बाड़मेर : राजस्थान के बाड़मेर पुलिस ने वाहन चोरी के झूठे मुकदमे दर्ज करा के बीमा कंपनियों से फर्जी तरीके से क्लेम उठाने के मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने मास्टरमाइंड एक आरोपी को गिरफ्तार करने की सफलता हासिल की है. आरोपी ने अपने और साथियों के खाते में फर्जी तरीके से 20 करोड़ रुपए बीमा कंपनियों से उठा चुका है. बाड़मेर एसपी नरेंद्र सिंह मीणा ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उक्त मामले का खुलासा किया. पुलिस इस मामले में डीटीओ और एएसआई की भूमिका संदिग्ध मान रही है.
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बाड़मेर पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सिंह मीणा ने बताया कि बड़े वाहनों के चोरी की झूठी रिपोर्ट दर्ज करवरकर फर्जी तरीके से बीमा क्लेम उठाने के मामले में जिले के गुड़ामालानी थाने में एक मामला दर्ज हुआ. इस मामले में आरोपी सताराम ने अब तक विभिन्न थानों में 12 मामले दर्ज करवाए थे. जिनमें उसने बीमा कंपनियों से करोड़ों रुपये का क्लेम उठाया था. प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी ने 20 करोड़ रुपये से अधिक की क्लेम राशि स्वयं और अपने साथियों के खातों में ले चुका है.
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एसपी नरेंद्र सिंह ने बताया कि परिवहन विभाग के कर्मचारी की भी संदिग्ध भूमिका बताई जा रही है. पुलिस इन सभी की भूमिका की जांच कर रही है. पुलिस के अनुसार आरोपी विदेश भागने की फिराक में था. लेकिन पुलिस ने उसे जयपुर के वीजा ऑफिस से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने बताया कि आरोपी पिछले 9 महीनों में पचपदरा थाने में तीन चोरी के मामले दर्ज करवा चुका था. आरोपी अरुणाचल प्रदेश में वाहनों का नया रजिस्ट्रेशन करवाकर उन्हें दोबारा कंपनियों में लगा देता था. पुलिस ने ऐसे तीन वाहनों को जब्त कर लिया है. पुलिस आरोपी की संपत्ति की जांच के लिए ईडी और आयकर विभाग को भी कार्रवाई के लिए लिखेगी. इसके अलावा पुलिस ने जोधपुर रेंज में बीते 10 सालों में वाहन चोरी के दर्ज मामलों की सूचना मांगी है ताकि इस गिरोह द्वारा किए गए अन्य अपराधों का पता लगाया जा सके. फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है.
एसपी नरेंद्र सिंह मीणा ने बताया कि सताराम अपने नाम या परिचितों के नाम पर महंगे ट्रक और ट्रेलर खरीदता था. इसके बाद गुड़ामालानी, बायतू, पचपदरा, जसोल, सिणधरी, आसोप, सेन्दड़ा और जैतारण सहित कई थानों में वाहन चोरी की झूठी रिपोर्ट दर्ज करवा देता था. इन रिपोर्टों के आधार पर बीमा कंपनियों से करोड़ों रुपए का क्लेम उठाया जाता था. पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि चोरी दिखाए गए वाहनों का अरुणाचल प्रदेश में नया रजिस्ट्रेशन करवाकर नए नंबर प्लेट के साथ तेल कंपनियों में किराए पर चलाया जाता था. यह गिरोह राजस्थान के अलावा दिल्ली और गुजरात में भी सक्रिय था.




















