बूंदी : मानसून इस बार बूंदी जिले के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ है. जिले के सभी 23 बड़े बांध लबालब हो गए हैं. लंबे समय बाद ऐसा दृश्य देखने को मिला है, जब एक साथ दो दर्जन से अधिक जलाशय ओवरफ्लो होकर छलकने लगे. जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह स्थिति पिछले कई वर्षों में पहली बार बनी है.
जून-जुलाई में ही भरे थे आधे बांध : जलसंसाधन विभाग के अधिशाषी अभियंता रोहित बघेरा ने बताया कि इस बार मानसून की शुरुआत के साथ ही इंद्रदेव ने बूंदी पर जमकर मेहरबानी की. जून और जुलाई के बीच हुई बरसात से जिले के करीब 12 बांध पहले ही भर गए थे, लेकिन अगस्त की तेज बारिश ने बाकी बचे बांधों को भी छलका दिया. अब जिले में हर ओर पानी ही पानी नजर आ रहा है.
नवलसागर से शुरू की पानी की निकासी : पूर्व पार्षद राजेश शेरगडीया ने बताया कि शहर के बीचोंबीच स्थित ऐतिहासिक नवलसागर झील में पानी की भारी आवक होने पर देर रात से निकासी शुरू कर दी गई है. निकासी के बाद मुख्य बाजार में 3 फीट पानी नजर आ रहा है. सुरक्षा की दृष्टि से दुकानें दुकानदारों ने नहीं खोली है और सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है. कई घंटों से सड़कों पर जलसैलाब का नजारा देखने को मिल रहा है.
सभी बांध छलके, बांधवार जलस्तर : जल संसाधन विभाग की सोमवार सुबह की रिपोर्ट के अनुसार जिले के सभी बड़े बांध अपनी क्षमता तक भर चुके हैं. जलसंसाधन विभाग के कनिष्ठ अभियंता राहुल कुमार ने बताया कि आमतौर पर जिले के छोटे तालाब और पोखर अगस्त के अंत या सितंबर तक भरते हैं, लेकिन इस बार जुलाई से ही पानी भरने लगा था. ग्रामीण क्षेत्रों में भी वर्षों बाद तालाब, कुएं और नदियां लबालब हैं. यह स्थिति कृषि और पेयजल दोनों दृष्टिकोण से जिले के लिए सौभाग्यपूर्ण है, लेकिन जहां बारिश ने बाढ़ का रूप लिया वहां नुकसान भी काफी हुआ है.
जिले के सबसे बड़े गुढ़ा बांध के 5 गेट खोले : जिले के सबसे बड़े गुढ़ा बांध में भारी पानी की आवक को देखते हुए सोमवार सुबह गुढ़ा बांध के 3 गेट 5 फीट खोले गए. गुढ़ा बांध के कनिष्ठ अभियंता प्रदीप कुमार ने बताया कि बांध के 5 गेटों से 14,490 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है. वर्तमान में बांध अपनी क्षमता के अनुरूप भर चुका है. इससे पूर्व भी पिछले दिनों बांध से पानी की निकासी की गई थी.




















