कोटा: मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व (एमएचटीआर) में साल 2020 से 2023 के बीच अचानक बाघ व बाघिनों की मौत के मामले सामने आए थे. इसमें तीन वयस्क और दो शावकों की मौत यहां पर हो चुकी है. इसके अलावा एक शावक और एक वयस्क बाघ लापता है. उसके बाद मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में पर्यटन को गति नहीं मिल पा रही है. अब दोबारा यहां पर टाइगर के कुनबे को बढ़ाने के प्रयास हुए हैं और उसे गति देने के लिए मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से बाघिन लाने की तैयारी चल रही है.
इसी को ध्यान में रखते हुए वर्ल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) ने कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी को और ज्यादा संरक्षित करने के लिए यहां पर सर्वे शुरू किया गया है. यह डिजीज सर्विलांस सर्वे है, जिससे मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में 82 वर्ग किलोमीटर लंबे एरिया में किया जा रहा है. एमएचटीआर के चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन एसआर जाट का कहना है कि बीते साल के सर्वे शुरू कर दिया गया था, जिसमें पहले फेज का सैंपल कलेक्शन हुआ था. जिनकी एनालिसिस चल रही है.
फिलहाल, इसकी रिपोर्ट हमें नहीं मिली है, लेकिन इसकी रिपोर्ट के आधार पर रिजर्व मैनेजमेंट में काफी मदद मिलने वाली है. दूसरी तरफ यह सर्वे रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में नहीं हो रहा है, लेकिन उसके सहित रणथंबोर और सरिस्का टाइगर रिजर्व में भी इसकी रिपोर्ट काम में आ सकती है. मुकुंदरा रिजर्व के चिकित्सक डॉ. तेजेंद्र रियाड़ के अनुसार इस सर्वे में यह पता लगाया जाता है कि टाइगर को रिजर्व के आसपास के एरिया से कौन सी बीमारी जकड़ सकती है, ताकि उसका पहले प्रिवेंशन किया जा सके. इस पर इसमें इन्फेक्शन और पालतू पशुओं से टाइगर में पहुंचने वाली बीमारियां भी शामिल है. इसके अलावा मनुष्य और पालतू पशुओं में आपस में जो बीमारियां फैलती है, वह भी टाइगर तक पहुंच सकती है. ऐसे में उसकी भी मॉनिटरिंग की जा सकती है.
रिजर्व और आसपास सरकारी जानवरों में तो नहीं फैल रहा खतरा : सीआर जाट के अनुसार रिजर्व के वाइल्ड या शाकाहारी सभी वन्यजीव के नमूने लिए जाते हैं. इसके अलावा रिजर्व के आसपास आबादी भी रहती है. ऐसे में उनके डोमेस्टिक या फिर मवेशी भी रिजर्व एरिया में पहुंच जाते हैं. ऐसे में डिजीज सर्विलांस सर्वे में उन पर भी स्टडी होती है. ज्यादातर शाकाहारी जानवर के ही नमूने लिए जाते हैं, ये जंगल में प्रे बेस के साथ विचरण करते हैं और घास को भी खाते हैं. ऐसे में हार्बिवोर्स और डोमेस्टिक एनिमल का इंटरेक्शन होता है. इसे बीमारियां भी इधर से उधर चल जाती है, क्योंकि यह एक साथ घास भी चरते हैं. टाइगर या अन्य वाइल्ड एनिमल इन दोनों ही प्रकार के जानवरों का शिकार कर लेते हैं. ऐसे में अगर इनमें कोई बीमारी होती है तो वह टाइगर या अन्य वाइल्ड एनिमल तक भी पहुंच सकती है.
लोकल हॉस्पिटल और आबादी से भी लिए जाते हैं नमूने : डॉ. तेजेंद्र रियाड़ के अनुसार डिजीज सर्विलांस सर्वे नवंबर 2024 से चल रहा है. इसमें हार्बिवोर्स और डोमेस्टिक एनिमल के रक्त के नमूने लिए जाते हैं. इसके अलावा उनके मल मूत्र के भी सैंपल संग्रहित किए जाते हैं. इसके बाद उनके पीसीआर टेस्ट भी लगाए जाते हैं. दूसरी तरफ टाइगर रिजर्व के आसपास स्थित पशु अस्पतालों के भी नमूने लिए जाते हैं. वहां से भी डाटा कलेक्ट किए जाते हैं कि किस तरह की बीमारियां वहां पर आ रही है? कौन-कौनसे पशुओं में यह बीमारियां हो रही है. आबादी में रहने वाले लोगों से भी डाटा कलेक्शन किया जाता है कि उनके मवेशियों में किसी तरह की कोई बीमारी तो नहीं रही है.
