कुचामनसिटी: लिवर शरीर का पावरहाउस माना जाता है. यह बिना किसी शोर-शराबे के शरीर को संतुलन प्रदान करता है, लेकिन आधुनिक जीवनशैली, नशे की लत और असंतुलित आहार का लिवर पर सीधा असर पड़ रहा है. युवाओं में हेपेटाइटिस, फैटी लिवर, सिरोसिस और लिवर फेल्योर जैसे रोग तेजी से बढ़ रहे हैं. चिकित्सकों के अनुसार समय रहते सतर्कता जरूरी है.
परबतसर के चिकित्सक डॉ. ईश्वर चौहान ने बताया कि आजकल मोटापा, डायबिटीज, जंक फूड और हाई फैट डाइट के कारण भी फैटी लिवर की बीमारी हो रही है. ऐसे में जरूरी है कि लोग शराब, तंबाकू और अन्य नशों से दूर रहें. स्वस्थ लिवर के लिए संतुलित आहार लें, जिसमें ताजे फल, हरी सब्जियां, प्रोटीन और फाइबर शामिल हों. रोजाना व्यायाम करें, हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण करवाएं और बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं न लें. स्वच्छ, उबला हुआ पानी पिएं और समय-समय पर लिवर फंक्शन टेस्ट करवाएं.
हेपेटाइटिस के प्रकार, लक्षण और कारण: हेपेटाइटिस ए दूषित भोजन से, बी और सी संक्रमित रक्त व असुरक्षित यौन संबंधों से, डी संक्रमित खून से और ई दूषित पानी से फैलता है. थकान, भूख की कमी, उल्टी, आंखों व त्वचा का पीला पड़ना, पेट में सूजन और गहरे रंग का मूत्र. गंभीर लक्षणों में गर्दन पर काले निशान, पेट पर चर्बी जमा होना, मस्सों का बढ़ना आदि शामिल हैं.
डॉ. चौहान ने बताया कि लिवर रोगियों को शराब, मीठा, डिब्बाबंद पेय व देसी दवाएं नहीं लेनी चाहिए. इलाज केवल डॉक्टर की सलाह से करें. मरीजों को निरंतर एरोबिक एक्सरसाइज करनी चाहिए और संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए. हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण चिकित्सक की सलाह के अनुसार करवाना चाहिए, जिससे लिवर की बीमारी को रोका जा सकता है. मरीजों को खुद को डॉक्टर नहीं समझना चाहिए. गूगल से दवा खोजकर खाना जानलेवा साबित हो सकता है. सही सलाह और जांच के लिए विशेषज्ञ से ही संपर्क करें.




















