जयपुर : प्रदेश में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड और राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से जुलाई और अगस्त महीने में तकरीबन 14 भर्ती परीक्षाओं का आयोजन हो चुका है. इनमें से कुछ भर्ती परीक्षाएं एक ही दिन दो पारियों में आयोजित कराई गई. इन परीक्षाओं में जिला मुख्यालयों पर शिक्षकों को बतौर वीक्षक तैनात किया गया. उनमें से अधिकतर को दोनों पारियों में ड्यूटी देनी पड़ी. जिसके विरोध में अब शिक्षक संगठनों ने बोर्ड आयोग के साथ-साथ शिक्षा मंत्री और जिला कलेक्टरों से राहत देने की गुहार लगाई है. हालांकि शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि भर्ती परीक्षा संवेदनशील विषय है, ऐसे में जिम्मेदार शिक्षकों को ही ड्यूटी पर लगाया जा सकता है.
राजस्थान में इन दिनों प्रतियोगिता परीक्षाएं हो रही है जिससे बेरोजगारों को नौकरी मिलेगी. लेकिन कवायद में बतौर वीक्षक ड्यूटी दे रहे शिक्षकों को करीब 12 से 13 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है. राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने बताया कि अमूमन रविवार को ये परीक्षाएं होती हैं और दो शिफ्ट में आयोजन होता है. 9:00 बजे की परीक्षा के लिए 7:00 शिक्षक को बुलाया जाता है और दूसरी पारी खत्म होने तक करीब रात 8:00 बज चुके होते हैं. इतनी लंबी ड्यूटी के चलते शिक्षकों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है. लगभग हर रविवार को ये परीक्षाएं हो रही हैं .
जयपुर के शिक्षकों के सामने तो विशेष परेशानी आ रही है कि बीते करीब डेढ़ महीने से एक भी रविवार खाली नहीं गया है. जिसके चलते महिला शिक्षकों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने सरकार से ये डिमांड की कि जिला मुख्यालयों पर शिक्षकों की संख्या भी अधिक है, ऐसे में प्रत्येक पारी में अलग वीक्षक लगाया जाए. इसके चलते एक शिक्षक के खाते में 6 से 7 घंटे आएंगे. उन्होंने बताया कि इस संबंध में आरपीएससी, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के साथ-साथ शिक्षा मंत्री और जिला कलेक्टर को भी पत्र लिखकर अपील की है.
वहीं शिक्षकों की गुहार पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि जहां पर्याप्त शिक्षक होते हैं, वहां शिक्षकों की ड्यूटी एक पारी में ही लगाई जाती है. जहां शिक्षकों की कमी होती है, वहां दो पारी में ड्यूटी लगा दी जाती है. लेकिन कोशिश ये करते हैं कि शिक्षक अच्छे हो कई बार शिक्षकों की मौजूदगी होने के बावजूद भी ऐसा लगता है कि संबंधित शिक्षक ठीक से काम नहीं कर पाएंगे. ऐसे में अच्छे शिक्षकों की दो पारियों में ड्यूटी लगा दी जाती है क्योंकि परीक्षाओं का मामला बहुत सेंसिटिव है, इसलिए जिम्मेदार लोगों की ही ड्यूटी लगाई जाती है.




















