राजसमंद : मेवाड़ के बहुप्रतिक्षित महाराणा प्रताप सर्किट प्रोजेक्ट के तहत हल्दीघाटी, कुंभलगढ़ व उदयपुर में महाराणा प्रताप के युद्ध स्थल, जन्म स्थल, कर्म स्थल के विकास की उम्मीद जगी है. साथ ही कृष्णा सर्किट में अधूरे पड़े नाथद्वारा के प्रोजेक्ट, मेवाड़ में टूरिस्ट सर्किट के साथ अधूरे हाइवे के प्रोजेक्ट अटकने को गंभीरता से लेते हुए उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी नाथद्वारा पहुंची और चारों विधायकों की मौजूदगी में विभिन्न विभागों के अफसरों की वन टू वन मीटिंग ली. तय समय सीमा में प्रोजेक्ट पूरे करने के सख्त निर्देश दिए. इस बैठक से भाजपा पदाधिकारियों के साथ अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को भी बाहर निकाल दिया गया. फिर डिप्टी सीएम ने प्रत्येक विभाग के अधिकारी को बुलाकर उनकी क्लास ली.
दरअसल उप मुख्यमंत्री रविवार शाम नाथद्वारा पहुंची और श्रीनाथजी के दर्शन बाद न्यू कॉटेज में विभिन्न विभागीय समीक्षा बैठक बुलाई. बैठक में भाजपा जिलाध्यक्ष जगदीश पालीवाल, जिला कलेक्टर अरुण कुमारी हसीजा सहित कई भाजपा कार्यकर्ता व विभागों के कर्मचारी पहुंच गए. डिप्टी सीएम ने न्यूज कॉटेज में बैठक के लिए सभी भाजपा कार्यकर्ता, प्रशासनिक अधिकारियों को भी कक्ष से बाहर निकाल दिया. चारों विधायक विश्वराजसिंह मेवाड़, सुरेंद्रसिंह राठौड़, दीप्ति माहेश्वरी व हरिसिंह रावत की मौजूदगी में उपमुख्यमंत्री ने सबसे पहले पीडब्लूडी अधिकारियों को बुलाया. फिर अलग-अलग विभाग के अफसरों की बैठक ली और राजसमंद जिले में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी ली. लंबित कामकाज को लेकर नाराजगी भी व्यक्त की.
उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी ने महाराणा प्रताप सर्किट परियोजना के तहत महाराणा प्रताप से संबंधित उदयपुर संभाग के सभी स्थलों को शामिल करते हुए डीपीआर बनाने पर चर्चा की. साथ ही नाथद्वारा में अधूरे पड़े श्रीकृष्णा सर्किट को लेकर केन्द्र सरकार से वार्ता करने की बात कही. राजसमंद जिले में फोरलेन पर अधूरे ओवरब्रिज प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करने के पीडब्लूडी व एनएचएआई अफसरों को खास निर्देश दिए. इस तरह अलग-अलग विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक का दौर देर रात तक जारी रहा.
राजसमंद जिले में बनेंगे महाराणा प्रताप और कृष्णा सर्किट : दीया कुमारी की बैठक के बाद राजसमंद जिले में महाराणा प्रताप सर्किट और कृष्णा सर्किट विकसित करने की उम्मीद ने फिर से जोर पकड़ा है. इससे न केवल क्षेत्रीय इतिहास और संस्कृति को नई पहचान मिलेगी, बल्कि पर्यटन के माध्यम से स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी. महाराणा प्रताप सर्किट के तहत राजसमंद और आसपास के ऐतिहासिक स्थलों को जोड़ा जाएगा. इसमें हल्दीघाटी, कुम्भलगढ़ किला, गोगुंदा, रणकपुर और राजसमंद झील जैसे स्थान शामिल किया जाना प्रस्तावित है. इन स्थलों पर महाराणा प्रताप के शौर्य और बलिदान से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा.
- हल्दीघाटी युद्धस्थल को विशेष आकर्षण बनाया जाएगा
- कुम्भलगढ़ किले पर साउंड एंड लाइट शो की व्यवस्था होगी
- चावंड को पहचान दिलाई जाएगी
- राजसमंद झील के किनारे पर्यटकों के लिए नई सुविधाएँ विकसित की जाएंगी
कृष्णा सर्किट का महत्व : कृष्णा सर्किट के अंतर्गत जिले के प्रमुख धार्मिक और आस्था स्थलों को शामिल किया जाएगा। इसमें श्रीनाथजी मंदिर (नाथद्वारा) , श्री सांवलिया सेठ मंदिर (मंडफिया, चित्तौड़गढ़ सीमा से जुड़ा), उदयपुर का जगदीश मंदिर और अन्य प्रमुख कृष्ण धामों को जोड़ा जाएगा.
- नाथद्वारा मंदिर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षक बनाने पर जोर दिया जाएगा
- भक्तों के लिए सुविधाओं में सुधार, पार्किंग और डिजिटल क्यू सिस्टम विकसित होंगे




















