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नाराजगी दूर करने की कवायद, सांसद-विधायकों से सीएम कर रहे वन-टू-वन संवाद

जयपुर: विधानसभा सत्र से पहले सीएम भजनलाल शर्मा भाजपा विधायक, सांसद और विधायक-सांसद प्रत्याशी रहे नेताओं से संवाद कर रहे हैं. सोमवार और मंगलवार को पूरे दिन सीएम का संवाद कार्यक्रम चलेगा. सभी सांसद और विधायकों को लोकसभावार सीएमआर में बुलाया गया है. माना जा रहा है कि सांसदों और विधायकों की नाराजगी के केंद्रीय नेतृत्व से मिले निर्देश के बाद ये संवाद कार्यक्रम रखा गया है. सीएम कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार इस संवाद में विकसित राजस्थान 2047 के संकल्प पर चर्चा होगी. इसमें भाजपा के जिलाध्यक्ष भी शामिल हैं.

विकसित राजस्थान-2047 के संकल्प पर संवाद : विभिन्न सत्रों में आयोजित संवाद के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा राज्य सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं एवं नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन, आमजन तक राजकीय योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने और बजट घोषणाओं की क्रियान्विति और प्रगति पर संवाद कर रहे हैं. साथ ही, आगामी विधानसभा सत्र, प्रस्तावित खेलो इंडिया गेम्स और आगामी दिसंबर में प्रस्तावित राइजिंग-राजस्थान पार्टनरशिप कॉन्क्लेव की तैयारियों के संबंध में भी गहन चर्चा हो रही है.

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इन बिन्दुओं पर फोकस :

  • राज्य सरकार की दो बजट घोषणाओं की जमीनी स्तर पर प्रोग्रेस.
  • जनप्रतिनिधियों से क्षेत्र से सम्बंधित काम काज पर चर्चा.
  • विकसित राजस्थान-2047 के संकल्प पर संवाद.
  • कामकाज की स्थिति मंत्रियों और उनके विभागों के.
  • जिलों में विकास को लेकर नई मांग.
  • जिलों में अधिकारियों का रवैया कैसा.
  • पंचायत और निकाय चुनाव पर चर्चा.
  • संगठन और सत्ता में समन्वय.
  • लोक कल्याणकारी योजनाओं एवं नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन.

मंत्रियों की कार्यशैली पर आ सकती नाराजगी : संवाद में मंत्रियों की कार्यशैली को लेकर भी विधायक नाराजगी जाहिर कर सकते हैं. इससे पहले भी जब प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने विधायकों और सांसदों के साथ प्रत्याशियों से जब संवाद किया था तो कई विधायकों ने इस बात की नाराजगी बताई थी कि सरकार में उनके कामकाज की सुनवाई नहीं हो रही है. अधिकारी उनकी बात को तवज्जो नहीं दे रहे हैं. माना जा रहा है कि आज की बैठक में विधायकों की नाराजगी को दूर करने पर काम किया जा सकता है. केंद्रीय नेतृत्व ने समन्वय के साथ काम करने के निर्देश पिछले दिनों सत्ता और संगठन को दिए हैं.

संगठनात्मक विषयों पर भी होगा मंथन : इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री भाजपा के संगठनात्मक विषयों पर भी विस्तृत चर्चा होगी. पूर्ववर्ती कांग्रेस और वर्तमान भाजपा सरकार की तुलनात्मक विवेचना और गांव-ढाणी से लेकर कस्बों तक भाजपा के संगठन को और सशक्त करने जैसे प्रमुख बिन्दु इस संवाद में शामिल किए गए है. प्रथम सत्र में कोटा सांसद एवं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, झालावाड-बारां सांसद दुष्यन्त सिंह, टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा प्रत्याशी सुखवीर सिंह जौनपुरिया, भरतपुर लोकसभा प्रत्याशी रामस्वरूप कोली और करौली-धौलपुर लोकसभा प्रत्याशी इन्दू देवी के साथ संवाद कर रहे हैं. दूसरे सत्र में मुख्यमंत्री उदयपुर सांसद मन्ना लाल रावत, राजसमन्द सांसद महिमा कुमारी मेवाड़, चित्तोड़गढ़ सांसद सी.पी. जोशी, भीलवाड़ा सांसद दामोदर अग्रवाल और बांसवाड़ा लोकसभा प्रत्याशी महेन्द्रजीत सिंह मालवीया से चर्चा करेंगे.

मंगलवार (26 अगस्त) को मुख्यमंत्री पहले सत्र में बीकानेर सांसद अर्जुनराम मेघवाल, श्रीगंगानगर प्रत्याशी प्रियंका बालन मेघवाल, झुन्झूनू प्रत्याशी शुभकरण चौधरी, सीकर प्रत्याशी सुमेदानन्द सरस्वती और चूरू प्रत्याशी देवेन्द्र झाझड़िया से संवाद करेंगे. दूसरे सत्र में जोधपुर सांसद गजेन्द्र सिंह शेखावत, जालोर-सिरोही सांसद लुम्बाराम, पाली सांसद पी.पी. चौधरी, नागौर प्रत्याशी ज्योति मिर्धा और बाड़मेर प्रत्याशी कैलाश चौधरी के साथ चर्चा करेंगे. तीसरे सत्र में मुख्यमंत्री की जयपुर शहर सांसद मंजू शर्मा, जयपुर ग्रामीण सांसद राव राजेन्द्र सिंह, अलवर सांसद भूपेन्द्र यादव, अजमेर सांसद भागीरथ चौधरी और दौसा प्रत्याशी कन्हैया लाल मीणा के साथ चर्चा होगी.

विधानसभा सत्र को लेकर चर्चा : विधानसभा सत्र से पहले ही रहे संवाद कार्यक्रम को मंत्रियों के कामकाज का आंकलन और फीडबैक लिया जाएगा. मंत्रियों, अधिकारियों के प्रति विधायकों, सांसदों की नाराजगी से भी जोड़कर देखा जा रहा है. बजट सत्र के दौरान कई भाजपा विधायकों ने सदन में मंत्रियों को घेर लिया था और सार्वजनिक तौर पर मंत्रियों की सदन में तैयारी और अधिकारियों की ओर से गलत जवाब देने का मुद्दा उठाया था. इस पर विपक्षी विधायक भी हावी हो गए थे. ऊर्जा विभाग, यूडीएच, जेडीए में मंत्री और अधिकारियों की ओर से जनप्रतिनिधियों की सुनवाई नहीं होने की शिकायत है. कई विधायक सार्वजनिक मंचों और कई पार्टी स्तर पर मंत्रियों की ओर से सुनवाई नहीं होने की बात कह चुके हैं.

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