जोधपुर : आजकल फास्ट फूड खाना आम बात हो गई है. बच्चे से लेकर बड़े तक इसे पसंद करते हैं, लेकिन लगातार इसका सेवन कितना हानिकारक होता जा रहा है, इसका अंदाजा लगाना बहुत कठिन है. खास तौर से युवा जो घर से दूर पढ़ाई, जॉब या किसी और कारण से रह रहे हैं, वो अधिकाधिक फास्ट फूड का उपयोग करते हैं. इसी कारण वे इसके दुष्प्रभाव से ग्रसित हो रहे हैं. जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में सप्ताह में तीन से पांच दिन फास्ट फूड खाने वाले युवा पाचन संबंधी परेशानियों को लेकर आ रहे हैं.
पिज्जा, मोमोज सहित कई फास्टफूड खाने वाले युवा कई परेशानियों से ग्रसित हो रहे हैं, जो 50 की उम्र के बाद लोगों को होती हैं. कोरोना के बाद यानी पिछले पांच साल में बवासीर, फिशर व फिस्टूला जैसे रोगियों की संख्या करीब तीन गुना बढ़ी है. यह समस्या इसलिए भी विकराल है, क्योंकि पहले अधिकांश समय यह बीमारी 40 या 50 की उम्र के बाद होती थी, लेकिन अब यह बीमारी 20 से 25 साल के युवाओं में भी हो रही है. ये काफी गंभीर है. एमडीएम अस्पताल में सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. दिनेश दत्त शर्मा बताते हैं कि युवाओं में यह परेशानी ज्यादा सामने आ रही है. प्रतिदिन ओपीडी में 15 से 20 ऐसे युवक हमारे पास आ रहे हैं, जिनकी समस्या पाचन संबंधी सर्जरी तक पहुंच रही हैं.
मैदा सर्वाधिक हानिकारक, देता है कब्ज : डॉ. शर्मा ने बताया कि तीखे मसाले, फास्ट फूड के साथ ही 18 से 30 साल की आयु वर्ग के युवा पानी का सेवन कम करते हैं. इससे मसालेदार सॉस से बनने वाले यह फास्टफूड का मैदा आंतों में जमा हो जाता है. इस आयु वर्ग में मेल-फिमेल दोनों तरह के मरीज आ रहे हैं. उनको सलाह दी जा रही है कि फास्ट फूड से दूरी बनाएं, पर्याप्त वाटर इंटेक करें, जिससे आंतों को राहत मिले, क्योंकि मैदा जमा होने के बाद कब्ज की परेशानी होने लगती है. खास तौर से मोमोज का सेवन बहुत सोच समझ करना चाहिए. यह मोमोज पहाड़ी क्षेत्र का भोजन है.
युवाओं की यह परेशानी : डॉ. शर्मा ने बताया कि जो केस हमारे पास आते हैं उनमें ज्यादातर लोग पूरे दिन कोचिंग में रहते हैं या सुबह समय पर भोजन नहीं करते हैं. शाम को कोचिंग या जॉब से फ्री होने पर रूम पर खाना बनाने के बजाय सैंडविच, पिज्जा, मोमोज खाते हैं. इन्हें खाने के बाद सोने चले जाते हैं. ऐसे में जो खाया उसमें फायबर पहले से ही कम होता है और वे पर्याप्त पानी पीए बिना सो जाते हैं. यह नियमित क्रम पेट में दर्द की शुरुआत करता है.
साथ में लगातार सीटिंग : फास्ट फूड लेने वाले कोचिंग या जॉब वाले युवा को कुछ समय बाद कब्ज की परेशानी होने लगती है. वॉशरूम में लंबा समय लगता है. इसके चलते सामान्य खाने से भी लोग परहेज करने लगते हैं. फिर अपने आफिस या कोचिंग में घंटों सीटिंग करते हैं. इससे उनके कब्ज की स्थिति में उनको बैठने में धीरे-धीरे परेशानी होने लगती है. धीरे-धीरे फिशर की परेशानी होने लगती है. इस तरह के मामले समय पर आ जाते हैं तो उनको दवाइयों से ठीक करते हैं. साथ में उनको फास्ट फूड से दूरी और थोड़ी लाइफ स्टाइल बदलने की सलाह दी जाती है.
क्या परेशानी होती है :
बवासीर : गुदा या मलाशय की नसों में सूजन और फूलावट आ जाती है. इसमें मलत्याग के दौरान खून आना और गुदा के पास गांठ या मस्से निकल आते हैं.
फिशर : गुदा की त्वचा या अंदर की परत में दरार आ जाती है. यह अक्सर कठोर मल या कब्ज के कारण होता है. इसमें मलत्याग के दौरान तीव्र जलन और तेज दर्द होता है. यह लंबे समय तक रहता है. यह स्थिति पाइल्स से अलग है, क्योंकि इसमें नसें नहीं फूलती.
फिस्टुला : गुदा और उसके पास की त्वचा के बीच एक खड्डा बन जाता है. यह अक्सर किसी पुराने संक्रमण या फोड़े के कारण होता है. गुदा के पास लगातार मवाद आता है. बार-बार सूजन और दर्द रहता है. लंबे समय तक न भरने वाला जख्म बन जाता है.
कितना फाइबर खाना चाहिए? : 2,000 कैलोरी वाले आहार पर वयस्कों के लिए प्रतिदिन लगभग कम से कम 28 ग्राम फाइबर खाना चाहिए. फाइबर की कमी के सामान्य लक्षणों में कब्ज, वजन बढ़ना, अस्थिर रक्त शर्करा का स्तर और पेट फूलना शामिल हैं. डाइट में फाइबर बढ़ाने से इनमें कमी के साथ साथ टाइप 2 डायबिटज का खतरा भी कम होता है.




















