खैरथल तिजारा: जिले की रहने वाली कंचन सैनी ने छोटी उम्र में बड़ी सफलता हासिल की है. फिलहाल, कंचन अपने पिता के साथ खैरथल में योग एकेडमी संचालित कर युवा वर्ग को योग से जोड़ने के साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए खिलाड़ी भी तैयार कर रही है. वहीं, कंचन के पिता भी 10 बार से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ताइक्वांडो में प्रतिनिधित्व कर मेडल जीत चुके हैं. साथ ही वह फुटबॉल में भी नेशनल स्तर पर खेल चुके हैं.
दरअसल, अपने पिता का खेल के प्रति समर्पण और खिलाड़ी के जज्बे को देख कंचन ने अपने खेल करियर की शुरुआत की. शुरुआती स्तर पर उन्होंने ताइक्वांडो में अपनी किस्मत आजमाई. इस खेल में उन्होंने मेहनत कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व कर गोल्ड मेडल हासिल किया. वहीं, कोरोना महामारी के दौरान जब दुनिया थम सी गई तब कंचन ने पिता के साथ योग की शुरुआत की. पिता की देखरेख में धीरे-धीरे कंचन ने योग में अपने आप को परिपक्व किया और साल 2021 में दो घंटे से भी ज्यादा समय तक शीर्षासन योग कर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया.
कंचन सैनी ने बताया कि बचपन से ही उन्होंने अपने पिता को ताइक्वांडो खेल खेलते हुए देखा. वह अपने पिता के साथ कई बार प्रैक्टिस पर भी गई, तब कंचन ने सोचा कि इसी खेल को सीखकर आगे बढ़कर देश का नाम रोशन करना है. इसके बाद कंचन ने ताइक्वांडो खेल की शुरुआत की. उन्होंने बताया कि पिता हरिओम सैनी की देखरेख में उन्होंने ताइक्वांडो खेल की बारीकियां सीखी और इसमें आगे बढ़ती गईं. उन्होंने ताइक्वांडो खेल में तीन बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया. इसमें चीन, थाईलैंड व पंजाब में उन्होंने अपने खेल का प्रदर्शन किया, जिसमें तीनों में ही गोल्ड मेडल हासिल किया है. उन्होंने बताया इसके लिए पिता की देखरेख में कड़ी मेहनत की, जिसका उन्हें परिणाम मिला.
कोरोना में किया योग शुरू : कंचन सैनी ने बताया कि कोरोना महामारी के समय जब देश थम सा गया और लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल सकते थे. इस दौरान उनकी ताइक्वांडो की प्रैक्टिस पर भी ब्रेक लगा. कंचन के पिता हरिओम सैनी ने बताया कि कोरोना के दौरान भी वह लोगों को घर पर योग सिखाते थे. एक दिन कंचन ने भी योग सीखने की बात कही. उन्होंने बताया कि इसके बाद कंचन रोजाना योग की प्रैक्टिस करने लगी. हालांकि, शुरुआत में वह शीर्षासन योग कम ही समय तक कर पा रही थी. इसके बाद पिता ने कोच की तरह बेटी को योग के बारे में सभी चीजें सिखाई, जिसका कंचन निरंतर अभ्यास करती. इसका परिणाम रहा कि कंचन मात्र 6 माह में ही शीर्षासन में परिपक्व हो गई. कंचन ने बताया कि वह योग में नेशनल स्तर पर मेडल भी जीत चुकी हैं.
शीर्षासन कर बनाया विश्व रिकॉर्ड : कंचन के पिता हरिओम सैनी ने बताया कि इसके बाद 2021 में जयपुर में वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें कंचन ने भाग लिया. उन्होंने बताया कि कंचन में 16 साल की उम्र में 2:30 घंटे तक शीर्षासन कर नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया. उन्होंने बताया कि इससे पहले हरियाणा की मनीषा नाम की खिलाड़ी (60 मिनट) का रिकॉर्ड था. अभी भी कंचन निरंतर योग करती हैं और आने वाले समय में अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ने को तैयारी कर रही हैं. कंचन को मत्स्य खेल रत्न अवॉर्ड भी मिल चुका है.
पिता-पुत्री की जोड़ी कर रही खिलाड़ी तैयार : कंचन सैनी ने बताया कि वह योग से एमए की डिग्री हासिल कर चुकी है. फिलहाल, खैरथल में वह अपने पिता के साथ एकेडमी संचालित कर रही हैं. यहां उनकी एकेडमी में वह अपने जैसे खिलाड़ियों को तैयार कर रही है. उन्होंने बताया कि जहां उनकी कमी रह गई, वह नए खिलाड़ियों को तैयार कर उन कमी को पूरा करने में लगी है. वहीं, एकेडमी के कुछ खिलाड़ी नेशनल स्तर के लिए भी सिलेक्ट हुए हैं. उन्हें युवा साथियों से अपील की है कि किसी भी फील्ड में जाएं, लेकिन पूरी मेहनत करें जिससे कि उसमें सफलता मिल सके. यदि किसी कारणवश सफल नहीं हो पाए तो हताश नहीं होकर दूसरी बार अधिक मेहनत कर फिर से कोशिश करे सफलता जरूर मिलेगी.
पिता रह चुके फुटबॉल व ताइक्वांडो के खिलाड़ी : कंचन के पिता हरिओम सैनी ने बताया कि उन्हें शुरुआत से ही खेल के प्रति रुचि रही है. वह ताइक्वांडो से पहले फुटबॉल में भी नेशनल स्तर के खिलाड़ी रहे हैं. वहीं, ताइक्वांडो में करीब 10 बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका भी मिला है, जिसमें 2007 में चीन में उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम किया था.




















