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अजमेर की सोनू कंवर: जिसने तोड़ी पर्दा प्रथा, बचाए 22 बच्चों के बचपन

अजमेर : राजस्थान के अजमेर जिले के पीसांगन पंचायत समिति के भावता गांव में रहने वाली एक महिला ने अपने समाज के रूढ़िवादी पर्दा प्रथा को तोड़कर नाबालिग बच्चे और बच्चियों के बाल विवाह को रुकवाने का बीड़ा उठाया है. विगत 6 वर्षों से यह महिला अपने गांव ही नहीं बल्कि आसपास के 17 गांवों में घूम घूमकर बाल विवाह के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करने का काम कर रही है. करीब 22 बाल विवाह भी रुकवा चुकी है. अपने काम के जरिये उन्हें ग्रामीण सोनू मैडम के नाम से जानते हैं. सोनू कंवर ने अपनी जिंदगी से सबक लेते हुए अपना यह रास्ता चुना है. लेकिन समाज सुधार के रास्ते पर चलना उनके लिए तलवार की धार पर चलने के बराबर था. लेकिन नेक नियति और बच्चों के भलाई के लिए सोनू कंवर हर उस कठनाई का सामना करती आई हैं, जिसने उन्हें नेक काम में बाधा पहुंचने से रोका है.

16 साल की उम्र में बनी थी जुड़वा बच्चियों की मां : सोनू कंवर का विवाह महज 15 साल की उम्र में हुआ और 16 साल की उम्र में वह जुड़वा बेटियों की मां बन गईं. कम उम्र में शादी और मातृत्व के संघर्षों ने उन्हें झकझोर कर रख दिया. लेकिन उन्होंने हार मानने की बजाय समाज सुधार की राह चुनी. एक एनजीओ के साथ जुड़कर उन्होंने बच्चों को पढ़ाने और बाल विवाह रोकने का बीड़ा उठाया. सोनू कंवर खुद बाल विवाह का दंश झेल चुकी हैं. 15 साल की उम्र में सोनू कंवर का विवाह लक्ष्मण सिंह के साथ हुआ था. सोनू कंवर का पीहर अलवर के खोरालाड़खानी में है.

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सोनू कंवर अकेली नही उसकी चार बहनों का बाल विवाह भी गांव में ही हुआ था. चार बहनों में सोनू कंवर सबसे छोटी है. चार बहनों में से दो बहनों ने भी समाज की रूढ़िवादी परंपरा को तोड़ा. सोनू कंवर बाल विवाह रुकवाने का काम करती हैं तो वहीं उनकी बहन पुष्पा कंवर वैन चलाती हैं और बच्चों को स्कूल से लाने ले जाने का काम करती हैं. सोनू कंवर बताती हैं कि उनका सपना था कि वह पुलिस में नौकरी करें. खुद का सपना कभी पूरा नहीं हो पाया, लेकिन अपनी बेटियों के साथ-साथ वह दूसरों के नाबालिग बेटे और बेटियों की जिंदगी संवारने का काम कर रही हैं. उनका मकसद है कि बच्चे बाल विवाह से बचें और शिक्षा से जुड़कर अपने सपनों को पूरा करें, सक्षम बनकर शादी करें.

जान से मारने और समाज से बहिष्कृत करने तक की मिली धमकी : सोनू कंवर बताती हैं कि वह राजपूत समाज से आती हैं. गांव में बहुओं को पर्दे में रहना होता है. जबकि बेटियों को पढ़ने-लिखने और आगे बढ़ने का मौका दिया जाता है. शुरुआत में बच्चों की पढ़ाई तक तो सब ठीक था, लेकिन जब उन्होंने बाल विवाह रुकवाने का काम शुरू किया तो परिवार के लोगों ने ताने सुन उनके पैरों में भी रूढ़िवादी पंरपराओं की बेड़िया डालने की कोशिश की. उनके काम को लेकर उन्हें भला बुरा कहा गया. दूसरे का घर तोड़ने वाली डायन तक उन्हें लोग कहते… लेकिन सोनू कंवर ने हार नहीं मानी. दरअसल, सोनू कंवर शिक्षा के महत्व और बाल विवाह के दंश को जानती थीं. इसलिए उन्होंने आगे बढ़ने का फैसला किया.

50 किलोमीटर तक पीछा करके रुकवाया बाल विवाह : सोनू हर रोज सुबह अपनी स्कूटी पर घर से निकलती हैं. गांव-ढाणी में घूमकर बाल विवाह के खिलाफ लोगों को जागरूक करती हैं. सोनू कंवर ने बताया कि 2021 में वह राजस्थान महिला कल्याण मंडल (एनजीओ) से जुड़ी थीं. उन्हें बताया गया कि किस तरह से ग्रामीणों को बाल विवाह के दुष्परिणाम बताने हैं. स्कूल, आंगनबाड़ी और आमजन के बीच जाकर उन्हें लोगों को जागरूक करना है. लोगों से बाल विवाह नहीं करवाने के लिए वचन पत्र भी भरवाने हैं. एनजीओ की ओर से शुरुआत में ही उन्हें पांच बाल विवाह रुकवाने का लक्ष्य दिया गया. सोनू कंवर ने बाल विवाह रुकवाने की शुरुआत अपने ही गांव से की. गांव में प्रजापति समाज में चार लड़कियों की शादी हो रही थी, जिसमें दो नाबालिग लड़कियां थी. उन्होंने बताया की शुरुआत में उन्हें काफी डर भी लगा. जाहिर है शादी के लिए काफी खर्चा हुआ था. उन्हें लगा कि लोग उन्हें पीटेंगे और भला बुरा कहेंगे. लेकिन हिम्मत करके वह प्रशासन की मदद से बाल विवाह रुकवाने में कामयाब हो गई.

