तरह के इवेंट और ओकेजन के हिसाब से प्रोडक्ट की लिस्ट है. 200 से ज्यादा वैरायटी के प्रोडक्ट उनके पास उपलब्ध हैं. अभी औसतन हर महीने 5 हजार से ज्यादा ऑर्डर उन्हें देशभर से मिल रहे हैं. कुछ ऑर्डर्स भारत के बाहर से भी आते हैं.

सरकार को प्रोत्साहित करना चाहिए : सौम्या कहती हैं कि राजस्थान के आर्थिक और औद्योगिक परिदृश्य में लघु उद्योग बहुत महत्वपूर्ण हैं, जो राज्य की GDP में 28% से अधिक का योगदान करते हैं और औद्योगिक क्षेत्र में 80% से अधिक रोजगार पैदा करते हैं. राजसिको (राजस्थान लघु उद्योग निगम लिमिटेड) और मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना जैसी पहलों के माध्यम से इन उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन कोरोना महामारी से हुए नुकसान के बाद, व्यवहारिक नीतियों और अधिक समर्थन की आवश्यकता है. सरकार को योजनाओं का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने की आवश्यकता है. इन्वेस्टर ज्यादा से ज्यादा कैसे आएं, इसको लेकर भी कार्य की जाने की आवश्यकता है. सौम्या ने कहा कि राजस्थान में आइडिया और हुनर की कोई कमी नहीं है. बस जरूरत है कि उसको कुछ सहयोग सरकार का मिल जाए. सौम्या ने कहा कि किसी भी कार्य को करने की अगर धर्म इच्छा शक्ति हो तो उसमें सफलता निश्चित रूप से मिलती है. मुश्किलें आपको परेशान कर सकती हैं, लेकिन पराजित नहीं. मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ काम करने वालों को कामयाबी जरूर मिलती है.

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