जयपुर : प्रदेश में रविवार रात 9:57 बजे साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण शुरू हुआ. ये पूर्ण चंद्र ग्रहण यानी ब्लड मून रहा, जिसका नजारा पूरे प्रदेश से साफ दिखाई दिया. जयपुर के शास्त्री नगर स्थित साइंस पार्क में टेलीस्कोप और दूरबीनों से चंद्र ग्रहण दिखाने की विशेष व्यवस्था की गई. ऐसे में इस खगोलीय घटना को देखने के लिए जयपुरवासी यहां मौजूद रहे. वहीं, सूतक काल में जयपुर के आराध्य गोविंद देव जी मंदिर में ठाकुर जी के पट खुले रहे. इस दौरान श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में ही मौजूद रहकर संकीर्तन भी किया.
चंद्र ग्रहण को खुली आंखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित है. इसके लिए किसी भी तरह के चश्मे या फिल्टर की आवश्यकता नहीं पड़ती. जयपुर वासियों ने रविवार रात ये अनुभव भी किया और इस खगोलीय घटना को करीब से देखने के लिए दूरबीन और टेलीस्कोप का सहारा लिया. इस दौरान मौजूद रहे खगोल शास्त्री गोविंद दाधीच ने बताया कि जो लोग सो रहे हैं, वो इस अद्भुत घटना को साक्षात नहीं देख पाएंगे. जो इसको देख रहे हैं, पूरी जिंदगी इसका इमेज उनके जहन में रहेगा. ये देखने के बाद एक याद रहेगी कि पृथ्वी की छाया किस तरह चंद्रमा पर आ जाती है.
82 मिनट पूरी तरह लाल रहा चंद्रमा : खगोल शास्त्री ने बताया कि रात 11 बजे से 12:22 बजे तक चांद पूरी तरह लाल रहा. यहां टेलीस्कोप लगाया गया है ताकि आम व्यक्ति इस खगोलीय घटना को देखकर महसूस कर सके. इस प्रोग्राम को ऑर्गेनाइज करने पर साइंस एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के अधिकारियों को धन्यवाद देते हुए उन्होंने बताया कि इस दौरान पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आकर उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ी, जिससे वो लाल-नारंगी रंग का दिखा. इसी रूप को ब्लड मून कहा जाता है.
क्या होता है चंद्र ग्रहण? : खगोलीय विज्ञान के अनुसार, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं, तब सूर्य की रोशनी सीधे चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती. पृथ्वी की छाया उस पर पड़ती है और चंद्र ग्रहण घटित होता है. ये केवल पूर्णिमा के दिन ही संभव है. जयपुर एस्ट्रोनॉमी सोसाइटी अध्यक्ष कीर्ति वैष्णव ने बताया कि पूर्णिमा ही वो समय है जब सूर्य, धरती और चंद्रमा एक सीध में आते हैं. लाइन ब्लॉक होती है, तभी शैडो बनती है, क्योंकि चंद्रमा का ऑर्बिट झुका हुआ है, इसलिए बहुत कम बार ऐसा होता है कि एकदम सीध में सूर्य, धरती और चंद्रमा आए. ये कभी थोड़ा ऊपर तो कभी थोड़ा नीचे रहता है, जिस वजह से पूरी शैडो नहीं बन पाती, इसलिए वो आंशिक चंद्र ग्रहण कहलाता है.
धार्मिक मान्यता और मंदिर परंपरा : ग्रहण से पहले सूतक काल दोपहर 12:57 बजे से ही लग गया था. परंपरा के अनुसार इस अवधि में मंदिरों के पट बंद रहते हैं और पूजा-अर्चना रोक दी जाती है. हालांकि, जयपुर के श्रीगोविंददेवजी मंदिर में ठाकुर जी के पट खुले रहते हैं. मंदिर प्रशासन ने बताया कि यहां चंद्र ग्रहण के दौरान पट खुले रहे और श्रद्धालु विशेष दर्शन कर सके. ठाकुर श्रीजी के दर्शन रात 9:50 बजे से मध्यरात्रि 1:30 बजे तक किए गए. दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं ने हरिनाम संकीर्तन किया. ग्रहण समाप्त होने के बाद गंगाजल से मंदिर शुद्धिकरण, ठाकुर जी का पंचामृत अभिषेक, शृंगार और आरती की गई.




















