अजमेर: सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे मामले में शनिवार को कोर्ट में सुनवाई हुई. प्रकरण में 2 पक्षकारों की ओर से कोर्ट में पूर्व में पेश किए गए नियम 10 के तहत प्रार्थना पत्र पर बहस हुई. दोनों पक्षकारों का प्रार्थना पत्र में कहना था कि परिवादी ने केंद्र और राज्य सरकार को पक्षकार नहीं बनाया है. जबकि विभागों को पक्षकार बनाया है. कोर्ट में दोनों पक्षों की ओर से बहस हुई. कोर्ट ने 3:30 बजे बाद फिर से सुनवाई रखी है.
पारिवादी पक्ष की ओर से वकील संदीप कुमार ने बताया कि ऐसा कोई नियम नहीं है जिसके तहत विभागों को पक्षकार नहीं बनाया जा सकता. पक्षकारों ने अनुतोष कोर्ट से मांगे हैं. दोनों ही नियम 7/10 के तहत नहीं आते हैं. कोर्ट में पक्षकार धारा 79 और 80 की बात कर रहे हैं, तो इसका प्रार्थना पत्र भी अलग होना चाहिए था. उन्होंने बताया कि कोर्ट ने सुनवाई के लिए आज और भी समय दिया है. जिसमें कोर्ट देखेगा कि किसी तरह का कोई स्टे तो नहीं है.
उन्होंने बताया कि इसके बाद कोर्ट तय करेगा कि प्रार्थना पत्र सरकारी है या इसे खारिज कर देना चाहिए. वकील संदीप कुमार ने बताया कि धारा 1/10 तहत पक्षकार बनने के लिए लगाई गई अर्जियों पर सुनवाई नहीं हुई है. उन्होंने बताया कि कोर्ट में दरगाह कमेटी की ओर से पूर्व में धारा 7/11 के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर वाद को खारिज करने की मांग की गई थी. जिस पर परिवादी पक्ष को पूर्व में नोटिस दिया गया था. जिस पर परिवारी पक्ष की ओर से कोर्ट में जवाब पूर्व में पेश हो चुका है. यदि कोर्ट को समय मिलता है, तो इस पर भी सुनवाई की जा सकती है.
यह है मामला: दरगाह में शिव मंदिर होने का दावा परिवादी विष्णु गुप्ता की ओर से सितंबर 2024 में अजमेर की सिविल कोर्ट संख्या प्रथम में पेश किया था. विष्णु गुप्ता ने परिवाद में दरगाह कमेटी ख्वाजा गरीब नवाज, केंद्रीय अल्पसंख्यक विभाग और भारतीय पुरातत्व विभाग को पक्ष कर बनाया था. इस प्रकरण में पक्षकार बनने के लिए एक दर्जन से अधिक संस्थाओं और लोगों ने कोर्ट में धारा 1/10 के अंतर्गत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था. वहीं पुरातत्व विभाग और अल्पसंख्यक विभाग की ओर से कोर्ट में पूर्व में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था. जिसमें उन्होंने कहा था कि यह प्रकरण कोर्ट में चलने योग्य नहीं है. परिवादी ने इस प्रकरण में सरकार को पक्षकार नहीं बनाया है. शनिवार को दो पक्षकारों की ओर से किसी प्रार्थना पत्र को लेकर दोनों पक्षों में बहस हुई जिस पर 3:30 बजे बाद सुनवाई रखी गई है.




















