कोटा : भीषण बाढ़ के चलते लोगों के मकान टूट गए हैं तो कई लोगों के आशियाने डूब में तब्दील हो गए हैं. ऐसा ही बूंदी जिले के कापरेन की रेलवे कॉलोनी की क्वार्टर में भी हुआ. यहां रहने वाले 35 रेलवे कार्मिकों के परिवार के करीब 150 सदस्यों के सामने समस्या आ गई. मकान में तीन से चार फीट तक पानी प्रवेश कर गया. उनका सामान तो खराब हुआ ही, लेकिन जब तक यह पानी नहीं उतरता है तब तक रहने की समस्या भी खड़ी हो गई.
ऐसे में रेलवे ने एक अनूठा तरीका अपनाते हुए एक ट्रेन को कोटा से कापरेन स्टेशन भेज दिया, जिसके दो स्लीपर कोच वहां पर खड़े कर दिए गए. रेलवे कर्मचारियों का परिवार इन रेलवे कोच को अस्थाई घर बनाकर रह रहा है. दूसरी तरफ रेलवे इन लोगों के लिए भोजन और अन्य व्यवस्था भी कर रहा है. कोटा रेल मंडल के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि कापरेन इलाके में काफी भारी बारिश हुई थी, जिससे रेलवे कर्मचारियों के क्वार्टर डूब गए थे. इन कर्मचारियों के परिवार को कहां पर शिफ्ट किया जाए, यह समस्या खड़ी हो गई थी.
वहां पर लगातार 2 दिन से पानी भी भरा हुआ है, जिसकी निकासी धीरे-धीरे हो रही है. रेलवे कर्मचारियों के परिवार की मदद के लिए दो स्लीपर के कोच वहां पर खड़े कराए गए हैं. रेलवे कर्मचारियों का परिवार अस्थाई रूप से रुका हुआ है. इन रेलवे कर्मचारियों के राशन और अन्य काफी सामान का नुकसान हुआ है. ऐसे में जब तक सामान्य स्थिति नहीं आ जाती, इन्हें भोजन भी रेलवे कोच में ही उपलब्ध करवाया जा रहा है.
अभी भी जारी है स्पीड प्रतिबंध : सवाई माधोपुर, बूंदी और कोटा जिले में भयंकर बारिश से तबाही काफी ज्यादा हुई है. इससे रेलवे भी अछूता नहीं रहा है. काफी रेलवे के स्ट्रक्चर को भी नुकसान पहुंचा है. सीनियर डीसीएम सौरभ जैन के अनुसार दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक पर कोटा से सवाई माधोपुर के बीच कई जगह पर ट्रैक के आसपास की मिट्टी निकल जाने से गति नियंत्रण लगाया हुआ है. इसका असर अभी भी ट्रेनों पर देखने को मिल रहा है. जहां ट्रेन 110 से 130 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड के बीच में गुजरती थी, वहां अब यह 10 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से निकल रही है. इसके चलते ट्रेन लेट भी हो रही है. यह एक-दो दिन में स्थिति सामान्य हो जाएगी.




















