धौलपुर: कैचमेंट एरिया में लगातार जोरदार बारिश के चलते रविवार तड़के पार्वती बांध के चार गेट खोल दिए गए. चारों गेट दो-दो फीट खोलकर करीब 4500 क्यूसेक पानी पार्वती नदी में छोड़ा गया. पानी छोड़ने से बसेड़ी, सैंपऊ, धौलपुर एवं राजाखेड़ा उपखंड के कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कटने की आशंका है. इसे देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट है. जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता पपेंद्र मीणा ने बताया कि बीते दो दिन से करौली और डांग क्षेत्र सहित कैचमेंट एरिया में भारी बारिश हो रही है. पार्वती बांध की भराव क्षमता 223.41 मीटर है, जबकि रविवार सुबह तक गेज लेवल 223.30 मीटर पहुंच गया. गेज नियंत्रित रखने के लिए चार गेट खोले.
उन्होंने बताया कि पार्वती नदी में बढ़े जलस्तर से कई सड़कों पर पानी की चादर चल सकती है. तटीय क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित जगह रहने की हिदायत दी है. प्रशासन ने पटवारी, गिरदावर और सरपंचों को स्थिति पर नजर रखने को कहा. इस बरसात में जिले में औसतन 122 प्रतिशत वर्षा दर्ज की जा चुकी है. उधर, पूर्वी राजस्थान में मानसून लगातार सक्रिय है. मौसम विभाग ने 2 सितंबर तक मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की.
जिले के बांध लबालब : पार्वती बांध, उर्मिला सागर, तालाबशाही और अन्य बांध लबालब हो गए. नदियां, तालाब और पोखर उफान पर हैं. भारी बारिश से धौलपुर शहर की करीब दो दर्जन कॉलोनियों में जलभराव हो गया. जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया.
फसलें चौपट : इस बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को हुआ. खरीफ की बाजरा, दलहन, तिलहन, ग्वार, ज्वार, मूंग, मोठ, मसूर, मूंगफली और गन्ने की फसलें बर्बाद हो चुकी है. चारा खराब होने से पशुपालन पर भी संकट आ सकता है.
किसानों की चिंता : किसानों का कहना है कि खरीफ फसलें पूरी तरह चौपट हो गई. अब रबी की बुवाई पर भी खतरा है. खेतों में जलभराव इतना है कि पानी जल्दी सूखने की संभावना नहीं दिख रही. सामान्यतः 15 सितंबर से सरसों की बुवाई शुरू हो जाती है. इसके बाद नगदी फसल आलू की बुवाई का समय आता है, लेकिन इस बार खेतों में बने हालात के कारण अगले दो महीने तक भी बुवाई की संभावना नहीं दिख रही.




















