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श्राद्ध पक्ष: आश्विन कृष्ण चतुर्दशी और सर्व पितृ अमावस्या का विशेष महत्व

अजमेर : श्राद्ध पक्ष में आश्विन कृष्ण चतुर्दशी और सर्व पितृ अमावस्या का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. इस विशेष अवसर पर पुष्कर तीर्थ में तीर्थ यात्रियों की बड़ी संख्या में उमड़ने की संभावना है. यह दिन दिवंगत पूर्वजों की आत्मिक शांति के लिए विशेष रूप से माना जाता है. यही वजह है कि शनिवार और रविवार को पुष्कर तीर्थ में अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मिक शांति के लिए बड़ी संख्या में तीर्थ यात्री आएंगे.

चतुर्दशी का महत्व : ज्योतिष पंडित कैलाश नाथ शर्मा बताते हैं कि ज्योतिष शास्त्र और पुराणों में वर्णित है कि आश्विन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आकस्मिक घटनाओं, दुर्घटनाओं, अपघातों, अग्नि, जल या जहर से मृत्यु प्राप्त करने वाली आत्माओं के लिए नारायण बलि, पिंडदान, तर्पण, मार्जन और दान पुण्य करने से उन्हें मोक्ष और आत्मिक शांति मिलती है. इस दिन उनके नाम और गोत्र से श्राद्ध कर्म और दान पुण्य करने से उन्हें सद्गति मिलती है. यही वजह है कि यदि किसी व्यक्ति की अकाल मृत्यु हुई है तो उसके निमित्त श्राद्ध कर्म करने का सबसे उपयुक्त दिन श्राद्ध पक्ष में चतुर्दशी है. पंडित शर्मा बताते हैं कि चतुर्दशी पर किया गया श्राद्ध कर्म से दिवंगत आत्मा को मुक्ति मिलती है और वह प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती जिससे परिवार में खुशहाली आती है और अटके हुए काम बनने लगते हैं.

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पंडित शर्मा बताते हैं कि आश्विन कृष्ण अमावस्या जिसको देव पितृ कार्य और सर्व पितृ अमावस्या भी कहा जाता है. सर्वपितृ अमावस्या के दिन को जाने अनजाने, भूले बिसरे जिनकी तिथि, वार, स्थान, मृत्यु का मालूम नहीं है, उन सभी मृत आत्माओं के लिए इस दिन नारायण बलि, पिंड पिंडदान, तर्पण मार्जन करने से दिवंगत आत्मा स्वर्ग गामी होती हैं. उन्होंने बताया कि दान पुण्य करने से पितृ प्रसन्न होते हैं. इस दिन तीर्थ, नदियों, समुद्र , कुआं , बावड़ी, पवित्र, जलाशय, पुष्कर जैसे महान तीर्थ में श्राद्ध कर्म और दान पुण्य करने से अक्षय गुना फल मिलता है. पूरे वर्ष में श्राद्ध पक्ष 16 दिन ही होते हैं. इसलिए सभी जनमानस को पितरों के निमित्त श्राद्ध कर्म अवश्य करना चाहिए. साथ ही जल, अन्न, वस्त्र, मिष्ठान, फल, ठंडे पेय पदार्थ, धन का दान, वृक्ष लगाना और गौ, पशु, पक्षी सेवा से फल मिलता है. उन्होंने बताया कि पितृ अपनों से ही आस करते हैं. यदि उनके निमित्त श्राद्ध कर्म किया जाता है तो बदले में वह अपना आशीर्वाद देकर लौटते है. इसलिए श्राद्ध पक्ष में श्राद्ध कर्म करने के लिए सर्व पितृ अमावस्या को विशेष माना जाता है.

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