कोटा: मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में आज एक बुजुर्ग की मौत हो गई है. यह बुजुर्ग बीते 1 महीने से अस्पताल परिसर में ही अपनी पत्नी के साथ लावारिस के तौर पर रह रहा था. मौत के बाद पत्नी का कहना है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार कैसे करवाए, क्योंकि उसके पास पैसे भी नहीं है और न हीं वह लोगों को जानती है. इसके साथ ही उसने अपने बेटे पर भी घर से बाहर निकालने का आरोप लगाया है. इसके बाद जन सहयोग के जरिए अंतिम संस्कार करवाने की तैयारी शुरू की गई है.
कॉन्स्टेबल राजकुमार स्वामी का बयान: मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल की चौकी के कॉन्स्टेबल राजकुमार स्वामी का कहना है कि बारां जिले के नारेडा निवासी गोपाल यादव और उसकी पत्नी लीलाबाई बीते 1 महीने से अस्पताल परिसर में ही लावारिस की तरह रह रहे थे. जैसे-तैसे ही भोजन का जुगाड़ करके यहां पर दिन निकाल रहे थे. गोपाल यादव को टीबी था, ऐसे में उसे अस्पताल में कई बार भर्ती भी करवाया गया.
अस्पताल में उपचार के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया जाता था. इसके बाद भी वे अस्पताल परिसर को नहीं छोड़ रहे थे. उन्हें अस्पताल परिसर से जाने के लिए भी कहा गया था और आर्थिक मदद की बात भी कही गई थी, लेकिन बाद में वह नहीं गए. आज अस्पताल में गेट नंबर 4 इमरजेंसी के बाहर गोपाल यादव की मौत हो गई. इसके बाद उसकी पत्नी लीलाबाई ने आकर कहा कि बेटे ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया था और अब उसके पास अंतिम संस्कार का पैसा भी नहीं है.
जन सहयोग से हो रही तैयारी: कॉन्स्टेबल राजकुमार स्वामी का कहना है कि इसके बाद पहले उसे घर भेजने की बात की गई, लेकिन उसकी मां ने मना कर दिया कि बेटे से संपर्क नहीं हो पा रहा है. वह अपने पति के शव को अंतिम संस्कार के लिए गांव ले जाना भी नहीं चाह रही है. उसके बाद जन सहयोग से अंतिम संस्कार करवाया जा रहा है.




















