धौलपुर: राजस्थान के धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व क्षेत्र में इस बारिश के सीजन में विभाग ने बाघों की लोकेशन एवं हरकतों पर नजर रखने के लिए ड्रोन से निगरानी शुरू कर दी है. सरमथुरा के घने डांग क्षेत्र में वन विभाग की कई टीमें ड्रोन कैमरे की मदद से बाघों की देखभाल कर रही हैं. इसके अलावा ड्रोन के माध्यम से वनस्पति का बीजारोपण भी किया जा रहा है, ताकि डांग क्षेत्र में हरियाली बनी रहे.
टाइगर रिजर्व के डीएफओ डॉ. आशीष व्यास ने बताया किगत दिनों से धौलपुर जिले में भारी बारिश का दौर चल रहा है. बारिश की वजह से बाघों की गणना में परेशानी हो रही थी. हालांकि, विभाग ने सुनिश्चित किया है कि सभी बाघ टाइगर रिजर्व क्षेत्र में सुरक्षित हैं, लेकिन बारिश की वजह से पारंपरिक तरीके से ट्रैकिंग करने में दिक्कत हो रही थी. ऐसे में वन विभाग द्वारा उच्च अधिकारियों के निर्देश पर ड्रोन कैमरे की मदद से बाघों पर निगरानी रखी जा रही है.
इसका दूसरा बड़ा फायदा यह है कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र को हरा-भरा रखने के लिए ड्रोन के माध्यम से बीजारोपण भी किया जा रहा है. सीताफल, करंज, बेर, कूमठा, इमली आदि वनस्पतियों के बीजों की ‘बारिश’ की जा रही है, जिससे बारिश के सीजन में ये वनस्पतियां उगकर तैयार हो जाएंगी. घना जंगल होने की वजह से बाघों को सुरक्षित रहने में सुविधा होगी.
व्यास ने बताया कि धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व क्षेत्र काफी दुर्गम है. जंगल और ऊंची-नीची पहाड़ियां होने की वजह से काम में परेशानी होती है. जंगल की कटाई पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है. डांग क्षेत्र को हरा-भरा रखने के लिए ड्रोन कैमरे के माध्यम से बीजारोपण किया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि धौलपुर का डांग क्षेत्र वन्यजीवों के लिए बेहद सुरक्षित और अनुकूल है और वन विभाग लगातार निगरानी रख रहा है. उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में जिले के डांग क्षेत्र में 5 से 6 बाघ और बाघिनों की हरकतें अक्सर देखी जाती हैं. इसके अलावा, करीब एक दर्जन तेंदुए भी डांग क्षेत्र में विचरण कर रहे हैं. आगामी समय में वन्यजीवों की संख्या में और अधिक इजाफा देखने को मिल सकता है.




















