कोटा: राजस्थान सरकार कॉलेज या यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे युवाओं को एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के कोर्स निशुल्क करवा रही है, या यूं कहें तो उन्हें स्कॉलरशिप दी जा रही है. बशर्ते उन्हें एक परीक्षा पास करनी होगी. इसके बाद वे राजस्थान R-CAT सेंटर पर इन कोर्स को कर सकते हैं. यह कोर्स 25 हजार से लेकर सवा लाख रुपए में करवाएं जाते हैं, लेकिन सरकार एग्जाम के जरिए स्कॉलरशिप देती है, जिससे बच्चे निशुल्क तक भी इन कोर्स को कर सकते हैं.
इस एग्जाम का नाम “क्विज ए थॉन” (Quiz A Thon) है. यह परीक्षा R-CAT केंद्र के जरिए साल में चार बार आयोजित की जाती है. वैसे आरकैट सेंटर पर 100 कोर्सेज करवाए जाते हैं, लेकिन क्विज ए थॉन से 26 कोर्स में ही स्कॉलरशिप मिलती है. राजस्थान सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग (DOIT) के जरिए आरकैट सोसायटी बनाई है, जिसके जरिए ये आरकैट सेंटर खोले गए हैं. ये आरकैट सेंटर संभागीय मुख्यालय पर कोर्स करवा रही है. इन सेंटर्स को आगे जिला मुख्यालय तक लेकर जाना है.
डीओआईटी के जीएम अमित शर्मा ने बताया कि एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर ग्लोबल सर्टिफिकेट कोर्सेज करवाएं जा रहे हैं, यह सभी आज के समय में मल्टीनेशनल कंपनी से लेकर पर फील्ड और इंडस्ट्री में उपयोग आ रहे हैं. इनमें डिजिटल मार्केटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स एंड ऑटोमेशन, साइबर सिक्योरिटी, जावा क्लाउड डेवलपमेंट, डिजिटल एप्लीकेशन डिजाइन, आर्किटेक्ट व एथिकल हैकर जैसे कोर्स है.
सरकार स्कॉलरशिप के जरिए भी यह कोर्स करवा रही है. इसमें यह जरूरी नहीं है कि पूरी तरह से निशुल्क हो जाए. बच्चा एग्जाम क्लियर करेगा तो उसका परिणाम परसेंटाइल बेसिस पर जारी होगा, जिसकी मार्किंग के आधार पर स्कॉलरशिप तय होती है. इसमें कैंडिडेट 100, 85, 70 और 50 फीसदी तक स्कॉलरशिप प्राप्त कर सकते हैं. जितने प्रतिशत उसे स्कॉलरशिप मिली है, उतनी फीस सरकार देती है.
केवल दो दर्जन ही कर पाए खुद के पैसे से कोर्स : अमित शर्मा का कहना है कि राजस्थान में स्कॉलरशिप के जरिए 2200 से ज्यादा कैंडिडेट कोर्स कर चुके हैं. इन एडवांस्ड टेक्नोलॉजी कोर्सेज में हाड़ौती संभाग के भी 50 से ज्यादा कैंडिडेट है, लेकिन पैसे देकर कोर्स करने वाले कैंडिडेट्स की संख्या दो दर्जन के आसपास ही है. राजस्थान में जयपुर, जोधपुर, अजमेर, भरतपुर, उदयपुर, कोटा व बीकानेर में यह कोर्सेज हो रहे हैं. कोटा के केंद्र का मार्च में इनॉग्रेशन हो गया था, जिसके बाद यहां पर काम शुरू हो गया है. इस केंद्र के जरिए 100 से ज्यादा एडवांस्ड टेक्नोलॉजी कोर्स करवाए जा रहे हैं.
1 साल तक का कोर्स, फीस भी सवा लाख तक : अमित शर्मा का कहना है कि क्विज ए थॉन से होने वाले कोर्स 26 हैं. इनमें सबकी अलग-अलग फीस है. यह करीब 25 हजार से शुरू होकर सवा लाख रुपए तक है. इन कोर्सेस की समय सीमा भी अलग-अलग है. कुछ कोर्स 80 से 100 घंटे तक के हैं, लंबे समय चलने वाले कोर्स 300 घंटे तक के भी हैं. इन कोर्सेज को करने वाले अधिकांश कैंडिडेट किसी यूनिवर्सिटी या कॉलेज में एनरोल होते हैं. ऐसे में उनकी क्लास वहां भी चलती है. इसीलिए दिन में दो से तीन घंटे ही आरकैट सेंटर पर पढ़ पाते हैं. छुट्टियां होने पर यह घंटे बढ़ा दिए जाते हैं. इस हिसाब से यह कोर्स 3 महीने से लेकर 1 साल में पूरे होते हैं.
गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब जैसी कंपनियां करवा रही कोर्स : आरकैट ने मल्टीनेशनल टेक कंपनियां के साथ अनुबंध है, जिसके तहत ही ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चर (OEMs) साझेदारी के तहत ही कोर्सेज करवा रही हैं, जिसमें हर ओईएम के दो कोर्स स्कॉलरशिप स्कीम के तहत जुड़े हुए हैं. इन्हें मिला कर 13 कंपनियों के 26 कोर्स हैं. जिनमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एडोब, ओरेकल, वीएमवेयर, ऑटोफिना, रेड हैट, ईसी-काउंसिल, ईएसआरआई, सेल्सफोर्स, फाइटेक, एसएएस और एडब्ल्यूएस शामिल हैं. ये ओईएम में ट्रेनिंग प्रोग्राम व कोर्स में सहयोग भी करते है.
आर्ट्स या कॉमर्स का बैकग्राउंड कैंडिडेट भी कर सकता है कोर्स : जीएम अमित शर्मा का कहना है कि ज्यादातर टेक्निकल कोर्स ज्यादातर बीटेक स्टूडेंट्स ही करते हैं, लेकिन इसमें कोई बाध्यता नहीं है कि आर्ट्स या कॉमर्स बैकग्राउंड से पढ़ रहा कैंडिडेट नहीं कर सकता है. क्विज ए थॉन के बेसिक एप्टीट्यूड टेस्ट उसे देना होता है. उसके बाद परिणाम के आधार पर काउंसलिंग करते हैं, उसके बाद कैंडिडेट को हम गाइड कर देते हैं कि उसका क्या कैलिबर है. कोई आर्ट्स का कैंडिडेट कोडिंग कर सकता है, जिसके लिए कंप्यूटर की बेसिक नॉलेज जरूरी है तो उसे यह कोर्स भी करवाया दिया जाता है. अन्यथा बच्चों को दूसरे कोर्सेज के बारे में सजेशन देते हैं. हमारा लक्ष्य यह है कि ज्यादा से ज्यादा कैंडिडेट एडवांस्ड टेक्नोलॉजी कोर्सेज के जरिए अपनी नॉलेज को बढ़ाएं और लाभ ले सके, ताकि उनके रोजगार और अन्य कार्यों में यह उपयोग हो सके.




















