जयपुर: प्रदेश के 129 साल पुराने ऐतिहासिक रामगढ़ बांध को जीवित करने की उम्मीदों ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है. मौसम का साथ मिलने के बाद, आज ड्रोन से देश की पहली कृत्रिम वर्षा की जाएगी. जाहिर है कि दो दशकों से सूखे पड़े रामगढ़ बांध में अब एक नई वैज्ञानिक तकनीक से पानी भरने की कोशिश की जा रही है. देश में पहली बार ड्रोन और एआई तकनीक के जरिए कृत्रिम वर्षा का प्रयोग आज दोपहर 2 बजे किया जाएगा. यह प्रयोग जयपुर के ऐतिहासिक रामगढ़ बांध पर होगा, जिसे 1981 के बाद से पूरी तरह से नहीं भरा जा सका है. इस कार्यक्रम का मकसद सतही जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना है, जिससे ना सिर्फ जयपुर को पेयजल आपूर्ति में राहत मिल सकेगी, बल्कि बांध से जुड़े पर्यावरण और जैव विविधता को भी संरक्षित किया जा सकेगा.
31 जुलाई को टली थी लॉन्चिंग, अब नई तारीख तय : इससे पहले कृत्रिम वर्षा की लॉन्चिंग 31 जुलाई को प्रस्तावित थी, लेकिन मौसम विभाग की चेतावनी के कारण कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा. इसके बाद पिछले हफ्ते बुधवार को कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा की अमेरिकी कंपनी प्रतिनिधियों के साथ बैठक में नई तारीख 12 अगस्त को निर्धारित की गई थी . रामगढ़ बांध पर यह कृत्रिम वर्षा अमेरिका की एक कंपनी की तरफ से की जा रही है, जो ड्रोन और एआई आधारित क्लाउड सीडिंग तकनीक का उपयोग करेगी. ड्रोन को ताइवान से मंगवाया गया है और इनका ट्रायल भी बांध क्षेत्र में किया जा चुका है. इस प्रक्रिया में ड्रोन हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़कर बादलों में सोडियम क्लोराइड जैसे रसायनों का छिड़काव करेगा, जिससे सूक्ष्म जलकणों का संघनन होकर बारिश की बूंदें बनेंगी और वर्षा होगी.
रामगढ़ बांध का चुनाव क्यों ? : ड्रोन के जरिए केमिकल छिड़काव करके बादलों को पंचर करने की प्रक्रिया को कृत्रिम बारिश के रूप में देखा जा रहा है. इस प्रक्रिया के लिए प्रायोगिक रूप से पहले जयपुर के जल महल पर स्थित मानसागर बांध का चुनाव किया गया था, लेकिन यह इलाका घनी आबादी के करीब होने और छोटे होने के कारण आपदा की स्थिति में बेहद खतरनाक साबित हो सकता था. विशेषज्ञों की मदद से नई जगह के चुनाव में रामगढ़ बांध को तय किया गया, जो की क्षेत्रफल के लिहाज काफी बड़ा है और फिलहाल सूखा हुआ है.
इतिहास में रामगढ़ बांध का महत्व :-
- 1897 में महाराजा माधोसिंह द्वितीय ने बांध की नींव रखी थी.
- 1903 में निर्माण कार्य पूरा हुआ.
- 1931 में वायसराय लॉर्ड इरविन ने जयपुर को रामगढ़ से जलापूर्ति योजना का उद्घाटन किया.
- 1982 एशियाई खेलों की नौकायन प्रतियोगिता का आयोजन भी यहीं हुआ था.
- यह बांध बाणगंगा नदी पर स्थित है और जमवारामगढ़ अभयारण्य का मुख्य जल स्रोत रहा है.
पहले भी हो चुका है प्रयोग : राजस्थान में कृत्रिम बारिश को लेकर हालांकि पहले भी प्रयोग किया जा चुका है, चित्तौड़गढ़ के घोसुंडा बांध पर कृत्रिम रूप से बारिश का प्रयास किया गया था, लेकिन यह कामयाब नहीं हो पाया था. तब हेलीकॉप्टर और विमान की मदद ली गई थी, इस बार पहली मर्तबा ड्रोन का इस्तेमाल करके प्रदेश में यह प्रयास किया जाएगा. आज कृत्रिम बरसात के लिए कृषि और आपदा राहत मंत्री डॉ. किरोडी लाल मीणा के साथ-साथ स्थानीय विधायक महेंद्र पाल मीणा ने बड़ी संख्या में ग्रामीणों को आमंत्रित किया है, जो कृत्रिम बरसात के साक्षी बनेंगे.
ड्रोन से कृत्रिम वर्षा: कैसे होगा प्रयोग?
- प्रयोग में ताइवान से मंगवाए गए विशेष ड्रोन का उपयोग किया जाएगा.
- ड्रोन हजारों फीट ऊंचाई पर उड़कर बादलों में सोडियम क्लोराइड जैसे रसायनों का छिड़काव करेगा.
- इससे बादलों में संघनन बढ़ेगा और बारिश की बूंदें बनेंगी, जिससे कृत्रिम बारिश संभव होगी.
मल्टी-डिपार्टमेंट कोऑर्डिनेशन से होगा कार्यान्वयन : कृत्रिम वर्षा परियोजना में कृषि विभाग, मौसम विभाग, जल संसाधन विभाग, सिंचाई विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का समन्वय रहेगा. डीजीसीए (DGCA) से ड्रोन उड़ाने की अनुमति प्राप्त हो चुकी है और 1 महीने तक इस तकनीक से जुड़ा डेटा रिकॉर्ड किया जाएगा.




















