अजमेर : भारत की प्राचीन कला में जादू भी शामिल है. यही कला भारत से निकलकर विदेशों तक पहुंची. लेकिन अब जादू की कला भारत में अपने अस्तित्व को खो रही है. दरअसल किसी भी कला को राजकीय संरक्षण और प्रोत्साहन नही मिलता तब तक वह कला फल फूल नही पाती है. ऐसा ही कुछ अब सोशल मीडिया के जमाने में जादू की कला के साथ भी हो रहा है.
सरकार से कोई संरक्षण या मदद जादूगरों को नहीं मिल पा रही है, ऐसे में जादू की कला को जीवंत रखना जादूगरों के लिए अब मुश्किल हो गया है. यही वजह है कि राजस्थान के जादूगर अब एक जाजम पर आकर अपनी समस्या के लिए पहली बार अजमेर में जुटे. राजस्थान की राजनीति के जादूगर कहे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी जादूगरों के बीच आए और उनका हौसला बढ़ाया. ईटीवी भारत ने राजस्थान के जादूगरों से बातचीत की तो उनका दर्द सामने आ गया. अजमेर में मैजिशियन फेस्टिवल के नाम से हुए कार्यक्रम का मकसद प्रदेश के जादूगरों को एक जाजम पर लाना था लेकिन वास्तविकता में जादूगरों की समस्या को सरकार तक पहुंचाना भी था.
राजस्थान में ऐसे कई नामचीन जादूगर है जिन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन विदेशी धरती पर किया. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. जादू की कला से रोजगार पाना भी काफी मुश्किल हो गया है. ईटीवी भारत ने अजमेर में आए प्रदेश भर के जादूगरों के प्रतिनिधियों से जादू की कला और जादूगरों की समस्या के बारे में बातचीत की. राजस्थान मैजिशियन एसोसिएशन के अध्यक्ष जादूगर हेरती बताते हैं कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई लोगों ने जादू के नाम से ठग विद्या शुरू कर दी है. उन्होंने कहा कि जादू एक शुद्ध कला है जो अभ्यास पर निर्भर है. जितना अधिक प्रयास उतना ही अधिक महारथ जादू में हासिल होती है. सभी जादूगर चाहते हैं कि जादू की कला को ललित कला में शामिल किया जाए.
राजेंद्र शर्मा उर्फ जूनियर मायावी प्रसिद्ध जादूगर मायावी के पुत्र हैं. पिता के बाद उनकी विरासत को जूनियर मायावी आगे बढ़ा रहे हैं. साथ ही चुनौती के इस दौर में जादू की कला को जीवंत रखने का प्रयास भी कर रहे हैं. जूनियर मायावी बताते हैं कि जादू के लिए यह काफी चुनौती का दौर है और जादू की कला को बचाने के लिए जादूगर संघर्ष कर रहे हैं. यही वजह है कि वर्षों के बाद फिर से सभी जादूगरों को एक जाजम पर संगठित किया गया है. यही कारण है कि अजमेर में पहली बार जादूगर फेस्टिवल रखा गया है. उन्होंने कहा कि सभी ने मिलकर संवाद किया है और जादू की कला को आगे बढाने में आ रही समस्या के बारे में चर्चा की है.
राजकीय संरक्षण की दरकार : जूनियर मायावी बताते हैं कि कोई भी कला राजकीय प्रोत्साहन और संरक्षण के बिना फल फूल नहीं सकती है. उन्होंने बताया कि जादू थिएटर बेस है. जादू की कला के प्रदर्शन के लिए अस्थाई तौर पर प्रशासन से लाइसेंस लेना पड़ता है जिसकी प्रक्रिया काफी जटिल होती है. किराए पर जगह लेने से लेकर मंच तैयार करने तक सारा खर्च हो जाता है और उसके बाद प्रशासन से स्वीकृति नहीं मिल पाती है जिससे जादूगरों को काफी नुकसान होता है. इसलिए लाइसेंस प्रणाली सरल होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जादू कला बोर्ड बनाए. वहीं जादू के प्रदर्शन को उद्यम के रूप में माना जाए. वर्तमान में जमीन के भाव काफी महंगे हैं. शो के लिए समान जादूगर के पास होते हैं उन सामान को रखने के लिए गोदाम खरीदने के लिए पैसा जादूगरों के पास नहीं होता है. ऐसे में यदि किसी जादूगर की मृत्यु हो जाती है तो उसका सारा सामान बर्बाद हो जाता है. ऐसे में सरकार को चाहिए कि जिस जादूगर की मृत्यु हुई है उसका सामान एक प्रकार की लाइब्रेरी में रखवा दे ताकि उस समान का आगे भी उपयोग हो सके.
