उदयपुर : कहते हैं शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती. इसको चरितार्थ किया है राजस्थान के आदिवासी बहुल क्षेत्र उदयपुर ग्रामीण विधानसभा सीट के विधायक फूल सिंह मीणा ने, जिन्होंने बेटियों के हौसले से 40 साल बाद फिर से पढ़ाई शुरू की. वो आज पीएचडी करने की तैयारी में जुटे हैं. यहां उनकी पांच बेटियां ही पिता की ‘शिक्षक’ बन गईं.
सातवीं पास से विधायक बने : विधायक फूल सिंह मीणा जब पहली बार विधानसभा पहुंचे, तब उनकी शिक्षा केवल सातवीं कक्षा तक थी. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों में जब वे मंच से बच्चों को पढ़ाई का महत्व बताते थे, तब उनकी ही बेटियां उनसे सवाल करतीं, पिताजी, आप क्यों नहीं पढ़े ? यह सवाल उनके जीवन में सबसे बड़ा टर्निंग प्वॉइंट बन गया. फूल सिंह मीणा ने स्वीकार किया कि कठिन परिस्थितियों और मजदूरी-खेती के कारण वे आगे नहीं पढ़ पाए, लेकिन बेटियों ने ही पिता को यह भरोसा दिलाया कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती.
बेटियों ने भरा फॉर्म, पिता ने पकड़ी कलम : विधायक मीणा बताते हैं कि 40 साल बाद कलम पकड़ना अटपटा लगा, लेकिन उनकी बेटियों ने 10वीं का फॉर्म भरकर उन्हें परीक्षा देने के लिए तैयार कर दिया. ओपन से उन्होंने पहली बार 2013 में परीक्षा दी. इसी साल विधानसभा चुनाव का टिकट भी मिल गया था. परीत्रा में दो विषय क्लियर कर लिए. दो विषय दे नहीं पाया. 2014 में भी एमपी का चुनाव था, इसलिए परीक्षा नहीं दे पाया. 2015 में 10वीं परीक्षा पास की. इस तरह तीन प्रयासों में 10वीं की परीक्षा पास की. इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा. आज 67 वर्षीय मीणा एमए पॉलिटिकल साइंस में फाइनल ईयर कर रहे हैं. वो कहते हैं कि जब तक नाम के आगे ‘डॉ.’ नहीं जुड़ जाता, तब तक पढ़ाई जारी रखेंगे.
पढ़ाई और विधानसभा का संतुलन : विधायक मीणा बताते हैं कि वे विधानसभा की कार्यवाही और क्षेत्र के कार्यों के बीच का समय पढ़ाई को देते हैं. उनकी बेटियां उन्हें नोट्स बनाकर देती थीं, जिन्हें वे दिन-रात पढ़ते हैं. पढ़ाई के दौरान वे कई बार 15-15 दिन तक मोबाइल फोन बंद रख देते थे, ताकि ध्यान भटक न सके.
आदिवासी बच्चियों के लिए हवाई सफर का सपना : पढ़ाई के महत्व को समझने वाले विधायक मीणा ने अब आदिवासी बच्चियों के लिए अनोखी पहल की है. उन्होंने घोषणा की है कि 10वीं और 12वीं बोर्ड में टॉप करने वाली बच्चियों को मुफ्त हवाई यात्रा करवाई जाएगी. अब तक वे 150 से ज्यादा छात्राओं को हवाई सफर करवा चुके हैं. हाल ही में वे 50 से अधिक बेटियों को जयपुर लेकर गए, जहां बच्चियों ने मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और मंत्रियों से मुलाकात की. इस पहल का असर यह हुआ कि क्षेत्र में बाल विवाह के मामले घटे और सरकारी स्कूलों में बेटियों के नामांकन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है.
बेटियां भी कम नहीं : फूल सिंह मीणा की पांचों बेटियां आज अपनी पढ़ाई और करियर में व्यस्त हैं. इनमें से दो बेटियों की शादी हो चुकी है. एक बेटी शिक्षक है, एक स्वयं का बिजनेस चला रही है, एक बेटी लाइब्रेरी संचालित कर रही है. मीणा कहते हैं कि पिता अपने बच्चों को पढ़ाता है, लेकिन मुझे मेरी बेटियों ने शिक्षक बनकर पढ़ाया.
विधायक फूल सिंह मीणा का जीवन संघर्ष : 1959 में भीलवाड़ा जिले के गाडोली गांव में जन्मे फूल सिंह मीणा का जीवन संघर्षों से भरा रहा. पिता के निधन के बाद परिवार का सहारा बनने के लिए उन्होंने खेती और मजदूरी की. 1980 में वे जे.के. कम्पनी में 7 रुपए रोज की मजदूरी पर काम करने कोटा गए. उन्होंने मोडक सीमेंट फैक्ट्री और झालावाड़ में भी मजदूरी की. इसके बाद 1982 में उदयपुर आकर लेबर ठेकेदार के रूप में काम करने लगे. इसी दौरान वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और सक्रिय राजनीति में कदम रखा. भाजपा ने उन्हें उदयपुर ग्रामीण विधानसभा सीट से टिकट दिया और वे लगातार तीन बार से विधायक चुने गए.




















