जयपुर. राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी राजस्थान गर्वेमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) पर मंडराए संकट के बादल छंट गए हैं. भुगतान के अभाव में योजना के लाभार्थियों राजस्थान सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के इलाज के लिए मना करने वाले प्राइवेट अस्पताल मान गए हैं. सरकार और प्राइवेट अस्पतालों में इस मसले को लेकर अब सहमति बन गई है. इससे अब कर्मचारियों और पेंशनर्स का इलाज रुकेगा नहीं है. दोनों पक्षों में सहमति बन जाने से कर्मचारियों और पेंशनर्स ने राहत की सांस ली है.
आरजीएचएस के इस मसले को लेकर विपक्ष सरकार पर जबर्दस्त तरीके से हमलावर हो रखा था. वहीं सरकार भी प्राइवेट अस्पतालों की चेतावनी के बाद टेंशन में थी. लेकिन सोमवार को दोनों में सहमति बन जाने से अब कर्मचारियों और पेंशनर्स तथा उनके परिजनों के फ्री इलाज की राह आसान हो गई है. जानकारी के अनुसार RGHS के तहत अब निजी अस्पतालों में कर्मचारियों और पेंशनर्स का इलाज जारी रहेगा. सरकार से वार्ता के बाद निजी अस्पतालों ने यह निर्णय लिया है.
प्राइवेट अस्पतालों ने दे रखी थी चेतावनी
सरकार ने निजी अस्पतालों को आश्वस्त किया है कि उनके भुगतान संबंधी समस्याओं का जल्द निदान किया जाएगा. मार्च 2025 तक का भुगतान 31 जुलाई तक कर दिए जाएगा. उसके बाद आगे नियमित रूप से 60 दिन के अंदर निजी अस्पतालों का RGHS का भुगतान कर दिया जाएगा. सरकार के इस ठोस आश्वासन के बाद निजी अस्पतालों ने इस पर सहमति जता दी है. निजी अस्पतालों ने सरकार को चेतावनी दे रखी थी कि अगर उनका भुगतान नहीं किया गया तो वे 15 जुलाई से RGHS के तहत कर्मचारियों और पेंशनर्स का इलाज नहीं करेंगे.
पूर्व सीएम गहलोत ने लगाए थे सरकार पर गंभीर आरोप
इस मामले को लेकर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने चार दिन पहले सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर चिंता जताई थी. गहलोत ने आरोप लगाया था कि भाजपा सरकार का प्रबंधन बुरी तरह फेल हो चुका है. उनका कहना था कि हर महीने सरकारी कर्मचरियों के वेतन से RGHS के लिए कटौती होती है पर इसका भुगतान अस्पतालों को नहीं किया जा रहा. जनहित की एक बेहतरीन योजना को भाजपा सरकार बर्बाद करने पर आमादा है. उसके बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सीएम को इस समस्या का समाधान करने के लिए पत्र लिखा था.




















