बाड़मेर: 1965 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए 17 रेलवे कर्मचारियों की याद में मंगलवार को बाड़मेर जिले के सीमावर्ती गडरा रोड में मेला लगा. रेलवे अधिकारियों और शहीदों के परिजनों ने शहीद रेल कर्मचारियों को याद करते हुए नमन किया. इस दौरान ‘शहीद अमर रहे’ के जयकारों से सीमावर्ती क्षेत्र गूंज उठा.
मंगलवार को जिले के सीमावर्ती गडरा रोड में शहीद रेल कर्मचारियों की याद में मेले का आयोजन किया गया. इस मेले में भाग लेने के लिए जोधपुर रेल मंडल के प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी समेत कई रेलवे अधिकारी बाड़मेर होते हुए गडरा रोड पहुंचे. बाड़मेर रेलवे स्टेशन से एक ट्रेन गडरारोड के लिए रवाना हुई. इस ट्रेन से बड़ी संख्या में लोग गडरा रोड पहुंचे. यहां पर जोधपुर डीआरएम सहित रेलवे और प्रशासनिक अधिकारी, शहीदों के परिवार और ग्रामीणों ने शहीद स्मारक पर माल्यार्पण करके श्रद्धांजलि दी. इसके बाद डीआरएम ने रेलवे शहीद संग्रहालय का अवलोकन किया.
इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए डीआरएम अनुराग त्रिपाठी ने कहा कि भारत-पाक में हुए 1965 के युद्ध के दौरान रेलवे की 17 कर्मचारी शहीद हुए थे. जिनकी याद में गडरा रोड में शहीद स्मारक बनाया गया है. हर साल यहां मेला लगता है. उन्होंने कहा कि इस मेले में उन साथियों को याद किया जाता है, जिन्होंने अपने फर्ज के खातिर बलिदान दिया. उन्होंने बताया कि आज के दिन सैकड़ों लोग शहीद स्मारक पर आए हैं. उन्होंने कहा कि हम भी जोधपुर रेल मंडल की टीम के साथ शहीदों को नमन ओर पुष्पांजलि अर्पित करने आए.
उल्लेखनीय हैं कि भारत-पाक के बीच हुए 1965 के युद्ध में गडरा रोड के निकट ट्रेन सेना के लिए रसद सामग्री लेकर सीमा की ओर बढ़ रही थी. तभी पाक सेना ने ट्रेन पर बमबारी शुरू कर दी थी. रेलकर्मियों ने प्राणों की परवाह न करते हुए पटरियों को दुरुस्त किया और जलती हुई ट्रेन को सीमा तक पहुंचाया. इस दौरान 17 रेलकर्मियों ने अपने प्राणों की आहूति दी. इन शहीदों की याद में गडरा रोड में हर साल 9 सितम्बर को मेले का आयोजन किया जाता है. इनकी स्मृति में यहां एक शहीद स्मारक और रेलवे संग्रहालय भी बनाया गया है, जो इन वीरों की गाथा को जीवंत रखे हुए है.




















