अजमेर: पुष्कर रोड पर स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में शनिवार को मरीज की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा कर दिया और शव उठाने से इनकार कर दिया. परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टर की लापरवाही से महिला मरीज की मौत हुई. उन्होंने चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया. हंगामा की सूचना पर हरि भाव उपाध्याय नगर थाना पुलिस ने मौके पर पहुंची और परिजनों के साथ समझाइश की, लेकिन परिजन अपने मांग पर अड़े रहे.
जेएलएन अस्पताल में होगा पोस्टमार्टम: मौके पर पहुंचे हरि भाव उपाध्याय नगर थाना प्रभारी महावीर शर्मा ने बताया कि थांवला के पास गोरजिया का पूरा निवासी नीतू कंवर को गत 20 अगस्त को परिजनों ने निजी अस्पताल में भर्ती करवाया था. शुक्रवार देर रात को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. परिजन चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं. मरीज का शव निजी अस्पताल से जेएलएन अस्पताल लाया गया है. यहां शव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया जाएगा. फिलहाल परिजनों ने कोई शिकायत नहीं दी है.
ये है परिजनों का आरोप: मृतका के ससुर भगवान सिंह ने बताया कि थांवला में बीमार होने पर नीतू को इंजेक्शन लगाया गया था. इंजेक्शन की जगह पकाव होने के कारण 2 दिन पहले निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. शुक्रवार शाम तक नीतू आराम से बात कर रही थी. उनका आरोप है कि डॉक्टर ने कहा कि नीतू ऐसे ठीक नहीं होगी, इनका ऑपरेशन करना होगा. इससे पहले परिजनों से इलाज के पैसे ले लिए. भगवान सिंह का आरोप है कि नीतू का ऑपरेशन तब किया गया, जब उसका बीपी लो था. नीतू उनके इकलौते बेटे रामसिंह की पत्नी है. डॉक्टर की लापरवाही से मेरा घर खत्म हो गया. उन्होंने कहा कि नीतू के एक बेटी है. उसकी परवरिश और ब्याह का खर्चा मुआवजे के तौर पर 1 करोड़ रुपए अस्पताल प्रशासन देगा, तो ही शव लिया जाएगा. अन्यथा शव को बाहर नहीं निकालेंगे.
अस्पताल ने किया ये दावा: पुष्कर रोड स्थित अस्पताल के डायरेक्टर डॉ तरुण यादव ने बताया कि गत 20 अगस्त की शाम को नीतू कंवर को भर्ती करवाया गया था. मरीज को 7 दिन पहले गांव में इंजेक्शन लगाया गया था. 7 दिन तक उसकी इलाज के लिए नहीं लाया गया. जब उसकी हालत बहुत ज्यादा खराब हुई, तब परिजन उसे लेकर अस्पताल आए. परिजनों को रिटर्न में और वीडियो काउंसलिंग के जरिए समझाया भी गया, लेकिन परिजन यहां इलाज के लिए ही अड़े रहे. जबकि उन्हें रेफर के लिए भी कहा गया था. उन्होंने कहा कि परिजन हमसे नहीं मिले हैं. वह बाहर ही हंगामा कर रहे हैं और तोड़फोड़ करने की धमकी दे रहे हैं. इससे अन्य मरीज भी परेशान हो रहे हैं. मरीज को सेप्टीसीमिया हुआ और उसे हार्ट अटैक आया. मरीज के इलाज में कोई लापरवाही नहीं हुई है.




