अब तक दर्जनों शादियां रुकवाई : इसी तरह से जागरूकता कार्यक्रम के लिए वह डोडियाना गांव गई थी. लौटते समय उसने एक बच्चे को घोड़ी पर बैठा हुआ देखा. पूछने पर पता चला कि चीता समाज में किसी बच्चे का बाल विवाह होने जा रहा है. मौके पर लोग उन्हें पहचान गए, लिहाजा बच्चों को घोड़ी से उतर कर बस में बैठा दिया और उसके कपड़े बदल दिए गए. बस नन्ही दुल्हन के घर की ओर चल पड़ी. सोनू कंवर ने बताया कि उन्होंने मौके से ही चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर फोन करके बाल विवाह की सूचना दी और बस का 50 किलोमीटर तक पीछा भी किया. बस जब लड़की के घर पहुंची, तब प्रशासन के सहयोग से लड़के और लड़की का बाल विवाह रुकवा दिया गया.

प्रशासन रुचि ले तो मिट सकती है बाल विवाह की कुप्रथा : सोनू कंवर बताती है कि बाल विवाह रुकवाने के दौरान उन्होंने कई बार प्रशासन के लोगों की असंवेदनशीलता भी देखी ले देकर बाल विवाह कहीं और करवाने के मामले भी देखे और सुने. उन्होंने बताया कि बाल विवाह को रुकवाने के लिए यदि पहले से प्रशासन चेत जाए तो बाल विवाह पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है. मसलन विवाह की तिथियां से दो दिन पहले से ही यदि पुलिस और प्रशासन की गाड़ियां गांव में घूमने लगें तो लोगों में कानून का डर बना रहता है.

बहन को काम के बदले मिलते हैं ताने : सोनू कंवर की बड़ी बहन पुष्पा कंवर एक स्कूल वैन चलाती हैं और बच्चों को स्कूल पहुंचाने का कार्य करती हैं. वहीं, पति लक्ष्मण सिंह भी अब सोनू के कार्य में सहयोग दे रहे हैं. पहले विरोध करने वाले पति अब समाज में बाल विवाह के नुकसान समझाते हैं. सोनू कंवर के पति लक्ष्मण सिंह बताते हैं की शुरुआत में वह भी सोनू कंवर के काम का विरोध किया करते थे. लेकिन जब लोगों को उनके काम की अहमियत के बारे में समझ में आया तब उन्होंने उसे सपोर्ट करना शुरू कर दिया. उन्होंने बताया कि लोग उन्हें भी ताने दिया करते थे और फोन पर धमकी देते थे कि उनकी पत्नी को समझा ले वरना अच्छा नहीं होगा. उन्होंने बताया कि वह भी लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में समझाते हैं. उन्होंने कहा कि उनके भी दो बेटियां हैं वह नहीं चाहते कि उनका भी बाल विवाह हो, वह चाहते हैं कि दोनों पढ़ लिखकर सक्षम बनें.

सोनू कंवर की समझाइश से बदली सोच : ग्रामीण छोटी रावत बताती हैं कि उनकी नाबालिग बेटी का विवाह करने का मानस परिवार के लोग बना रहे थे. इस दौरान सोनू मैडम घर आई और परिवार के लोगों को समझाया और बताया कि बाल विवाह के क्या नुकसान होते हैं. सोनू मैडम की समझाइश का ही असर है कि उनके परिवार में उनकी बेटी है, जो अब कॉलेज स्तर की पढ़ाई कर रही है. बेटी को पढ़ाने और उसके सपनों को पूरा करने के लिए परिवार पूरा सहयोग दे रहा है.

ग्रामीण सीमा और संपत्ति बताती हैं कि गांव में बच्चों की जल्दी शादी करवा दी जाती है, लेकिन सोनू मैडम के आने के बाद लोगों में समझ आई है. उन्होंने बताया कि उन्होंने भी अपने बच्चों के बाल विवाह के बारे में सोचा था लेकिन सोनू मैडम ने जब समझाया तो उन्होंने बाल विवाह की मंशा को त्याग कर बच्चों को पढ़ने लिखने और उन्हें सक्षम बनाने का मन बना लिया है. ग्रामीण मंजू ने बताया कि सोनू मैडम के प्रयासों की वजह से बाल विवाह अब काफी कम हो गए हैं. बुजुर्ग ग्रामीण हीरालाल गुर्जर बताते हैं कि बच्चों के बालिग होने पर ही उनका विवाह करना चाहिए. बालिग होने पर ही बच्चों में अच्छे और बुरे की समझ आती है. बच्चों को पढ़ा लिखा कर पहले सक्षम बनाएं और फिर उसके बाद शादी करें.

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