मैप पर लोकेट करने के लिए जीपीएस लोकेशन भी : डॉ. रियाड़ के अनुसार साइंटिफिक तरीके से पूरी जो जांच होती है. इसको कलेक्ट करते हैं, इसके साथ ही कहां से नमूना लिया है. उसकी जीपीएस नो लोकेशन भी ली जाती है, ताकि बाद में एनालिसिस किया जा सके कि वह कहां से ली गई थी. रिपोर्ट में स्पेशली उसे मेंशन किया जाता है, ताकि डिजीज वाले एनिमल किस जगह पर है, यह एनालिसिस किया जा सके. इस रिपोर्ट में आसपास रहने वाले जानवरों के व्यवहार और उनके विचरण के तरीके को भी नोटिस किया जाता है. साथ ही बीमारियों के हिस्ट्री ली जाती है. इसमें कैमरा ट्रैप और अन्य डाटा भी कलेक्ट किया जाता है.
बीमारियों को रोकने में हो सकता है मददगार : एसआर जाट के अनुसार सर्वें में यह भी देखा जाता है कि पालतू पशु और मनुष्य दोनों में एक दूसरे में फैलने वाली बीमारियों के संबंध में भी जानकारी ले ली जाती है. इसको एनालिसिस किया जा सके, ताकि प्रीवेंटली डिसीजन लिए जा सके. इस रिपोर्ट के आधार पर टाइगर रिजर्व में बीमारियों से टाइगर को बचाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा सकते हैं, उनकी भी जानकारी मिल जाएगी. अभी पहले फेज में सर्वे सैंपल हो गए हैं. इसके अलावा उन सर्विस सैंपल की एनालिसिस की प्रक्रिया चल रही है. इसके बाद जरूरत पड़ी तो एक बार फिर यह सैंपल ले सकते हैं. रिजर्व मैनेजमेंट में यह काफी मददगार हो सकता है. अगर पता चलता है की कैटल या मवेशियों में कोई बीमारी है या फिर कोई उन बीमारियों को कैसे रोका जा सकता है? उसको लेकर एक पूरी एसओपी भी बनाई जा सकती है.
मुकुंदरा में ले जाएंगे दो बाघिन और एक बाघ : सीसीएफ जाट का कहना है कि मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में पांच बाघिन महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से लेकर आए जाने हैं. इनकी प्रक्रिया मुख्यालय स्तर पर भी चल रही है. इसमें र्वत्र में तीन और मुकुंदरा में दो बाघिन लाई जाएगी. इनके संबंध में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के स्तर पर भी प्रक्रिया चल रही है. इसके अलावा मुकुंदरा में एक बार रणथंभौर से भी लाया जाना है. इसके संबंध में भी प्रक्रिया चल रही है. वर्तमान में बारिश में टाइगर रिजर्व में नजर भी कम आते हैं, वह अपने आप को छुपा कर रखते हैं.
लगातार हो गई थी टाइगर, टाइग्रेस व शावकों की मौत : वन्य जीव प्रेमी तपेश्वर सिंह भाटी ने बताया कि एमएचटीआर 2013 में बनाया गया था. जिसके बाद यहां पर 82 स्क्वायर किलोमीटर एरिया में फेंसिंग करवाई गई. इसके साथ ही रणथंभौर टाइगर रिजर्व से 2018 में पहली बार एक बाघ को मुकुंदरा शिफ्ट किया गया था. इसके बाद दो बाघिन को यहां लाया गया. वहीं, रणथंभौर से एक बाघ खुद ही निकलकर मुकुंदरा आ गया था. ऐसे में मुकुंदरा में बाघ और बाघिन के दो जोड़े बन गए थे. एमटी 1 से लेकर एमटी 4 तक नाम दिए गए, जिनमें एमटी-2 बाघिन ने दो शावकों को जन्म दिया था. दूसरी बाघिन एमटी-4 के साथ कैमरा ट्रैप में एक शावक नजर आया था. यहां पर बाघों की संख्या बढ़कर सात हो गई थी, लेकिन अचानक से साल 2020 में बाघों की मौत हो गई. तीन वयस्क बाघ-बाघिन की मौत हुई. वहीं, एक बाघ व शावक लापता हो गया.
वर्तमान में चार टाइगर है रिजर्व में : तपेश्वर सिंह भाटी के अनुसार वर्तमान में एक बाघिन एमटी-4 यहां पर थी, जिसके बाद एक बाघ एमटी-5 को साल 2022 में रणथंभौर से यहां शिफ्ट किया गया. इसके बाद मई 2023 में एक बाघिन की मौत हो गई थी. बाघिन एमटी-4 की मौत हो गई थी, जो कि गर्भवती थी. उसके गर्भ से तीन बच्चे भी मिले थे. अब एमटी-5 अकेला बाघ बचा था. अगस्त 2023 एमटी 6 आरवीटीआर से छोड़ा गया था. इसके बाद रणथंभौर टाइगर रिजर्व की मृत बाघिन टी 114 की 11 दिसम्बर को फीमेल शावक को दिसम्बर 2024 में मुकुंदरा रिलीज किया गया. जिसके बाद 15 जून 2015 को रिजर्व की बाघिन एमटी 6 शावक के साथ नजर आई है. अब वर्तमान में टाइगर, टाइग्रेस, सब एडल्ट व शावक मिलकर चार बाघ बाघिन हो गए हैं.




