जादू कला से जुड़े पढ़े लिखे लोग : जादूगर प्रशांत बताते हैं कि जादू कला के क्षेत्र में पढ़े-लिखे लोग कम आ रहे हैं. हालांकि जादू की कला में डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य प्रोफेशन से जुड़े लोग भी रुचि रखते हैं जिनको संगठन साथ जोड़ा गया है. उन्होंने बताया कि कुछ लोग बाबा बैंक जादू दिखा कर लोगों में चमत्कार की धारणा बनाते है और उनसे ठगी करते हैं. जो कि हम चाहते हैं कि जादू की कला से पढ़े-लिखे लोग जुड़े ताकि वह जादू की कला को आगे बढ़ाने के साथ-साथ समाज में व्याप्त अंधविश्वास के प्रति लोगों को जागरुक भी करें. जादूगर अपने शो के माध्यम से समाज में जागरूकता भी ला सकता है.
जादू की कला वह सीखे जो इसे आगे बढ़ा सके : जादूगर सुब्रतो मुखर्जी बंगाल के मूल निवासी है लेकिन वर्षों से जयपुर में रह रहे हैं. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का जमाना है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के जादूगरों के शो और उनकी कला को लोग सोशल मीडिया पर देखते हैं. इसमें कई नौसीखिए जादूगर हैं जो सोशल मीडिया पर जादू की ट्रिक्स को रिवील कर रहे है. यदि जादू को ठीक से सिखाया जाए और कला के रूप में लिया जाए तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की ख्याति और भी बढ़ सकती है जो पहले थी. उन लोगों को ही जादू की कला सिखानी चाहिए जो इस कला को आगे बढ़ाने का जज्बा रखते हैं.
जादूगर अनिल कुमार शर्मा बताते हैं कि कला को संरक्षण की हमेशा से दरकार रहती है. राजा महाराजाओं के जमाने में वह कला को संरक्षण दिया करते थे. इसी तरह से सरकारों को जादू को कला मानकर उसका संरक्षण करना चाहिए. तभी जादू की कला आगे बढ़ पाएगी और नए लोग की इससे जुड़ पाएंगे. जादूगरों का हौसला बढ़ाने के लिए राजस्थान की राजनीति के जादूगर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी जादूगर उत्सव में हुए शामिल.
जादूगरों का एक जाजम पर लाने का उद्देश्य :-
- छोटे बड़े सभी जादूगरों को एक जाजम पर लाना
- जादूगरों की समस्या को शासन और प्रशासन तक पहचाना
- जादू को कला मानना और जादूगर कला बोर्ड की स्थापना की मांग सरकार के समक्ष रखना।
- जादू कला अकादमी और जादू कला को पाठ्यक्रम में शामिल करवाने की मांग रखना।
- पुराने और नए जादूगरों के बीच संवाद और सामंजस्य स्थापित करना।
- राजकीय कोष से जादू भवन की स्थापना के लिए सरकार से मांग करना।
- जादूगरों को अपनी कला के प्रदर्शन के लिए राजकीय भवन कम से कम किराएदार पर उपलब्ध होने की मांग।
- जादूगरो को भी सरकार की योजनाओं का लाभ दिलवाना।




















