भरतपुर: शारदीय नवरात्रा इस बार अद्भुत संयोग लेकर आ रहे हैं. तृतीया तिथि बढ़ने से नवरात्रा 9 की बजाय पूरे 10 दिन तक चलेंगे. धर्माचार्यों के अनुसार नवरात्रा का बढ़ना और श्राद्ध पक्ष (कनागत) का घटना दोनों ही शुभ संकेत माने जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं में यह संयोग अत्यंत दुर्लभ और फलदायी माना जाता है. खास बात यह है कि इस बार नवरात्रा सोमवार, 22 सितंबर से शुरू हो रहे हैं. वार और तिथि के इस संयोग से मां दुर्गा गज (हाथी) पर सवार होकर पधारेंगी. जब भी देवी हाथी पर सवार होकर आती हैं तो गज लक्ष्मी योग बनता है, जो विशेषकर व्यापारी वर्ग के लिए समृद्धि और उन्नति का संकेत माना जाता है.
पंडित मनु मुद्गल ने बताया कि ग्रह-नक्षत्रों की सामान्य स्थिति भले ही व्यापारियों के लिए उतनी अनुकूल न दिख रही हो, लेकिन गज लक्ष्मी योग के बनने से व्यापारी वर्ग को लाभ होगा और व्यापार में वृद्धि की संभावना है. पंडित मुद्गल ने बताया कि वर्षभर में चार नवरात्र मनाए जाते हैं. चैत्र और आश्विन मास के नवरात्रा सबसे प्रमुख हैं. आषाढ़ और माघ मास के नवरात्र भी विशेष महत्व रखते हैं. इन सभी नवरात्रों में पूजन-विधान एक समान रहता है. भक्त अपने इष्ट की आराधना कर परिवार के सुख, समृद्धि, आरोग्य और ज्ञान की कामना करते हैं.
गज लक्ष्मी योग का महत्व: पंडित मनु मुद्गल ने कहा कि गज लक्ष्मी योग अत्यंत मंगलकारी संयोग है. इसका अर्थ है देवी लक्ष्मी हाथी पर सवार होकर पधारती हैं. हाथी शांति, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक है. इस योग के प्रभाव से धन-संपत्ति की वृद्धि, व्यापार में उन्नति और नए अवसर प्राप्त होते हैं. व्यापारी वर्ग के लिए यह समय विशेष फलदायी रहेगा.
व्रत और साधना का सही स्वरूप: पंडित मुद्गल ने कहा कि नवरात्र व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं है, बल्कि यह मन, इंद्रियों और व्यवहार का संयम है. किसी की हिंसा न करना, किसी का दिल न दुखाना और ब्रह्मचर्य का पालन करना भी व्रत का ही हिस्सा है. यही व्रत का वास्तविक स्वरूप है.उन्होंने यह भी बताया कि ग्रीष्म और वर्षा ऋतु के बाद शरद ऋतु का आगमन होता है. यह समय शरीर को पुष्ट बनाने और स्वास्थ्य को स्थिर रखने का होता है. नवरात्र साधना और व्रत शरीर को शुद्ध और मन को शांत करने के लिए आदर्श माने जाते हैं. 10 दिन तक चलने वाले इस नवरात्र का समापन दशहरे पर होगा. इस दिन भक्त मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन कर परायण करेंगे और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करेंगे. पंडित मुद्गल का कहना है कि यह नवरात्रा काल साधना, आराधना और कल्याण की दृष्टि से अत्यंत फलदायी सिद्ध होगा.




















