जयपुर : श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दूसरे दिन राजधानी जयपुर और राजसमंद जिले के नाथद्वारा में नंदोत्सव का उल्लास दिखा. छोटी काशी जयपुर के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ा. खासतौर पर आराध्य गोविंददेवजी मंदिर में रविवार सुबह से नंदोत्सव का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं की भीड़ रही. जैसे ही शृंगार आरती के बाद परंपरा अनुसार भेंट उछाली गई, मंदिर प्रांगण ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के उद्घोष से गूंज उठा. श्रद्धालुओं में उछाल लूटने की होड़ मच गई.
ठाकुरजी का विशेष शृंगार : नंदोत्सव पर ठाकुर श्री गोविंददेवजी को केसरिया रंग की नवीन पोशाक धारण कराई गई. फूलों से अलंकृत कर मनोरम शृंगार किया गया. विशेष आभूषण और अलंकार पहनाए गए. सुबह धूप झांकी खुलने के बाद वेद मंत्रोच्चार के बीच अधिवास पूजन हुआ. इसके बाद नंदोत्सव की विशेष भोग झांकी सजाई गई.
बधाई लुटाने की परंपरा : मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में फल, मिठाइयां, खिलौने, सिक्के और अन्य सामग्री अर्पित की गई. इसके बाद भक्तों के बीच इन्हें ‘बधाई’ के रूप में लुटाया गया. परंपरानुसार सबसे पहले मंदिर महंत परिवार की ओर से महिला और पुरुषों के बीच श्रीफल उछाला गया, जिसे ये सौभाग्यशाली श्रीफल मिला, उसे जगमोहन में बुलाकर सम्मानित किया. इसके बाद ठाकुरजी के समक्ष रखी भेंट सामग्री को भक्तों पर बरसाया. इस दृश्य के दौरान गरीब-अमीर, महिला-पुरुष, बच्चा-बूढ़ा हर कोई ठाकुरजी के दरबार में हाथ फैलाए खड़ा नजर आया.
चरम पर श्रद्धालुओं का उत्साह : मंदिर परिसर में जगह-जगह श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा था. कई भक्त जन्माभिषेक से ही लौटे नहीं थे और पूरी रात मंदिर प्रांगण के आसपास ठहरे रहे ताकि सुबह नंदोत्सव का प्रसाद सबसे पहले ग्रहण कर सकें. सेवादार किशनलाल ने बताया कि भगवान गोविंददेवजी के दरबार में हाजिरी लगाना हर किसी की किस्मत में नहीं होता. नंदोत्सव वो क्षण है जिसका इंतजार सालभर भक्त करते हैं. उनकी ओर से भी यहां ठाकुरजी के समक्ष बैंड की स्वर लहरियों की सेवा दी गई. भेंट उछाल का सौभाग्य पाने वाले गौरव धामाणी ने बताया कि नंदोत्सव की परंपरा वैसी ही है जैसे घर में बच्चे के जन्म पर परिवार में जश्न मनाया जाता है. यहां ठाकुरजी के जन्म के बाद भी भक्तों के बीच वही आनंद और उल्लास दिखा. दिन-ब-दिन श्रद्धालुओं के बीच नंदोत्सव का क्रेज बढ़ रहा है जबकि श्वेता ने कहा कि यहां बधाई उछाल के दौरान ऐसी कोई सामग्री नहीं है, जिसे आम व्यक्ति बाजार से खरीद नहीं सकता हो, लेकिन फिर भी भगवान के प्रसाद के लिए हर कोई हाथ फैलाए खड़ा रहता है.
भक्ति और उल्लास का संगम : नंदोत्सव के दौरान मंदिर प्रांगण में ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजों की स्वर लहरियां गूंजती रहीं. महिलाओं ने पारंपरिक लोकगीतों से वातावरण को और भक्तिमय बना दिया. मंदिर के दरवाजे पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए ताकि बड़ी संख्या में भीड़ में अव्यवस्था न हो. गोविंददेवजी मंदिर के अलावा राजधानी के अन्य प्रमुख मंदिरों गोपीनाथजी, राधा दामोदरजी, श्री कृष्ण-बलराम मंदिर, इस्कॉन टेंपल और अक्षरधाम में भी नंदोत्सव धूमधाम से मनाया गया. इन मंदिरों में भी ठाकुरजी का विशेष शृंगार कर ‘बधाई लुटाने’ की परंपरा निभाई गई.
