बूंदी: जिले में जारी मूसलाधार बारिश ने हालात इतने भयावह बना दिए हैं कि कोटा-लालसोट मेगा हाईवे टूटकर चूर-चूर हो गया है. जिले के बाबई और बेलगंज गांवों के बीच बहने वाली चाकन नदी के उफान ने पुल की एप्रोच सड़क को पूरी तरह निगल लिया. डामर की मोटी परतें उखड़कर बह गईं और करीब 1 किलोमीटर लंबा हिस्सा सड़क से पूरी तरह गायब हो चुका है. शुक्रवार रात से शनिवार तक नदी पर 6 फीट तक ऊफान रहा और पुल पर पानी की मोटी चादर बहती रही. शनिवार सुबह भी चाकन पुल पर करीब 2 फीट पानी दौड़ रहा था. इस तबाही के बाद हाईवे पर यातायात पूरी तरह से ठप है.
वीडियो वायरल: सोशल मीडिया पर हाईवे के उखड़े हुए हिस्सों और बहते पानी के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं. लोग बारिश से उपजे हालातों से दहशत में हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जिस सड़क पर रोजाना हजारों वाहन दौड़ते थे, वहां अब सिर्फ मलबा और उफनती नदी का पानी दिखाई दे रहा है. बाबई की ओर कोटा की तरफ लगभग एक किलोमीटर सड़क टूट चुकी है, जबकि सवाई माधोपुर जिले की तरफ बेलगंज गांव वाली एप्रोच सड़क करीब 300 मीटर तक बह गई है. हालात ऐसे हैं कि दोनों जिलों को जोड़ने वाला यह अहम मेगा हाइवे कच्चे रास्ते से भी बदतर हो गया है.
इंजीनियर ने माना, हालात बेहद गंभीर: सार्वजनिक निर्माण विभाग के इंदरगढ़ में तैनात कनिष्ठ अभियंता मनोज मीणा ने बताया कि मेगा हाईवे की देखरेख रेड कोर कंपनी करती है. लेकिन अभी यह सड़क पूरी तरह से यातायात के लायक नहीं बची है. कब तक दुरुस्ती होगी, इस बारे में कंपनी ने कोई जानकारी नहीं दी है. हालात इतने गंभीर हैं कि सिर्फ कोटा-लालसोट मेगा हाइवे ही नहीं, बल्कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे भी ठप हो गया है. कारण यह है कि लाखेरी कस्बे के पास मेज नदी की पापड़ी पुल पर भी तेज उफान से पानी बह रहा है. ऐसे में बूंदी और कोटा जिले के बीच से गुजरने वाला पूरा राष्ट्रीय मार्ग जाम हो गया है. दौसा मेगा हाइवे बीते शुक्रवार से ही बंद पड़ा है.
नैनवा से होकर सवाई माधोपुर पहुंचे: लाखेरी थाना प्रभारी सुभाष शर्मा ने बताया कि कोटा दौसा मेगा हाईवे बीते शुक्रवार से बंद पड़ा है. सवाई माधोपुर और आगे जाने वाले वाहनों को नैनवा मार्ग से उनियारा होकर सवाई माधोपुर भेजा जा रहा है. बारिश और नदियों के उफान ने जिले के कई इलाकों में यातायात को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. लोग गांवों से शहर तक जाने के लिए भी रास्ता न मिलने की वजह से परेशान हैं. आमजन अब सिर्फ इंतजार कर रहे हैं कि कब बारिश थमे और कब सड़कें फिर से जीवनदान पाएं.




















