जयपुर: राजधानी जयपुर के गया प्रसाद अपनी अनूठी कलाकारी के लिए कई रिकॉर्ड बना चुके हैं. उनके निर्माण में बारीकी और तकनीकी कौशल का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में जन्मे गया प्रसाद अग्रवाल (मंगल) ने बचपन में आर्थिक संघर्ष झेला. वो महज 8वीं तक ही शिक्षा प्राप्त कर पाए, लेकिन विज्ञान और तकनीकी के प्रति जुनून ने उन्हें ऐसे मुकाम पर पहुंचा दिया कि आज उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स जैसी कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय उपलब्धियों में दर्ज है.
चैलेंज से जन्मी ‘माइक्रो मशीनरी’ की कहानी : गया प्रसाद अग्रवाल दुनिया की सबसे छोटी और काम करने वाली मशीनें बनाने के लिए जाने जाते हैं. गया प्रसाद बताते हैं कि एक बार किसी अपने ने उन्हें माइक्रो मशीन बनाने की चुनौती दी. इस चुनौती को उन्होंने पूरे जोश से स्वीकार किया और सूक्ष्म तकनीक की दुनिया में कदम रखा. उनका मानना है कि आज देश को माइक्रो मशीनरी की सबसे ज्यादा जरूरत है. भारत का युवा अगर इसकी बारीकियां समझे तो हमारा देश चीन और जापान जैसे देशों से भी आगे जा सकता है.
दिखने में छोटे इनोवेशन, लेकिन दिलाया बड़ा मुकाम :
- 8.40 एमएम की ड्रिल मशीन:ये इतनी छोटी है कि उंगली पर रखकर भी चलाई जा सकती है. इस ड्रिल मशीन को बनाते हुए उन्होंने न्यूजीलैंड का रिकॉर्ड तोड़ा. इसे 2017 में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया.
- 10.15 एमएम का मार्बल कटर :दुनिया का सबसे छोटा धातु प्लास्टिक और अन्य सामान से निर्मित मार्बल कटर. ये रिकॉर्ड भी पहले न्यूजीलैंड के नाम था, जिसे 2019 में मंगल ने भारत के नाम किया.
- दुनिया की सबसे छोटी वाशिंग मशीन (60.61 एमएम):धातु और प्लास्टिक से बनी ये सेमी-ऑटोमैटिक मशीन छोटे कपड़े धोने और सुखाने में सक्षम है. इस पर 2018 में गिनीज रिकॉर्ड मिला. ये रिकॉर्ड पहले चीन के नाम था.
इसके अलावा सबसे छोटी फोल्डिंग कुर्सी, सूत कातने वाला चरखा, डाइनिंग टेबल, टॉर्च वाली ड्रिल मशीन, चलने वाला टेबल फैन, हुक्का, 8 फीट तक गोला दागने वाली छोटी तोप, पेन्सिल की लीड पर ताजमहल की लघु प्रतिकृति (जिसमें लाइट भी जलती है) और मूंग की दाल पर शतरंज का खेल भी गया प्रसाद के इनोवेशन में शामिल हैं. गया प्रसाद ने बताया कि उन्होंने अब तक जो भी रिकॉर्ड ब्रेक किए हैं वो सभी दूसरे देशों के हैं.
सूक्ष्म लेखन में भी बेजोड़ : मंगल का हुनर केवल मशीन बनाने तक सीमित नहीं हैं. उन्होंने चावल, सरसों के दाने और सिलाई के बारीक धागे पर नाम लिखने जैसी अद्भुत कला भी विकसित की. राजस्थान के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सांसदों और कई सामाजिक हस्तियों के नाम उन्होंने धागे पर लिखकर भेंट किए हैं. उनका सपना है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बालों पर श्लोक और मंत्र लिखकर भेंट करें. उनका मकसद है कि सूक्ष्म लेखन और प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण का ये अनोखा कौशल नई पीढ़ी तक पहुंचे. इसके लिए वो खुद स्कूलों और दूसरे शिक्षण संस्थानों तक पहुंचते हैं.
सम्मान भी मिला और पहचान भी : गया प्रसाद अग्रवाल की उपलब्धियों को कई स्तर पर मान्यता मिली. उनके नाम एक नहीं, दो नहीं बल्कि तीन-तीन गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड हैं. इसके अलावा लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बेस्ट इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में उनका नाम दर्ज है. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, सांसद रामचरण बोहरा समेत कई नेताओं और समाजसेवियों ने उन्हें सम्मानित किया. अनेक सामाजिक संस्थाओं ने भी उनके योगदान की सराहना की.
यही सोच उन्हें नई मशीनें बनाने की देती है प्रेरणा : गया प्रसाद ने बताया कि उनका बचपन गरीबी और जिम्मेदारियों में बीता. आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई आठवीं तक ही कर पाए. मजबूरी में मेहनतकश काम किए, लेकिन दिल में उड़ान भरने का सपना और विज्ञान के प्रति लगन कभी नहीं टूटी. उन्होंने कहा कि अगर भारत को वास्तव में आत्मनिर्भर विश्वगुरु बनना है, तो जय जवान-जय किसान के साथ जय विज्ञान को भी समझना होगा. आने वाला युग सूक्ष्म तकनीकी विज्ञान का है. छोटे उपकरणों पर काम करना ही भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है और विज्ञान का असली लाभ तभी है जब वो आने वाली पीढ़ी तक पहुंचे. इसी सोच के तहत वे स्कूलों में जाकर बच्चों को नि:शुल्क माइक्रो मशीनरी की ट्रेनिंग देते हैं. उनका मानना है कि अगर एक बच्चा भी ये हुनर सीख गया तो वो मानेंगे कि उन्होंने बहुत कुछ हासिल कर लिया.
बहरहाल, गया प्रसाद अग्रवाल का जीवन संघर्ष, लगन और नवाचार की मिसाल है. उन्होंने साबित कर दिया कि शिक्षा या संसाधनों की कमी से सपनों की उड़ान नहीं रुकती. आज वे भारत को विज्ञान और सूक्ष्म तकनीक के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने वाले उन चुनिंदा लोगों में शामिल हैं, जो न केवल रिकॉर्ड बनाते हैं, बल्कि देश को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का सपना भी देखते हैं.




















