Bikaner : पंद्रह दिवसीय खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार प्रशिक्षण संपन्न
सफल प्रतिभागियों को वितरित किए प्रमाण पत्र
बीकानेर (श्रेयांस बैद) : स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केन्द्र, बीकानेर-प्रथम द्वारा आयोजित 15 दिवसीय ‘खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार प्रशिक्षण’ का गुरुवार को हुआ।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य उर्वरक विक्रेताओं, कृषि उद्यमियों एवं स्नातकों को उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग, गुणवत्ता नियंत्रण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, उर्वरक अधिनियम एवं कृषि में नवीन तकनीकों की जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे किसानों को बेहतर तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करा सकें।
कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ. दीपाली धवन, निदेशक प्रसार शिक्षा, स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी आवश्यक है। संतुलित उर्वरक उपयोग एवं मृदा स्वास्थ्य संरक्षण की जानकारी किसानों तक पहुंचाने में उर्वरक विक्रेताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित उर्वरक विक्रेता केवल विक्रेता ही नहीं बल्कि किसानों के लिए तकनीकी सलाहकार के रूप में भी कार्य करते हैं। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों के प्रसार में प्रभावी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को कृषि क्षेत्र में नवाचारों को अपनाने तथा किसानों को गुणवत्तायुक्त कृषि आदान उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य अतिथि डॉ. वीर सिंह, अधिष्ठाता (डीन), सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय, स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर ने कहा कि कृषि विकास में ज्ञान आधारित सेवाओं का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
उर्वरक विक्रेताओं को केवल व्यापारिक दृष्टिकोण तक सीमित न रहकर किसानों को उचित उर्वरक चयन, मृदा परीक्षण आधारित पोषण प्रबंधन तथा पर्यावरण संरक्षण संबंधी जानकारी भी प्रदान करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित एवं प्रमाणित विक्रेता कृषि उत्पादन वृद्धि के साथ-साथ किसानों की लागत कम करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
सहायक निदेशक उद्यान मुकेश गहलोत ने इस विशेष प्रशिक्षण उर्वरक (फर्टिलाइज़र) प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों और उर्वरक विक्रेताओं को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा परीक्षण के आधार पर पोषक तत्व प्रबंधन तथा फसलों में उर्वरकों के वैज्ञानिक प्रयोग के बारे में जानकारी दी।
इस अवसर पर डॉ. मदन लाल रेगर, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केन्द्र, बीकानेर-I ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि 15 दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985, आवश्यक वस्तु अधिनियम, उर्वरकों की गुणवत्ता एवं मानक, विभिन्न फसलों के लिए पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, जैव उर्वरकों का उपयोग, सूक्ष्म पोषक तत्वों का महत्व, उर्वरकों का सुरक्षित भंडारण एवं परिवहन, कृषि में डिजिटलीकरण तथा कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान विश्वविद्यालय एवं कृषि विभाग के विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें उर्वरक प्रबंधन, जल संरक्षण, फसल पोषण, कृषि पर्यावरण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, मृदा परीक्षण तकनीक, कृषि उद्यमिता तथा किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि सेवाएँ उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रशिक्षणार्थियों को प्रयोगशाला भ्रमण, मृदा एवं जल परीक्षण की प्रक्रियाओं तथा कृषि विज्ञान केन्द्र की विभिन्न तकनीकी इकाइयों का अवलोकन भी कराया गया।
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डॉ. सुशील कुमार खरिया, सहायक आचार्य, कृषि महाविद्यालय, बीकानेर ने कहा कि उर्वरकों का असंतुलित उपयोग मृदा की उर्वराशक्ति को प्रभावित करता है। इसलिए मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक सिफारिशों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO), उर्वरक गुणवत्ता मानकों, नकली एवं मिलावटी उर्वरकों की पहचान तथा किसानों को वैज्ञानिक सलाह देने के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में टिकाऊ विकास के लिए वैज्ञानिक पोषण प्रबंधन को अपनाना अनिवार्य है।

समापन समारोह में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्रशिक्षण से उन्हें उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग, विधिक प्रावधानों तथा किसानों को तकनीकी परामर्श देने संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई है, जिसका उपयोग वे अपने व्यावसायिक एवं सामाजिक दायित्वों के निर्वहन में करेंगे।
कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा सफल प्रतिभागियों को खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार विषयक प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। समारोह में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, अधिकारियों, प्रशिक्षणार्थियों एवं कृषि क्षेत्र से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रहे।
Bikaner : पंद्रह दिवसीय खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार प्रशिक्षण संपन्न




















