भरतपुर : रक्षाबंधन का पर्व इस बार भरतपुर में भक्ति और भावनाओं के अनोखे संगम के रूप में मनाया गया. शनिवार सुबह किला स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में ऐसी तस्वीरें देखने को मिलीं, जिन्होंने हर किसी के दिल को छू लिया. यहां बहनों ने अपने हाथों में पूजा की थाल, राखी, चावल और मिठाई लेकर ठाकुरजी के दरबार में हाजिरी दी और उन्हें अपने जीवन का सच्चा रक्षक मानकर राखी बांधी.
भक्ति में डूबा मंदिर परिसर : सुबह मंगला आरती के बाद मंदिर के पट खुलते ही परिसर में भक्ति का माहौल गहरा गया. घंटियों की मधुर ध्वनि, फूलों की महक और भजनों की स्वर लहरियां पूरे वातावरण में फैल गईं. महिलाएं और युवतियां सजी-धजी, हाथों में थाल लिए, बारी-बारी से ठाकुरजी को राखी बांधती रहीं. किसी की आंखों में आंसू थे तो किसी के चेहरे पर शांति, लेकिन हर किसी के मन में एक ही भावना थी, अब हमारे भी एक भाई हैं, जो हमें कभी नहीं छोड़ेंगे.
पहली बार बिहारी जी को राखी बांधी : भरतपुर शहर की एकता विहार कॉलोनी निवासी मनीषा भी शनिवार सुबह श्रद्धा और उम्मीद से भरे कदमों के साथ किला स्थित मंदिर पहुंचीं. उन्होंने पहली बार श्री बांके बिहारी जी को राखी बांधी. मनीषा ने बताया कि मेरा भाई है, लेकिन वह मुझे बहन जैसा मान-सम्मान नहीं देता. ऐसे में मैंने तय किया कि इस बार अपने मान-सम्मान का ध्यान रखने का वचन बिहारी जी से लूंगी. अब वही मेरे सच्चे भाई हैं.
भगवान और भाई, दोनों को राखी : वहीं, काली बगीची निवासी लता बंसल भी अपनी परंपरा निभाने के लिए मंदिर पहुंचीं. लता ने बताया कि मेरे भाई हैं और मैं उन्हें भी राखी बांधती हूं, लेकिन हर साल बिहारी जी को भी राखी बांधती हूं. अपने भाई की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए भगवान से आशीर्वाद लेना जरूरी है, इसलिए मैं यहां आकर राखी बांधती हूं. पिछले कुछ वर्षों से भरतपुर और आसपास के इलाकों में यह प्रथा धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रही है. यह न केवल धार्मिक दृष्टि से खास है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी बहनों को संबल देता है.
पंडित मनु मुद्गल ने बताया कि लोककथाओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब धरती पर कोई सगे-संबंधी रक्षा का वचन निभाने में असमर्थ हो जाएं तो भगवान स्वयं अपने भक्त की ढाल बन जाते हैं. माना जाता है कि श्रीकृष्ण ने भी द्रौपदी की लाज बचाकर यह प्रमाण दिया था कि आस्था से जुड़ा बंधन खून के रिश्ते से भी अधिक मजबूत होता है. इसी आस्था के तहत बहनें ठाकुरजी को राखी बांधकर अपना सच्चा भाई और रक्षक मानती हैं.




















