जोधपुर: राज्य सरकार की ओर से प्रमुख खाद्य सामग्री और रोजमर्रा की वस्तुओं पर 0.50 पैसा प्रति सैकड़ा यूजर चार्ज (उपभोक्ता प्रभार) लगाने के विरोध में मंडोर कृषि उपज मंडी के व्यापारियों का विरोध जारी है. चार दिन से मंडी बंद है. व्यापारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है. इससे हर दिन 80 से 100 करोड़ का व्यापार प्रभावित हो रहा है. सोमवार को मंडी से जुड़े सभी वर्गों ने यूजर चार्ज के विरोध में रैली निकाली और सरकार के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन दिया.
मंडोर मंडी खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के सचिव धर्मेन्द्र भंडारी ने बताया कि मंडी यार्ड में व्यापारियों पर शुल्क अथवा कर तथा मंडी यार्ड से बाहरी व्यापारी पर वही शुल्क अथवा कर नहीं लगाया जाना मंडी में व्यापार को हानि पहुंचाता है. मंडी में व्यापारियों को व्यापार स्थानांतरित करने के लिए पूर्व में बाध्य किया गया था. अनिश्चितकालीन हड़ताल से व्यापार प्रभावित हो रहा है. सरकार को मंडी शुल्क के रूप में प्राप्त करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है.
घी-तेल व्यापारियों ने किया विरोध: खाद्य तेल व देसी घी व्यापार संस्थान जोधपुर के अध्यक्ष चंपालाल धारीवाल ने बताया कि एक तरफ प्रधानमंत्री खाने की वस्तुओं पर जीएसटी दरें घटाकर आमजन को राहत की घोषणा कर रहे हैं, वहीं प्रदेश सरकार नया टैक्स लगाकर आमजन को महंगाई का तोहफा दे रही है और व्यापारियों को परेशानी में डाल रही है. संस्थान उपाध्यक्ष कैलाश पुंगलिया ने बताया कि इस टैक्स से अधिकांश कृषि जिन्स का व्यापार मंडी यार्ड से बाहर चला गया तो सरकार का राजस्व प्राप्ति का आंकलन विफल हो जाएगा और प्रशासानिक खर्च बढ़ जाएंगे.
मॉल्स को बढ़ावा देने की कोशिश: व्यापारियों का कहना है कि राज्य सरकार बड़े मॉल्स और मल्टीनेशनल कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए सिर्फ मंडी व्यापारियों पर टैक्स का बोझ डाल रही है. सिर्फ मंडी व्यापारियों पर यूजर चार्ज की दर प्रति 100 रुपए पर 0.50 पैसे लगाया है, जो निंदनीय है. इस खर्च से महंगाई कम नहीं होगी. उल्टा आमजन के लिए दुविधा पैदा होगी. छोटे किसान और व्यापारियों को नुकसान हो सकता है. मंडी का मार्जिन 0.50 प्रतिशत से भी कम है. ऐसे में 0.5 प्रतिशत यानी 100 रुपए पर 50 पैसे टैक्स के चुकाएंगे तो मजदूर, कर्मचारी सहित अन्य खचों का मैनेजमेंट कैसे होगा?
बाहर महंगी खाद्य सामग्री लेने को मजबूर: इन दिनों शहर में बड़ी संख्या में रामदेवरा के मेलार्थी आ रहे हैं. मंडी बंद होने से जातरुओं के लिए लगने वाले भंडारों पर असर पड़ रहा है. समाज की संस्थाओं को मजबूर होकर बाहर के व्यापारियों से माल खरीदना पड़ रहा है, जो महंगा मिल रहा है. व्यापारियों ने बताया कि आटे का कट्टा मंडी परिसर में 800 रुपए में उपलब्ध है, लेकिन बाहर 1200 रुपए में खरीदना पड़ रहा है.




















