भरतपुर: देश की रसोई में तड़का लगाने वाली सरसों और राई पर इस बार भरतपुर संभाग में संकट मंडराने लगा है. मानसून की मेहरबानी और बांधों से छोड़े गए पानी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी है. खेत जलमग्न हैं, खरीफ की फसलों का बड़ा हिस्सा खराब हो गया है और अब आशंका है कि समय पर पानी नहीं सूखा तो सरसों की बुवाई भी प्रभावित होगी. इसका सीधा असर सरसों तेल और राई की उपलब्धता पर पड़ेगा, यानी आम आदमी की रसोई तक यह संकट पहुंच सकता है.
85 हजार हेक्टेयर से अधिक फसल खराब : अतिरिक्त निदेशक कृषि देशराज सिंह ने बताया कि भरतपुर संभाग में इस बार 8.70 लाख हेक्टेयर में खरीफ की बुवाई हुई थी, लेकिन मानसून और पानी की मार से करीब 85,608 हेक्टेयर में फसल खराब हो चुकी है. सबसे ज्यादा नुकसान सवाई माधोपुर और धौलपुर जिले में दर्ज किया गया है.
- सवाई माधोपुर – 38,000 हेक्टेयर
- धौलपुर – 26,689 हेक्टेयर
- करौली – 9,130 हेक्टेयर
- भरतपुर – 5,304 हेक्टेयर
बांध से छोड़े गए पानी ने बढ़ाई मुश्किल : जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता बने सिंह ने बताया कि भरतपुर जिले के रूपवास, बयाना और उच्चैन क्षेत्र पांचना और बंध बारैठा बांध से छोड़े गए पानी से प्रभावित हैं. इन क्षेत्रों की कृषि भूमि का बड़ा हिस्सा अब भी पानी में डूबा हुआ है.
सरसों की बुवाई पर संकट : सरसों अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अशोक शर्मा का कहना है कि जिले में सरसों की बुवाई 1 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक होती है, लेकिन यदि तब तक खेतों का पानी नहीं सूखा, तो किसान मजबूरी में सरसों और राई की जगह गेहूं की बुवाई करेंगे. इसका मतलब है कि देश के सबसे बड़े सरसों उत्पादक क्षेत्र में इस बार सरसों का रकबा घट सकता है. हालांकि, अभी यह सब कहना जल्दबाजी होगा. खेत समय पर सूखकर तैयार हो गए तो बुवाई में कोई परेशानी नहीं आएगी.
रसोई पर असर : सरसों मंडी व्यापारी अमित गोयल ने बताया कि भरतपुर संभाग देश की सरसों फसल और का सबसे बड़ा उत्पादक माना जाता है. जलभराव वाले क्षेत्रों में यदि सरसों की बुवाई में कमी आती है तो यहां उत्पादन भी घटेगा. इसका सीधा असर हर घर की रसोई पर पड़ेगा. रसोई का तड़का, जिसमें तेल और राई की जरूरत पड़ती है महंगा पड़ सकता है. सरसों और सरसों के तेल के भाव भी बढ़ सकते हैं. यानी खेतों से लेकर थाली तक, हर स्तर पर महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका रहेगी.
किसान की चिंता, सरकार की चुनौती : किसान परेशान हैं कि खरीफ की फसल पहले ही चौपट हो चुकी है और अब रबी की मुख्य फसल सरसों पर संकट मंडरा रहा है. उधर सरकार के लिए चुनौती है कि किसानों को राहत कैसे मिले और रसोई की महंगाई पर काबू कैसे पाया जाए.




















