सीकर : खाटूश्यामजी मंदिर में आरती का महत्व बेहद खास माना जाता है. दिनभर में कुल पांच बार आरती होती है, जिनमें से श्रृंगार आरती और संध्या आरती सबसे प्रमुख मानी जाती हैं. हर दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु इन दोनों आरतियों के समय बाबा श्याम के दिव्य दर्शन के लिए मंदिर पहुंचते हैं. अब मंदिर प्रशासन ने इन दोनों मुख्य आरतियों के समय में बदलाव किया है.
दो आरती में मुख्य बदलाव : श्री श्याम मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि, भाद्रपद शुक्ल पक्ष से आश्विन कृष्ण पक्ष की अवधि को ध्यान में रखते हुए समय परिवर्तन किया गया है. नए बदलाव के अनुसार अब बाबा श्याम की श्रृंगार आरती सुबह 7:30 बजे होगी, इससे पहले यह आरती सुबह 7.00 बजे होती थी. इस आरती के दौरान बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार किया जाता है, जिसमें वे हर दिन अलग और अलौकिक रूप में सजाए जाते हैं. इसी कारण यह आरती श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है. इसी प्रकार संध्या आरती का समय भी बदला गया है. अब बाबा श्याम की संध्या आरती शाम 7:00 बजे होगी, इससे पहले यह आरती शाम 7.30 मिनट पर होती थी. इस आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर भक्ति भाव से दर्शन और पूजा करते हैं. माना जाता है कि इस समय बाबा श्याम की आराधना करने से आत्मिक शांति और आशीर्वाद प्राप्त होता है.
सभी आरती का समय ये : सर्दी के समय मंदिर की अन्य आरतियों का समय भी तय किया गया है. पहली मंगला आरती सुबह 4:30 बजे होगी, उसके बाद दूसरी श्रृंगार आरती 7:30 बजे, तीसरी भोग आरती दोपहर 12:30 बजे, चौथी संध्या आरती शाम 7:00 बजे और पांचवीं तथा अंतिम शयन आरती रात 10:00 बजे होगी. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि आरती के समय बाबा श्याम के दर्शन करना शुभ माना जाता है. इस बदलाव के बाद भक्तों को अपनी यात्रा और दर्शन की योजना नए समय के अनुसार करनी होगी. मंदिर कमेटी का कहना है कि यह परिवर्तन भक्तों की सुविधा और धार्मिक परंपरा को ध्यान में रखकर किया गया है.
मंदिर बंद के बाद भी यहां करें दर्शन : चंद्रग्रहण के कारण मंदिर प्रशासन ने परंपरा अनुसार मंदिर बंद रखा. ऐसे में लाखों भक्त बाबा श्याम के प्रत्यक्ष दर्शन से वंचित रह गए. लेकिन बाबा श्याम के दरबार की भव्यता का अनुभव भक्त घर बैठे भी कर सकते हैं. श्री श्याम मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान के अनुसार, चंद्रग्रहण लगने से बीती रात 12 बजे बाबा का तिलक श्रृंगार उतार दिया गया. इसके बाद आज बाबा को उनके मूल शालिग्राम रूप में सजाया गया. मंदिर बंद रहने के बावजूद बाबा का भव्य श्रृंगार हुआ है. आज गेंदा फूलों से सजे दरबार में भक्तों द्वारा भेंट की गई विशेष पोशाक बाबा को धारण करवाई गई. नवरत्न चरित्र से बना नया सोने का मुकुट और सोने का हार भी उन्हें पहनाया गया। भोग आरती के समय बाबा को मिश्री और मावे का भोग लगाया गया है.
श्रद्धालुओं के लिए विशेष बात यह रही कि आज बाबा श्याम की श्रृंगार आरती के समय में बदलाव किया गया. सामान्य दिनों में जहां आरती सुबह 7. 00 बजे होती है, वहीं आज इसे सुबह 7.30 बजे ही संपन्न की गया. भक्त ऑनलाइन माध्यम से इस आरती के दर्शन कर सकते हैं. सबसे खास अवसर यह है कि आज बाबा श्याम एक ही दिन में अपने दोनों स्वरूपों में नजर आएंगे. साल में केवल एक बार चंद्रग्रहण के बाद ऐसा होता है, जब बाबा श्याम पहले शालिग्राम रूप में विराजमान होते हैं और अगले दिन फिर से तिलक श्रृंगार धारण करते हैं. इस परंपरा के अनुसार, गर्भगृह को पवित्र जल से धोया जाएगा और बाबा को चंदन से तिलक श्रृंगार किया जाएगा। इसके बाद वे अपने श्याम वर्ण रूप में भक्तों को दर्शन देंगे.
मान्यता है कि बाबा श्याम सामान्यतः महीने में 23 दिन श्याम वर्ण और शेष 7 दिन मूल शालिग्राम रूप में दर्शन देते हैं. यही कारण है कि चंद्रग्रहण के बाद का यह दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है. बाबा श्याम की इस अनोखी परंपरा और बदलते स्वरूप के दर्शन बहुत शुभ माने जाते हैं.




















