Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

झालावाड़ की सलोनी ने 6जी पर किया शोध, तैयार किया खास मटेरियल

झालावाड़: विश्व में कई देशों के बीच इंटरनेट स्पीड को बढ़ाने की होड़ मची हुई है. इस समय इंटरनेट की दुनिया में 4G के बाद 5G का विस्तार हो रहा है. इसके बढ़ते उपयोग के बीच वैज्ञानिकों ने 6G को लेकर रिसर्च प्रोग्राम शुरू कर दिया है. माना जा रहा है कि 2030 तक इंटरनेट की 6G स्पीड को व्यावहारिक रूप दिया जा सकेगा, जिससे न केवल इंटरनेट की स्पीड बढ़ेगी, बल्कि इंटरनेट की कार्यक्षमता 5G की तुलना में 100 गुना तेज हो जाएगी.

इधर, इसको लेकर भारत के युवा वैज्ञानिक भी पीछे नहीं हैं. जिले की डॉ. सलोनी शर्मा ने इंटरनेट नेटवर्क 6G को लेकर एक नया शोध किया है. इसमें उन्होंने ग्रेफीन और मॉलीब्लेडिनम डाईसल्फाइड की पतली मोनो लेयर परतों को जोड़कर एक सैंडविच नुमा हाइब्रिड मटेरियल तैयार किया है. इस हाइब्रिड मटेरियल को भविष्य में 6G जैसी तकनीक में एक मटेरियल के रूप में स्थापित किया जा सकेगा.

Advertisement Box

हेटरोस्ट्रक्चर उच्च तापमान पर है प्रभावीः डॉ. सलोनी शर्मा ने बताया कि ग्रेफीन और मॉलीब्लेडिनम डाईसल्फाइड की पतली मोनो लेयर परतों को जोड़कर तैयार सैंडविच नुमा हाइब्रिड मटेरियल ने टेराहर्ट्ज विकिरण के प्रति असाधारण संवेदनशीलता दिखाई है. ऐसा माना जाता है कि टेराहर्टज विकिरण 6जी कम्युनिकेशन प्रणालियों, क्वांटम तकनीकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने बताया कि शोध में यह पाया गया है कि यह हाइब्रिड हेटरोस्ट्रक्चर उच्च तापमान पर भी प्रभावी ढंग से काम करता है. ऐसे में तैयार किया गया हाइब्रिड मटेरियल भविष्य में उच्च गति संचार 6G जैसी तकनीक में एक आदर्श सामग्री के रूप में स्थापित किया जा सकता है.

क्या है टेराहर्ट्ज विकिरणः 6G में टेराहर्ट्ज़ विकिरण ऐसा “हाईवे” है जो डेटा ट्रांसफर की स्पीड को कई सौ गुना बढ़ाकर भविष्य की स्मार्ट टेक्नोलॉजी को संभव बनाएगा. टेराहर्ट्ज विकिरण की जानकारी देते हुए भौतिक विज्ञान के पूर्व व्याख्याता मोहन लाल शर्मा ने बताया कि टेराहर्ट्ज विकिरण एक प्रकार का विद्युतचुंबकीय विकिरण है, जो माइक्रोवेव तथा इंफ्रारेड के बीच की आवृत्ति सीमा में आता है. 6th जनरेशन वायरलेस प्रोग्राम (6G) में टेराहर्ट्ज विकिरण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है, इसका प्रमुख कारण है कि यह विकिरण बहुत उच्च गति और अल्ट्रा लो लेटेंसी वाली होती है. इन विकरणों से डेटा ट्रांसफर करने में काफी मदद मिलती है.

टेराहर्ट्ज विकिरण का ही उपयोग क्यों आवश्यक है 6G मेंः इस संबंध में मोहन लाल शर्मा बताते हैं कि 6G में 0.1–10 THz रेंज उपयोग की जा सकती है यह आवृत्ति 5G वायरलेस नेटवर्क में काम में ली जा रही 30 GHz–300 GHz, मिलीमीटर वेव से भी कहीं अधिक है. टेराहर्ट्ज विकिरणों से Tbps यानी टेराबिट प्रति सेकंड स्तर की स्पीड संभव होगी, जिससे डेटा ट्रांसफर की दर काफी अधिक बढ़ जाएगी. उन्होंने बताया कि जहां 5G में स्पीड Gbps गति तक सीमित है, वहीं 6G में यह स्पीड 100–1000 गुना तेज होगी.

