जयपुर : जलझूलनी एकादशी पर बुधवार को छोटी काशी के कृष्ण मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और झांकियों का आयोजन होगा. गोविंद देव जी मंदिर में ठाकुर जी नटवर वेश धारण करेंगे. वहीं, गोपीनाथ जी सहित अन्य मंदिरों में ठाकुर जी का शृंगार कर डोल यात्रा निकाली जाएगी. इस सबके इतर गुप्त वृंदावन धाम में 100 करोड़ नाम-जप यज्ञ की शुरुआत होगी.
जगतपुरा स्थित गुप्त वृंदावन धाम में जलझूलनी एकादशी के पावन अवसर पर बुधवार को 100 करोड़ हरिनाम जप यज्ञ का शुभारंभ किया जाएगा. इस भव्य संकल्प का लक्ष्य गुप्त वृंदावन धाम के सांस्कृतिक केंद्र के उद्घाटन (12 मई 2027) तक पूरा करना है. खास बात ये है कि वर्ष 2027 में ही जयपुर अपनी 300वीं वर्षगांठ मना रहा है. ऐसे में ये महायज्ञ शहर की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को और अधिक उज्ज्वल बनाने वाला है. धाम के प्रवक्ता सिद्ध स्वरूप दास ने बताया कि ये यज्ञ केवल संख्यात्मक लक्ष्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य अधिक से अधिक भक्तों और समाज को हरिनाम जप की महिमा से जोड़ना है. आने वाली पीढ़ियों तक नाम-जप के महत्व का संदेश पहुंचाना ही इस संकल्प की असली साधना है.
जलझूलनी एकादशी पर शहरभर में धार्मिक उत्साह : भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली जलझूलनी एकादशी पर बुधवार को जयपुर के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में विशेष आयोजन होंगे. गोविंद देव जी मंदिर में ठाकुर जी का नटवर वेश शृंगार किया जाएगा. शालिग्राम जी को खाट पर विराजमान कर तुलसी मंच पर ले जाया जाएगा, जहां पंचामृत अभिषेक और आरती के बाद परिक्रमा कर उन्हें दोबारा निज मंदिर में लाया जाएगा. इसी तरह गोपीनाथ जी मंदिर (पुरानी बस्ती) में भी विशेष झांकी सजाई जाएगी. मंदिर महंत सिद्धार्थ गोस्वामी ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी भी कहा जाता है. श्रद्धालुओं की मानें तो इस दिन व्रत और पूजन करने से वाजपेय यज्ञ के समान फल मिलता है.
डोल ग्यारस और जलवा पूजन की परंपरा : मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण के जन्म के 18वें दिन माता यशोदा ने नन्हे कान्हा को डोल में बैठाकर घाट पर ले जाकर जलवा पूजन किया था. तभी से ये परंपरा चली आ रही है. बुधवार को छोटी काशी में भी ठाकुर जी की पालकी फूलों से सजाकर परकोटे में तालकटोरा और आसपास के जलाशयों तक ले जाया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे. भक्तों का मानना है कि जलझूलनी एकादशी भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण दोनों की आराधना का पर्व है, जो जीवन से दुख-दरिद्रता को दूर कर देता है.




















