जयपुर : आज रक्षाबंधन है. राजस्थान क्रिकेट की बात करें तो भाइयों के बाद बहनें भी क्रिकेट में दमखम दिखा रही हैं. इसे राजस्थान महिला क्रिकेट का नया सवेरा कहा जा रहा है. हरमनप्रीत कौर, स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, जेमिमा रोड्रिग्स जैसी खिलाड़ियों ने भारत में महिला क्रिकेट का स्वरूप बदल दिया. आज ये कई महिला क्रिकेटरों की आदर्श हैं. राजस्थान में क्रिकेट का क्रेज अब पुरुषों तक सीमित नहीं रहा. समय के साथ महिलाएं भी इसमें मजबूत पहचान बना रही है. इसका ताजा उदाहरण हाल में राजस्थान क्रिकेट संघ (RCA) की अंडर-19 महिला क्रिकेट ट्रायल है, जिसमें राज्य के कोने-कोने से रिकॉर्ड संख्या में महिला क्रिकेटर्स आईं. पहली बार RCA के इतिहास में करीब 450 महिला खिलाड़ियों ने ट्रायल में हिस्सा लिया. यह राज्य में महिला क्रिकेट के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है.
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की एडहॉक कमेटी सदस्य आशीष तिवाड़ी ने कहा कि महिला क्रिकेटरों की भागीदारी दर्शाती है कि अब लड़कियां भी खेल के मैदान में पीछे नहीं है. सामाजिक बदलाव, परिवारों का सहयोग और क्रिकेट संघों की सक्रियता के कारण अब अधिकाधिक लड़कियां इस खेल को करियर के रूप में देख रही हैं. ट्रायल में दिखे टैलेंट से साबित होता है कि इनमें कुछ खिलाड़ी भारतीय टीम का हिस्सा जरूर बनेंगी. यह ट्रायल न केवल खिलाड़ियों के लिए मौका है बल्कि महिला क्रिकेट को लेकर समाज की बदली सोच में सकारात्मक परिवर्तन का भी प्रतीक है. राज्य में अब महिला क्रिकेट केवल खेल नहीं, बल्कि आंदोलन बन रहा है.
पहली बार गांवों और कस्बों से खिलाड़ी आईं: जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम स्थित RCA एकेडमी पर ट्रायल्स में पहली बार राजस्थान के विभिन्न जिलों से क्रिकेटर्स जयपुर पहुंचीं. गांवों और कस्बों से लेकर बड़े शहरों तक की लड़कियों ने इस मौके को अपनी प्रतिभा दिखाने के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा. कई खिलाड़ी पहली बार इतने बड़े स्तर पर खेलने आई थीं. उनके आत्मविश्वास और खेल के प्रति समर्पण ने सभी को प्रभावित किया.
तब स्थिति अलग थी: राजस्थान वीमेंस क्रिकेट की मेंटोर गंगोत्री चौहान का कहना था कि एक समय हम क्रिकेट खेलते थे, तब 19 और सीनियर की एक ट्रायल होती थी. तब मुश्किल से 50 महिला क्रिकेटर ट्रायल्स में हिस्सा लेती थी. अब हालात बदल रहे हैं. गंगोत्री ने कहा कि पहले वीमेंस क्रिकेट का सेंटर जयपुर जोधपुर ,अजमेर होता था, लेकिन अब ऐसे जिलों से भी खिलाड़ी पहुंच रही है, जहां क्रिकेट खेलना सिर्फ सपना होता था. आने वाले समय में महिला क्रिकेट के लिए और सुविधाएं बढ़ेंगी. ट्रेनिंग कैंप्स और टूर्नामेंट्स बढ़ेंगे. इससे ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की लड़कियों को भी आगे बढ़ने का मौका मिलेगा. इस ऐतिहासिक भागीदारी के साथ यह कहना गलत नहीं होगा कि राजस्थान में महिला क्रिकेट अब अपने परवान पर है. आने वाले समय में राज्य की बेटियां भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करेंगी.
कहां से कितनी महिला क्रिकेटर आईं
- जयपुर 72
- जोधपुर 45
- नागौर 26
- झुंझुनू 22
- बीकानेर 30
- हनुमानगढ़ 16
- दौसा 10
- डूंगरपुर 12
- टोंक 10
- अलवर 14




















