जयपुर: राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर और डिपार्टमेंट ऑफ थाई ट्रेडिशनल एंड अल्टरनेटिव मेडिसिन के मध्य आयुर्वेद एवं थाई पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए एमओयू किया गया है. इसके अंतर्गत राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान द्वारा आयुर्वेद चिकित्सा के अंतर्गत किए जा रहे कार्यक्रमों, गतिविधियों और चिकित्सा पद्धति को साझा किया जाएगा.
इसके तहत डिपार्टमेंट ऑफ थाई ट्रेडिशनल एंड अल्टरनेटिव मेडिसिन के प्रतिनिधि मंडल ने राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर का दौरा किया और चिकित्सा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों एवं गतिविधियों की जानकारी ली. राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के कुलपति प्रो संजीव शर्मा ने बताया कि भारत और थाईलैंड की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां जीवन विज्ञान पर आधारित हैं और इनकी जड़ें समान हैं. उन्होंने कहा आयुर्वेद भारत में स्थापित चिकित्सा परंपरा है, तो थाई ट्रेडिशनल मेडिसिन भी वहां की समृद्ध धरोहर है. दोनों के सिद्धांत एक-दूसरे से मिलते हैं.
थाई मेडिसिन स्टडी बनेगा: इस एमओयू के तहत शोध, फैकल्टी और विद्यार्थियों का आदान-प्रदान किया जाएगा और मिलकर नई संभावनाओं पर काम होगा. ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप का गठन किया जाएगा. दोनों संस्थाओं के विद्यार्थियों के लिए फैकल्टी द्वारा लेक्चरर की सीरीज बनाई जाएगी. दोनों देशों के फार्माकोपियल मोनोग्राफ का विश्लेषण करेंगे. साथ ही बहुत जल्दी थाई मेडिसिन स्टडी और रिसर्च के लिए राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में केंद्र स्थापित किया जाएगा. वहीं थाईलैंड में आयुर्वेद की पढ़ाई और रिसर्च के लिए केंद्र स्थापित किया जाएगा.
आयुर्वेदिक पद्धति की जानकारी ली: प्रो संजीव शर्मा ने बताया कि थाई प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान के विभिन्न विभागों को विजिट कर आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति की कार्यप्रणाली और शोध गतिविधियों को नजदीक से समझा. प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले संस्थान के ओपीडी का निरीक्षण किया. यहां उन्हें रोगियों को दी जाने वाली आयुर्वेदिक परामर्श और उपचार पद्धति दिखाई गई. इसके बाद उन्होंने पंचकर्म विभाग का दौरा किया, जहां शोधन और शमन जैसी विशिष्ट चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी ली. दल ने क्रिया शरीर विभाग की एडवांस ह्यूमन फिजियोलॉजी लैब, सेंट्रल लैब, सिम्युलेशन लैब, फार्मेसी विभाग, एनाटॉमी विभाग और ड्रग लैब का भी अवलोकन किया.




















