जयपुर: राजस्थान में निरक्षरों को साक्षर बनाने के उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025-26 में 31 लाख 92 हजार 696 लोगों को साक्षर बनाने का लक्ष्य तय किया गया है. इनमें 23 लाख 62 हजार 498 को जोड़ा भी जा चुका है यानी करीब 74 फीसदी सफलता हासिल की जा चुकी है. अब इस साल के अंत तक 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के साथ ही लैंगिक अंतर और ग्रामीण-शहरी अंतर को पाटना बड़ी चुनौती है. शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने आगामी तीन वर्षों में राजस्थान को साक्षरता में देश के शीर्ष तीन राज्यों में लाने का लक्ष्य रखा है.
राजस्थान की साक्षरता दर 75.8 फीसदी है. इसमें पुरुष साक्षरता 85.9 व महिला साक्षरता केवल 65.8 फीसदी है. ग्रामीण-शहरी अंतर भी गहरा है. जयपुर में हुए 59वें अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर शिक्षा मंत्री दिलावर ने राज्य में 100 फीसदी साक्षरता का लक्ष्य तय किया. ओटीएस सभागार में कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री ने कहा कि डिजिटल युग में निरक्षर होना कलंक के समान है. इस वर्ष 30 लाख लोगों को साक्षर करने का लक्ष्य है. 23 लाख का सिलेक्शन हो चुका है. स्वयंसेवी अध्यापकों ने उन्हें पढ़ाना भी शुरू कर दिया. साक्षरता दर में लैंगिक असमानता को लेकर कहा कि अब राजस्थान में एक भी व्यक्ति निरक्षर नहीं रहेगा. सभी को साक्षर करने का संकल्प है. फिर चाहे व्यक्ति महिला हो या पुरुष, ग्रामीण परिवेश का हो या शहरी. हर एक व्यक्ति को साक्षर किया जाएगा. शिक्षा मंत्री ने नवसाक्षरों को प्रेरित भी किया. इन्हें शिक्षा देने वाले स्वयंसेवी अध्यापकों को सम्मानित भी किया.
संयुक्त शासन सचिव मनीष गोयल ने बताया कि जितने भी स्वयंसेवी अध्यापक हैं, वो निस्वार्थ भाव से निरक्षरों को साक्षर बनाने में जुटे हैं. ऐसे में इनका मनोबल बढ़ना जरूरी है. इसके लिए ये कार्यक्रम रखा है. नवसाक्षरों को भी बुलाया ताकि प्रोत्साहन मिले. आज जितने भी नवसाक्षर मंच पर बोलने पहुंचे, उनमें 80% महिलाएं थी. अब विभाग का प्रयास रहेगा की हर घर में जो भी निरक्षर हैं, उन सभी को साक्षर किया जाए.
उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में साक्षरता दर में अंतर काबड़ा कारण शहरी क्षेत्र में सरकारी और निजी दोनों तरह के स्कूल और इनफॉरमल एजुकेशन उपलब्ध होना है. ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाएं कम हैं. इसी वजह से ये फर्क देखने को मिलता है. अब कोशिश है कि ग्रामीण क्षेत्र में भी कोई निरक्षर ना रहे. इसके लिए उल्लास किताबों के माध्यम से 21 सितंबर को सभी नवसाक्षरों का एग्जाम भी लिया जाएगा. उसके बाद मार्च में दूसरा एग्जाम होगा. इन नवसाक्षरों को स्वयंसेवी अध्यापक पढ़ाते भी हैं. साथ ही यूट्यूब पर डिजिटल कंटेंट भी उपलब्ध है. प्रखर 2.0 कार्यक्रम भी शुरू किया है. इसमें चित्रों के माध्यम से निरक्षरों को शब्द और अंक ज्ञान कराया जाता है. इससे उन्हें सीखने में भी आसानी होती है. उनका इंट्रेस्ट भी जगता है.




















