अलवर: जिले में दो दिन से थमे बारिश के दौर ने लाल प्याज की बुवाई का लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद जगाई है. बारिश थमने के बाद किसान खेतों में प्याज की कंठी की रोपाई में जुट गए. इस बार अच्छी बारिश के चलते खेतों में पानी भर गया और लाल प्याज की बुवाई बाधित हुई. जलभराव व अधिक बारिश के चलते जिले में करीब 10 प्रतिशत से ज्यादा लाल प्याज की फसल खराब होने का अंदेशा है.जिले में लाल प्याज के बीज की रोपाई के लिए 15 अगस्त से 15 सितंबर श्रेष्ठ समय होता है.
उद्यान विभाग के सहायक निदेशक केएल मीणा ने बताया कि जिले में लाल प्याज खरीफ की मुख्य फसलों में शामिल है. बड़ी संख्या में यहां किसान लाल प्याज उगाते हैं. राज्य सरकार से जिले को वर्ष 2025 में 16 हजार हेक्टेयर में प्याज बुवाई का लक्ष्य मिला. सितंबर के पहले पखवाड़े तक 13 हजार हेक्टेयर में प्याज की बुवाई हो चुकी. बीते करीब 20 दिन से बारिश के चलते बुवाई बाधित हुई.अब दो दो दिन से मौसम साफ हुआ तो किसानों ने लाल प्याज की बुवाई तेज कर दी, जल्द जिले को प्याज बुवाई का लक्ष्य पूरा होने की संभावना है.
जलभराव से फसल खराब: सहायक निदेशक मीणा ने बताया कि अगस्त में जिले में ज्यादातर स्थानों पर अच्छी बारिश हुई. कई जगह खेतों में जलभराव हो गया. उमरैण, सावडी, अकबरपुर, अलापुर सहित अन्य कई क्षेत्रों का विभागीय टीम ने निरीक्षण कर जलभराव का जायजा लिया. जलभराव के चलते जिले में 10 से 15 प्रतिशत प्याज की फसल को नुकसान का अंदेशा है, हालांकि अभी सर्वे करा रहे हैं. पूरी रिपोर्ट प्याज की बुवाई पूरी होने के बाद ही मिल सकेगी.
अंतिम चरण में बुवाई: सहायक निदेशक मीणा ने बताया कि कुछ किसान लाल प्याज की अगेती बुवाई की है. इससे प्याज की फसल जल्दी तैयार होकर बाजार में आती है. देश में केवल अलवर जिले के अलवर, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़ जिले में लाल प्याज की फसल कंठी की बुवाई से की जाती है.
तीखे स्वाद के कारण मांग: मीणा ने बताया कि जिले का लाल प्याज स्वाद में तीखा होता है. इसके चलते देशभर में इसकी डिमांड रहती है. हालांकि जिले में तैयार होने वाली लाल प्याज की भंडारण क्षमता कम होने से इसका लंबे समय तक स्टॉक नहीं किया जा सकता क्योंकि इस प्याज में नमी ज्यादा होती है और जल्दी खराब हो जाता है.
अलवर तीन जिलों में बंटा, रकबा नहीं घटा: राज्य सरकार ने कुछ समय पहले अलवर को तीन जिलों में बांट दिया, तब संयुक्त अलवर जिले को एक साथ लाल प्याज की बुवाई का लक्ष्य मिलता था, लेकिन अब तीन जिले बनने के बाद अलवर जिले को अलग से लक्ष्य दिया है. इस साल अलवर जिले को 16 हजार हैक्टेयर भूमि में लाल प्याज की बुवाई का लक्ष्य मिला. खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ जिले को अलग से लाल प्याज की बुवाई का लक्ष्य मिला.
फैक्ट फाइल
| साल | रकबा (हेक्टेयर) |
| 2019 | 16,500 |
| 2020 | 18,500 |
| 2021 | 20,500 |
| 2022 | 23,000 |
| 2023 | 19,600 |
| 2024 | 24,500 |
| 2025 | अलवर जिला 16,000 |




