अंतर्राष्ट्रीय जर्नल मटेरियल्स तथा नेचर इंडिया में प्रकाशितः सलोनी शर्मा के द्वारा 6G जनरेशन को लेकर किए गए शोधपत्र को इसी वर्ष अप्रैल में प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल मैटेरियल्स’ में प्रकाशित किया गया. वहीं, इस शोध को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी सराहना मिली है. हाल ही में ‘नेचर इंडिया’ ने इसे ‘अल्ट्राथिन हाईब्रिड मेटेरियल पॉवर 6जी वायरलेस एंड क्वांटम डिवाइस’ शीर्षक के साथ प्रकाशित किया है.

डॉ. सलोनी शर्मा ने 6G की और बढ़ाया कदमः डॉ. सलोनी शर्मा की प्रारंभिक शिक्षा झालावाड़ जिले में ही हुई है. 2013 में कोटा यूनिवर्सिटी से उन्होंने बीएससी एमएससी इंटीग्रेटेड फिजिक्स का फाइव ईयर कोर्स किया. यहां उन्होंने वैज्ञानिकों के रिसर्च के तौर तरीके सीखे थे. सलोनी शर्मा ने बताया कि 2019 में उन्होंने जेआरएफ नेट परीक्षा फाइट की. वहीं, 2020 में वह पीएचडी करने के लिए CSIR नई दिल्ली की राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला में अनुसंधान करने के लिए पहुंची थी, जहां उन्होंने प्रोफेसर बिपिन कुमार गुप्ता के निर्देशन में किए गए शोध में पीएचडी की उपाधि पाई है. अब वह आगे पोस्ट डॉक्टर रिसर्च करना चाहती है.

मोनो लेयर परतों को जोड़ बनाया सैंडविचनुमा हाइब्रिड मटेरियल : सलोनी शर्मा ने बताया कि उनके द्वारा शोध कर बनाए गए मटेरियल का उपयोग करके हम 6G मटेरियल को तैयार कर पाएंगे. उन्होंने बताया कि शोध के दौरान राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला में सिंगल लेयर ग्रेफीन ,मोनो लेयर Mos2 व मोनोलेयर Wos2 को तैयार किया गया. बाद में इन पर महिंद्रा यूनिवर्सिटी हैदराबाद तथा मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट फंडामेंटल रिसर्च सेंटर में इन लेयर पर टेराहर्टज की विकिरण की पहली टेस्टिंग की गई. यहां कुछ लिमिटेशन सामने आने के बाद उनको कम करने के लिए इन लेयर के हाइड्रो स्ट्रक्चर तैयार करने का निर्णय लिया गया. इसमें सिंगल लेयर को एक के ऊपर रख सैन्डविच नुमा एक हाइब्रिड मटेरियल तैयार किया गया. यह पूरा कार्य यूएसए राइस यूनिवर्सिटी के हुयुस्टिन शहर में संपन्न हुआ, इसकी टेस्टिंग बाद में मुंबई टीआईआरएफ में की गई.

पिता सांख्यिकी अधिकारी व मां हैं शिक्षकः डॉक्टर सलोनी शर्मा के माता-पिता बेटी की इस उपलब्धि पर काफी खुश हैं. पिता सुरेश शर्मा सांख्यिकी अधिकारी हैं, जबकि उनकी मां सीमा शर्मा एक शिक्षक के रूप में सेवाए दे रही हैं. दोनों को अपनी बेटी की उपलब्धि पर गर्व है. दोनों का कहना है कि सलोनी बचपन से मेधावी छात्रा रही है. सलोनी के नाना रमेश चंद शर्मा बेटी के जन्म के बाद उसे पढ़ा लिखाकर काबिल बनाने की बात किया करते थे. उन्होंने सभी माताओं से भी अपील की बेटी को बोझ न समझे तथा उसे आगे बढ़ने का मौका दें.

Best Service Providers Near You
भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम के बाद कांग्रेस ने संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। क्या सरकार को इस पर विचार करना चाहिए?

Aries Rashifal
मेष
taurus Rashifal
वृषभ
gemini Rashifal
मिथुन
cancer Rashifal
कर्क
leo Rashifal
सिंह
virgo Rashifal
कन्या
libra Rashifal
तुला
scorpion Rashifal
वृश्चिक
sagittarius Rashifal
धनु
capricorn Rashifal
मकर
aquarius Rashifal
कुंभ
pisces Rashifal
मीन
Advertisement Box

और भी पढ़ें