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हाड़ौती में सैकड़ों परिवारों को सड़क पर ले आई बाढ़, ना राशन बचा और ना ही बीज

कोटा: हाड़ौती संभाग के कोटा, बूंदी व बारां में दो दिन से बाढ़ जैसे हालात हैं. अधिकांश ग्रामीण इलाके बाढ़ की जद में हैं. बारिश रूकने के बाद ग्रामीण अपने घर संभालने पहुंचे तो बाढ़ के निशान मिले. घरों में टूट-फूट के साथ अनाज व राशन भी खराब हो गया. राशन और दैनिक जरूरत और बच्चों की पढ़ाई की सामग्री पानी के साथ बह गई या भीगने से इस्तेमाल लायक नहीं बची. फसलों के लिए रखा बीज भी बारिश की भेंट चढ़ गया. जिले के कई गांवों में घरों में 9 से 10 फीट पानी घुस गया. कुछ ग्रामीणों के मकान क्षतिग्रस्त हो गए तो कच्चे घरों को खासा नुकसान पहुंचा. बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए, जिन्हें प्रशासन ने फिलहाल शरण दिलाई है.

कोटा जिले में निमोद हरिजी, डूंगरजा, सुल्तानपुर और बूढ़ादीत में ज्यादा नुकसान हुआ. बूंदी में कापरेन, कोड का बालाजी और नैनवा इलाके के कई गांव में भारी नुकसान हुआ. बूंदी के गेंडोली इलाके के पूर्व सरपंच राजेंद्र राजपुरोहित ने कहा, ग्रामीण घरों में साल भर का राशन रखते हैं. इसमें अनाज तो बाढ़ के पानी में भीगने से पूरा खराब हो गया. कई जगह अंकुरित भी हो गया. इसका उपयोग बीज में भी करना था. किसानों के सामने बीज की समस्या हो गई.

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ट्रैक्टर, वाहन व कृषि मशीनरी भी खराब: निमोदा हरिजी गांव के मोहन रेगर ने कहा कि गांव में ट्रैक्टर व खेती बाड़ी के उपकरणों में पानी भर गया. ये ट्रैक्टर्स और अन्य मशीनरी का इंजन खराब हो गया. रिपेयर में हजारों रुपए लगाने पड़ेंगे. दुपहिया और चौपहिया वाहन भी पानी भरने से खराब हो गए. कुछ लोगों ने अपने वाहनों को समय से पहले निकाल लिया,लेकिन अधिकांश ऐसा नहीं कर पाए. दूसरी तरफ खेतों में पानी भरने के चलते मक्का, सोयाबीन और उड़द की फसल को नुकसान हो रहा है. मवेशी भी बह गए.

तालाबों ने बढ़ाया खतरा: कांग्रेस नेता व कोटा दक्षिण के डिप्टी मेयर पवन मीणा ने आरोप लगाया कि निमोदा हरिजी समेत कई जगह तालाबों के पानी ने बाढ़ के हालात पैदा किए. इन तालाबों पर सरकार ने मछली पालन का ठेका दिया था. तालाबों के ओवरफ्लो होने के बावजूद भी वेस्ट वियर नहीं खोले. इसके चलते तालाब टूट गए या इनका पानी गांव में घुस गया. निमोदा हरिजी में भी बाढ़ का यही कारण है. एकाएक तालाब का पानी घुसने से ग्रामीणों को करोड़ों का नुकसान हुआ. मीणा ने सरकारी मदद नहीं मिलने का आरोप भी लगाया.
जिला परिषद ने नहीं दिया ध्यान: तालाब में मत्स्य पालन के दौरान वेस्ट वियर पर जाली लगा बंद करने के मामले में जल संसाधन विभाग सीएडी के एक्सईएन अरुण कुमार मीणा ने 15 दिन पहले जिला परिषद को पत्र लिखा था. इस पर जिला परिषद ने कोई ध्यान नहीं दिया. इसके चलते कई गांवों में बाढ़ आई. जाल के चलते वेस्ट वियर से ओवरफ्लो का पानी नहीं निकल पा रहा. इसमें कचरा फंस गया, जिससे पानी नहीं निकल पा रहा था.

 

ठेकेदार पर करेंगे कार्रवाई: बाढ़ के बाद मौके पर पहुंचे जिला परिषद के सीईओ राजपाल सिंह ने कहा कि ग्रामीणों ने यह समस्या बताई है. इस मामले में ठेकेदार पर कार्रवाई करेंगे. उन्होंने जल संसाधन विभाग के पत्र पर अनभिज्ञता जताई. जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया ने कहा कि मछली ठेकेदार के जाली लगाने से बाढ़ की स्थिति बनी है. पूरे मामले की जांच कराएंगे.

मक्का की फसल खराब घर में रखा लहसुन बह गया : बूंदी जिले के झालीजी का बनाना निवासी बनवारी लाल मीणा ने बताया कि गांव के खेतों में मक्का की वह सोयाबीन की फसल पूरी तरह खत्म हो चुकी है. उनके घर में रखा हुआ लहसुन का बीज पूरी तरह से बह गया है. अब अगली फसल के लिए ही उनके दिक्कत आ गई है. गांव की ही संतरा मीणा के घर में पानी भर चुका है. वहां तक पहुंचने की भी व्यवस्था नहीं है. मस्तराम मीणा व अन्य गांव वालों ने जैसे तैसे उनको निकाल कर उनके खाने-पीने और रहने की व्यवस्था की है. गांव की बैरवा बस्ती में घर जल मग्न हो चुके हैं, जहां जाना भी मुनासिब फिलहाल नहीं है.
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