जैसलमेर: भारत-पाक सीमा से सटे इलाकों में सरकारी कंपनी ओएनजीसी (ONGC) ने बड़ी सफलता हासिल की है. सात साल से बंद पड़े गैस कुओं से एक बार फिर उत्पादन शुरू कर दिया गया है. शुरुआती चरण में दो कुओं से रोजाना करीब 1 लाख क्यूबिक मीटर गैस का उत्पादन हो रहा है.
निदेशकों ने की शुरुआत : ओएनजीसी के निदेशक ओ.पी. सिन्हा और औरंगसु सरकार ने इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की. इस मौके पर उन्होंने कहा कि रामगढ़ गैस थर्मल पावर प्लांट (GTPP) लंबे समय से गैस की कमी से जूझ रहा था, जिसके चलते करोड़ों रुपये की चौथी इकाई शुरू नहीं हो पाई. अब इस प्लांट को पर्याप्त गैस सप्लाई मिल सकेगी.
सीमावर्ती इलाके में गैस के भंडार : जैसलमेर के बॉर्डर एरिया में प्राकृतिक गैस के प्रचुर भंडार मौजूद हैं. लेकिन कुछ साल पहले गैस के खरीदार नहीं मिलने के कारण उत्पादन रोक दिया गया था. इसके चलते कई कुएं तकनीकी खराबी की वजह से बंद हो गए थे. अब ओएनजीसी ने दोबारा खोज और उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाया है और शुरुआती सफलता मिल चुकी है.
चिन्नेवाला टिब्बा ब्लॉक से उत्पादन : निदेशक ओपी सिन्हा ने बताया कि कई चुनौतियों का सामना करने के बाद चिन्नेवाला टिब्बा ब्लॉक से गैस उत्पादन शुरू किया गया है. इस कामयाबी का श्रेय ओएनजीसी के इंजीनियरों और सहयोगी कंपनियों—गेल इंडिया, ऑयल इंडिया और आरवीवीएनएल को जाता है.
आने वाले सालों में होगा उत्पादन दोगुना : सिन्हा ने कहा कि इस क्षेत्र में और भी कई कुएं हैं जहां काम चल रहा है. अगले एक-दो साल में उत्पादन बढ़कर रोजाना ढाई लाख क्यूबिक मीटर तक पहुंचने की उम्मीद है. साथ ही, इस क्षेत्र में तेल और गैस की खोज का काम भी तेज गति से जारी है.
रामगढ़ पावर प्लांट को मिलेगी राहत : ओएनजीसी की इस उपलब्धि से रामगढ़ स्थित गैस थर्मल पावर प्लांट को बड़ी राहत मिलेगी. पहले गैस की कमी से चौथी यूनिट शुरू नहीं हो पा रही थी, लेकिन अब नई सप्लाई आने से पावर प्लांट अपनी पूरी क्षमता के अनुरूप बिजली उत्पादन कर सकेगा.
स्थानीय स्तर पर नए अवसर : गैस उत्पादन बढ़ने से स्थानीय स्तर पर भी नए रोजगार और व्यापारिक अवसर पैदा होने की संभावना है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर इसका सकारात्मक असर पड़ेगा. ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि ओएनजीसी की यह पहल देश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है. सीमावर्ती इलाकों से गैस उत्पादन बढ़ने से न केवल बिजली उत्पादन को बल मिलेगा बल्कि आयात पर निर्भरता भी घटेगी.




















