जयपुर: विधानसभा में कैमरों के जरिए विपक्षी सदस्यों की कथित जासूसी के मामले को लेकर कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े से मिला और इस पूरे मामले की जांच की मांग की. प्रतिनिधिमंडल में उप नेता प्रतिपक्ष रामकेश मीणा, वरिष्ठ विधायक राजेंद्र पारीक, मुख्य सचेतक रफीक खान, विधायक अमित चाचाण और अमीन कागजी शामिल थे. जूली ने बताया कि राज्यपाल ने इस मामले में पूरी जांच का आश्वासन दिया है. जूली ने कहा कि हमने सदन में भारतीय जनता पार्टी के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग और विधायक गोपाल शर्मा की ओर से की गई अनर्गल टिप्पणी के बारे में भी राज्यपाल को अवगत करवाया है. वहीं गोपाल शर्मा के खिलाफ बुधवार को सदन के अंतिम दिन विशेषाधिकार हनन का नोटिस भी लगाया है.
1 करोड़ 9 लाख रुपए में बदले गए कैमरे: जूली ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय जब सीपी जोशी विधानसभा अध्यक्ष थे, तब यूट्यूब के जरिए लाइव प्रसारण के लिए कैमरे लगाए गए थे. वह भी 360 डिग्री के विजुअल देते थे. लेकिन अब उन कैमरों को बदल दिया गया है. इसके साथ ही विधानसभा में लगे तमाम कैमरों को बदल दिया गया है. एक करोड़ 9 लाख रुपए का टेंडर से दो स्पाई कैमरे लगाए गए हैं. जूली ने कहा कि एक तरफ जहां तमाम कैमरे एक करोड़ 9 लाख रुपए के बदले गए हैं. तो वहीं दो जासूसी कैमरे भी 18 लाख 46 हजार में लगाए गए हैं. सार्वजनिक निर्माण विभाग ने इसका टेंडर दिया था.
जूली ने दावा किया कि टेंडर में भी साफ लिखा हुआ है कि दो ऑडियो रिकॉर्डिंग वाले कैमरे लगाए गए हैं. अब मैं विधानसभा अध्यक्ष से पूछना चाहता हूं कि अपग्रेड कैमरे के साथ ही दो स्पाई कैमरे लगाए गए हैं. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विधानसभा स्पीकर को बताना चाहिए कि एक करोड़ 9 लाख रुपए में कौन-कौन से कैमरे और माइक लगे हैं और किसको टेंडर दिया गया है. वहीं दो स्पाई कैमरे किस मकसद से लगाए हैं. इसे लगाने की किसने परमिशन दी थी.
विधानसभा अध्यक्ष के पास है दो स्पाई कैमरों का एक्सेस: नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सदन में जो अपग्रेड कैमरे लगे हैं, उनका एक्सेस पूरी विधानसभा के पास है. जब लाइव टेलीकास्ट होता है तो पूरे राजस्थान और पूरा देश में उसे देखा जा सकता है. लेकिन जो दो स्पाई कैमरे लगे हैं, उनका एक्सेस किसी के पास नहीं है. केवल विधानसभा स्पीकर के पास है और उसका पूरा सिस्टम उनके रेस्ट रूम में लगा हुआ है.
ज्वाइंट कमेटी बनाने की मांग: जूली ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच के लिए एक ज्वाइंट कमेटी बनाई जाए. इसमें सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्षी सदस्यों को भी शामिल किया जाना चाहिए. साथ ही अन्य दलों और निर्दलीय विधायकों को भी शामिल किया जाना चाहिए. वहीं हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जस्टिस को भी इस कमेटी में शामिल किया जाना चाहिए. जूली ने कहा कि हमारी मांग है कि तुरंत विधानसभा को सील करके जांच की जाए ताकि कैमरा की अदला-बदली नहीं हो सके और रिकॉर्डिंग का एक्सेस दूसरी जगह नहीं जा सके. उप नेता प्रतिपक्ष रामकेश मीणा ने कहा कि विपक्ष ही नहीं सत्ता पक्ष के विधायक भी कैमरों से रिकॉर्डिंग को लेकर डरे हुए हैं.




