शाम को निकलेगी शोभायात्रा : छोटी काशी में शोभायात्रा की विरासत को जीवंत रखते हुए श्री कृष्ण शोभायात्रा निकाली जाएगी. इसमें करीब 22 झांकियां, हाथी, ऊंट, घोड़े, बैल का लवाजामा, कीर्तन मंडल और बैंड शामिल होंगे. सबसे आगे प्रथम पूज्य गणपति के प्रतीक के रूप में सजे-धजे गजराज पर पंचरंगा निशान चलेगा. बैलगाड़ी पर शहनाई वादन होगा. रेगिस्तान के जहाज ऊंट और शक्ति के प्रतीक घोड़े के काफिले के बाद बैंड वादकों ने भजनों की स्वर लहरियां बिखेरेंगी. इसके बाद तिरुपति बालाजी, सिंधी पंचायत कीर्तन मंडल, श्री अक्रूर जी की झांकी, भगवान श्री राधाकृष्ण का स्वरूप, संकीर्तन मण्डल, गोसेवा की झांकी भी शोभायात्रा में रहेगी. शोभायात्रा में ठाकुर गोपीनाथजी, ठाकुर श्याम सुंदरजी, ठाकुर राधा दामोदरजी, ठाकुर विनोदीलालजी, ठाकुर राधारमणजी, ठाकुर मदनमोहनजी झांकी के साथ महाप्रभु जी, देव गोस्वामी, रूप गोस्वामी जी की झांकी भी शामिल होगी.
श्रीनाथजी मंदिर में लडाए लाडले के लाड : उधर, राजसमंद जिले के नाथद्वारा में विश्व प्रसिद्ध श्रीनाथजी मंदिर में रविवार सुबह नंदोत्सव की धूम रही. वर्षों पुरानी परंपरानुसार बड़े मुखिया ने नंदबाबा व छोटे मुखिया ने यशोदा मां का वेश धरकर लाडले लाल को खूब लाड लडाए और ठाकुरजी को रिझाने के लिए उनके समक्ष नृत्य किया. पुष्टिमार्गीय वल्लभ सम्प्रदाय की प्रधान पीठ श्रीनाथजी मंदिर में जन्माष्टमी के दूसरे दिन नंद महोत्सव धूमधाम से मनाया जाता रहा है. ग्वाल बाल कृष्ण के जन्म की खुशी में हल्दी व केसर मिश्रित दूध दही से होली खेलते हैं. भाव विभोर होकर नृत्य करते हैं. हजारों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं.
नंदोत्सव के अद्भुत दर्शन : विशाल बावा ने सभी वैष्णवों को जन्माष्टमी व नंद महोत्सव की बधाई दी व प्रभु श्रीनाथजी के मंदिर में सभी परम्पराओं का निर्वहन धूमधाम से किया गया. राजकोट से आई वैष्णव राधा बेन ने बताया कि जन्माष्टमी और नंदोत्सव के अद्भुत दर्शन किए. यहां दर्शन का आनंद अलग है. मुम्बई से आई रीमा बेन ने बताया कि यह अद्भुत ओर अलौकिक अनुभव था. यहां दर्शन कर ऐसा लगा जैसे बृज में पहुँच गए हो. भीड़ के बावजूद अच्छे से दर्शन हुए. जूनागढ़ के हिरन ने बताया कि कृष्ण जन्माष्टमी व नंदमहोत्सव का प्रबंध प्रशसनीय था. रविवार सुबह 8 बजे खुले नंदोत्सव के दर्शन करीब साढ़े दस बजे तक जारी रहे. इस दौरान हजारों दर्शनार्थियों ने दर्शनों का लाभ लिया व दूध दही से होली खेलकर कृष्ण जन्म की खुशियां मनाई.




















